परेशान किसान: प्रदेश के इस जिले में ढाई लाख किसानों ने कराया फसलों का पंजीयन, 2 लाख से अधिक निरस्त

परेशान किसान: प्रदेश के इस जिले में ढाई लाख किसानों ने कराया फसलों का पंजीयन, 2 लाख से अधिक निरस्त

Gaurav Sen | Publish: Nov, 10 2018 03:48:31 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 03:48:32 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

परेशान किसान: प्रदेश के इस जिले में ढाई लाख किसानों ने कराया फसलों का पंजीयन, 2 लाख से अधिक निरस्त

शिवपुरी. जिले के ढाई लाख किसानों ने भावांतर योजना के तहत पंजीयन कराया, लेकिन गिरदावरी एप के माध्यम से जब उनका सत्यापन कराया तो 2 लाख से अधिक किसानों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए। ऐसे में किसानों को अब शासन की भावांतर योजना के तहत लाभ नहीं मिल पाएगा। किसानों का कहना है कि पटवारी ने मौके पर जाए बिना घर बैठे ही सर्वे कर दिया। वहीं पटवारियों का कहना है कि पंजीयन करने वाले प्राइवेट ऑपरेटरों ने गलती कर दी, जिसका खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि दो लाख से अधिक किसान भावांतर योजना से महरूम हो गए और जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे।

शिवपुरी जिले में रबी की फसल के कुल खसरे 2 लाख 54 हजार 719 पंजीकृत कराए गए। यानि इतने किसानों ने भावांतर योजना के तहत पंजीयन कराया। लेकिन जब इनका गिरदावरी एप से सत्यापन करवाया गया तो इनमें से पटवारियों ने 53539 पंजीयन तो सही पाए, जबकि 2 लाख 1 हजार 18 0 किसानों के पंजीयन असत्य पाते हुए निरस्त कर दिए। यानि इतने खसरों में किसानों के खेत में कोई फसल नहीं मानी गई। जबकि किसानों का कहना है कि हमारे खेत में तो अभी भी फसल मौके पर खड़ी है, लेकिन गिरदावरी एप में हमारे खेतों को खाली बता दिया गया।

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जिले के किसानों ने भावांतर योजना में पंजीयन कराया और इस उम्मीद में थे कि जब फसल तैयार होकर बिकेगी तो उसका जो भी रेट बाजार में लगे, लेकिन भावांतर के तहत उन्हें अतिरिक्त भुगतान मिलने से नुकसान बराबर हो जाएगा। लेकिन इस बीच शासन ने एक नया गिरदावरी एप तैयार कर दिया, जिसके माध्यम से पटवारी को किसान के खेत पर जाकर उसका भौतिक सत्यापन करना था। नए-नवेले एप का इस्तेमाल करना हर किसी पटवारी को नहीं आया, जिसके चलते जब गिरदावरी एप की रिपोर्ट आई तो एक-दो नहीं बल्कि 2 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन निरस्त हो गए।

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गिरदावरी एप के माध्यम से किसानों द्वारा कराए गए पंजीयन का जब सत्यापन किया गया तो पिछोर व खनियांधाना में कई ऐसे सर्वे नंबर निकले, जहां नाले की जमीन है। यानि गिरदावरी एप से कुछ गड़बडिय़ा भी पकड़ी गईं।

घर बैठे ही कर दिया पटवारियों ने सत्यापन
हमारी 60 बीघा जमीन है, जिसमें मूंगफली, सोयाबीन व उड़द बोई है। लेकिन गिरदावरी एप में केवल 15 बीघा फसल का सत्यापन किया है। पटवारियों ने बिना खेत पर जाए घर बैठे ही सत्यापन कर दिया, इसलिए यह गड़बड़ी हुई है। अब हमें भावांतर का लाभ कैसे मिल पाएगा?।
विष्णु शर्मा, कृषक ग्राम मारौरा बैराड़


हमने पंजीयन कराया और अपनी जमीन के सही सर्वे नंबर भी लिखवाए थे। लेकिन पटवारी ने मौके पर मुआयना नहीं किया, और हमारी पूरी फसल ही रिकार्ड में से गायब कर दी, जबकि मौके पर फसल खड़ी है। हमारे गांव दूसरे कृषक सुरेश, दयाराम रावत के भी पंजीयन निरस्त कर दिए गए।
हरप्रसाद रावत, कृषक ग्राम धतूरा

ऑपरेटर की गलती भुगतेंगे किसान
किसानों ने पंजीयन प्राइवेट ऑपरेटर से करवाए थे, जिसमें ऑपरेटर ने सर्वे नंबर लिखने में गलती कर दी। मैंने तो खेत पर जाकर सत्यापन किया और जो फसल जिस सर्वे नंबर में लिखी थी, वो वहां नहीं मिली। इसमें गलती ऑपरेटर ने की, लेकिन भुगतना किसान को पड़ेगा।
अभिषेक मिश्रा, पटवारी


गिरदावरी एप नया आया है, इसलिए उसकी जानकारी भी ठीक-ठीक नहीं है और उसे ठीक से समझ नहीं पाए। किसान को सर्वे नंबर की जानकारी नहीं होती है और उसने फसल तो ऑपरेटर को बता दी, लेकिन नंबर ऑपरेटर ने अपने मन से भर दिया। जिस वजह से यह गड़बड़ी हुई है।
जगदीश श्रीवास्तव, पटवारी

यह बोले जिम्मेदार
भावांतर में पंजीयन कराए जाने के बाद उसका सत्यापन गिरदावरी एप के माध्यम से पटवारी क3ो करना था। उसमें यदि अंतर आया है तो इस बारे में पटवारी या भू-अभिलेख अधिकारी कुछ बता पाएंगे। सुना तो हमने भी है कि उसमें बड़ा अंतर सामने आया है।
आरएस शाक्यवार, उप संचालक कृषि शिवपुरी

पटवारियों ने गिरदावरी एप के माध्यम से किए गए पंजीयन का सत्यापन किया है। इसमें मौके पर उन्हें जो मिला है, उसी का मिलान करके रिपोर्ट दी है। अब यदि सर्वे नंबर के अनुरूप फसल नहीं मिली, तो इसमें पटवारी की क्या गलती है?।
राकेश ढोंढी, भू-अभिलेख अधिकारी शिवपुरी

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