शरद पूर्णिमा आज: सुख, धन और संपन्नदायक बन रहे योग

शरद पूर्णिमा आज: सुख, धन और संपन्नदायक बन रहे योग
शरद पूर्णिमा आज: सुख, धन और संपन्नदायक बन रहे योग

Rajendra Thakur | Updated: 12 Oct 2019, 06:50:10 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

रात्रि में जागकर मां लक्ष्मी की पूर्ण ध्यान से उपासना पर होगी विशेष कृपा

ग्वालियर। शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की तिथि से ही शरद ऋतु का आगमन होता है। इसको लेकर शहरभर में कई आयोजन किए जाएंगे। शहर के प्रमुख मंदिरों में प्रसाद वितरित होगा। इस बार दिनांक 13 अक्टूबर को पडऩे वाली शरद पूर्णिमा पर विशेष सुख, धन और समपन्नतादायक योग बन रहा है। 13 और 14 अक्टूबर 2019 की रात्रि में 02:36 बजे सूर्य एवं चंद्र एक दूसरे के ठीक आमने-सामने होंगे, तथा मित्र राशि वृश्चिक में स्थित बृहस्पति अपनी पूर्ण पंचम दृष्टि से चंद्रमा को देख रहा होगा! मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर धरती पर आती हैं और जो भक्त उन्हें उनकी भक्ति में लीन दिखाई देता उस पर उनकी विशेष कृपा हो जाती है!
ज्योतिषाचार्य अशोक भटनागर ने बताया कि जिनकी कुंडली में धन का कोई विशेष योग ना भी हो तब भी ऐसे व्यक्तियों द्वारा भी श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी जी पूजा करके लाभ उठाया जा सकता है। इसके लिए रात्रि के समय मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए तथा उन्हें गुलाब के फूलों की माला अर्पित करने के बाद कोई भी सफेद रंग की मिठाई या खीर और सुगंध अर्पित करनी चाहिए। इसके पश्चात उनके मंत्र का कम से कम 11 माला का जाप करना चाहिए! मंत्र है- "? ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नम:"
शरद पूर्णिमा पर यह करें
यह पूजा यदि 13-14 अक्टूबर की रात्रि में 2:08 से 04:18 के मध्य करें तो और भी शीघ्र फलदायी हो सकती है।
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह में अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए। इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उनकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा कर व्रत रखें।
ब्राह्मणों को खीर सहित भोजन कराकर उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करें। रात्रि में चन्द्रमा को अघ्र्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
इस दिन माना जाता है चांद की चांदनी से अमृत बरसता है! इसलिए खीर को रातभर चन्द्रमा की रोशनी में रखकर प्रात:काल उसका सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है एवं हृदय को भी बल प्राप्त होता है!
शरद पूर्णिमा की तिथि से ही शरद ऋतु का आरम्भ होता है।

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