श्रीहनुमान ने रावण की कैद से निकाल फेंका था शनि को, ग्वालियर में हुए विराजमान

शनिश्चरा में हर साल शनि जयंती व हर शनिवार को लगता है मेला

By: Mahesh Gupta

Updated: 03 Jul 2021, 09:12 AM IST

ग्वालियर.

ग्वालियर से लगभग 20 किमी दूर मुरैना जिले में बना शनि मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। यह देश के सबसे प्राचीनतम शनि मंदिरों में से एक है। शनिदेव के यहां विराजित होने के कारण इस जगह को बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहां लोग शनि को तेल चढ़ाने के बाद उन्हें गले लगाते थे। हालांकि वर्तमान समय में भक्तों को केवल तेल चढ़ाते ही देखा जाता है।

शनिदेव के गिरने से हुआ गड्ढा आज भी मौजूद
स्थानीय कथाओं के अनुसार रावण ने शनिदेव को भी कैद कर रखा था। जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे, तब उन्होंने शनिदेव को रावण की कैद में देखा। भगवान हनुमान को देख शनिदेव ने उनसे आजाद करने की विनती की। शनिदेव के कहने पर भगवान हनुमान ने उन्हें लंका से दूर फेंक दिया, ताकि शनिदेव किसी सुरक्षित जगह पर जा सकें। हनुमान जी द्वारा लंका से फेंके जाने पर शनिदेव इस क्षेत्र में आकर विराजमान हो गए और तब से यह क्षेत्र शनिश्चरा के नाम से प्रख्यात हो गया। शनिदेव के गिरने से एक बड़ा सा गड्ढा हो गया, वह गड्ढा आज भी वहां मौजूद है।

उल्कापिंड से निर्मित है शनि देव की प्रतिमा
यह भी बताया जाता है कि यहां शनि मंदिर पर प्रतिष्ठित शनि देव की प्रतिमा आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है, जिससे यह स्थान विशेष प्रभावशाली है। आज भी यहां अमर रूप में शनि देव विराजमान हैं। शनि देव के चमत्कार को देखते हुए ग्वालियर के सिंधिया राज घराने द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था।

सिंधिया परिवार ने कराया था मंदिर का जीर्णोद्धार
शनि देव इस चमत्कारिक जगह पर त्रेतायुग में विराजमान हुए थे। इतिहासकारों के अनुसार शनि देव के मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था, जिसके बाद शनि देव की महिमा एवं चमत्कारों से प्रभावित होकर ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा दौलतराव सिंधिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।

सिगनापुर शनि मंदिर में यहीं की शनि शिला
शनिश्चरा मंदिर पर्वत से ही महाराष्ट्र के सिगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला ले जाई गई है। जब से यहां शनिदेव विराजित हुए हैं, तब से ग्वालियर क्षेत्र में लौह उत्पादन काफी बढ़ा है। शनि देव की कृपा एवं महिमा को देखते हुए हर वर्ष शनि जयंती पर मेला लगता है, जिसमें हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के अवसर पर लगने वाले मेले में देशभर से भक्त अपनी मुराद लेकर पहुंचते हैं।

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