यह है विश्व का इकलौता त्रेतायुगीन मंदिर,यहां विदेशों से भी आते है भक्त,See video

यह है विश्व का इकलौता त्रेतायुगीन मंदिर,यहां विदेशों से भी आते है भक्त,See video

monu sahu | Publish: Aug, 12 2018 05:33:24 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

यह है विश्व का इकलौता मंदिर त्रेतायुगीन मंदिर,यहां विदेशों से भी आते है भक्त

ग्वालियर। विश्व के इकलौते रामायाणकालीन शनि मंदिर में शनिवार को नौ लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन और पूजा-आराधना की। शुक्रवार-शनिवार की आधी रात को आयुक्त एमके अग्रवाल और कलेक्टर भरत यादव ने सबसे पहले विधि-विधान से पूर्जा-अर्चना की। उसके बाद दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह 11 बजे तक ही चार लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए। पिछले कई मेलों की तुलना में इस बार भक्तों की कई गुना ज्यादा भीड़ थी। प्रशासन ने इसकी वजह हरियाली अमावस के साथ किसानों का फुर्सत में होना माना है। किसान बोवनी पूरी कर चुके हैं। बारिश भी ठीक हो रहे हैं।

 

शादी-समारोह भी इन दिनों नहीं हो रहे हैं, इसलिए लोगों के पास समय था। मौसम भी मेहरबान रहा। ११ बजे के बाद उमस बढ़ी, लेकिन थोड़ी ही देर में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश से लोगों को राहत मिली। श्रद्धालुओंं के लिए बानमोर से शनीचरा स्टेशन मार्ग होकर सामान्य रास्ते पर करीब चार किलोमीटर तक भीड़ के कारण पैर रखने को भी जगह नहीं थी। पहली बार वीआईपी मार्ग पर भीड़ के कारण घंटों जाम की स्थिति रही। मुरली मनोहर मंदिर के सामने से शनि मंदिर परिसर के मुख्य द्वार के बगल में बेरीकेडिंग तक 200 मीटर का मार्ग तय करने में श्रद्धालुओं को एक घंटे का समय लगा।

 

अपर कलेक्टर एसके मिश्रा, एएसपी अनुराग सुजानिया, एसडीएम उमेशप्रकाश शुक्ला सहित अन्य पुलिस और प्रशासन के अधिकारी निरंतर भ्रमण कर व्यवस्थाओं की निगरानी रख रहे थे। शनिवार को आधी रात तक स्नान, दर्शन और पूजन का सिलसिला चलता रहा। शनिदेव के दर्शन के बाद, गुप्त गंगा, राधाकृष्ण मंदिर, काली मंदिर, गणेश मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर भक्तों ने बाहर निकलकर भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया।

 

हनुमानजी ने लंका से फेंका था शनिदेव को
मंदिर परिसर में लगे शिलालेख के अनुसार त्रेतायुग में शनिदेव को रावण ने बंधक बना लिया था। शनिदेव की मौजूदगी से हनुमान जी लंका का दहन करने में कामयाब नहीं हो पा रहे थे। जब हनुमान जी की मुलाकात शनिदेव से हुई तो यह राज खुला। तब शनिदेव ने लंका से बाहर भेजने का आग्रह किया। इस पर हनुमान जी ने पूरे वेग से शनिदेव को फेंका। वे मुरैना जिले में ग्राम पंचायत एंती पर्वत पर आकर गिरे। यहीं उन्होंने तपस्या कर अपनी सिद्धियां दोबारा से प्राप्त कीं। वहीं से हनुमान जी और शनिदेव की मित्रता हो गई। यही वजह है कि शनिवार को हनुमानजी की पूजा करने से भी शनि कष्टों से मुक्ति मिलती है।

 

वीआइपी मार्ग पर पहली बार जाम
अब तक आयोजित शनि मेलों में पहली बार वीआइपी मार्ग पर भी जाम लगा। मंदिर परिसर से निकलते ही ढलान पर दो घंटे से ज्यादा समय तक जाम के हालात रहे। बड़ी यह मार्ग अब वीआइपी मार्ग से आने-जाने वालों के लिए छोटा पडऩे लगा है। प्रशासन को इसके चौड़ीकरण पर विचार करना चाहिए।

 

दो दर्जन ज्यादा स्थानों पर भंडारों का आयोजन
मंदिर परिसर में हरियाणा के सिरसा, ग्वालियर, मुरैना, आसपास की ग्राम पंचायातों के अलावा श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर और मार्गों पर भंडारों का आयोजन किया। शनि मंदिर को आने वाले सभी मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए ग्रामीणों ने चने, हलुआ, शर्बत, शीतल जल, चाय एवं लस्सी की व्यवस्था की थी। पौढ़े वाले हनुमानजी मार्ग पर ग्वालियर और सिरसा के भक्तों के बड़े भंडारों में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

shani dev

शनि मेले के लिए नैरोगेज चली ओवरलोड
शनिश्चरी अमावस्या होने की वजह से शनिवार को नैरोगेज ट्रेन में ओवर लोड चली। यात्रियों ने खतरे के बीच ट्रेन के हर हिस्से पर बैठकर सफर किया। आलम यह था कि ट्रेन में पैर रखने तक के लिए जगह नहीं थी, जिसकी वजह से कई यात्रा ट्रेन में सफर कर ही नहीं पाए।

 

हालांकि मेले को देखते हुए रेल संघर्ष समिति द्वारा डीआरएम से कोच बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। नैरोगेज ट्रेन की हालत शुक्रवार से ही ऐसी ही देखी गई। श्योपुर, सबलगढ़ से ही ट्रेन पूरी तरह से ओवर लोड होकर आई। आलम यह था कि यात्री ट्रेन की छत, कपलिंग, गार्ड कोच, इंजन हर जगह पर सवार थे। जौरा और सुमावली स्टेशन पर यात्रियों को पैर रखने तक के लिए जगह नहीं मिली।

Ad Block is Banned