साहब, रसूखदारों से डरती है आपकी पुलिस

आफिसर्स मैस में पब्लिक ने डीजीपी सुरेंद्र सिंह को बताई परेशानियां, मांगी मदद।


ग्वालियर। रविवार को पीडि़त लोगों ने ऑफिसर्स मैस आकर डीजीपी सुरेन्द सिंह को परेशानियां बताकर मदद मांगी। इसमें गरीब ठेलेवाले के परिवार से लेकर शहर के धन्ना सेठ तक शुमार थे। लोगों के डीजीपी से मिलकर इंसाफ मांगने से जाहिर है जिले में पुलिस के आला अफसरों की मौजूदगी के बावजूद पीडि़तों की परेशानियों का समाधान नहीं हो रहा है।
विनयनगर सेक्टर 2 निवासी सीमा अरोरा का कहना था ट्रांसपोर्ट नगर में उनके प्लॉट पर मिथलेश अग्रवाल निवासी गुब्बारा फाटक ने गुंडई से कब्जा किया है, रोकने पर उन्हें पति सहित पीटा।  बहोड़ापुर पुलिस से शिकायत की तो पुलिस ने मिथलेश को बजरंग दल का सदस्य बताकर कार्रवाई से हाथ खडे़ किए हैं।


व्यापारी सुरक्षित तो शहर सुरक्षित
डीजीपी सिंह ने शिकायत करने वालों से कहा वह उसी शहर को सुरक्षित मानते हैं, जिसमें कारोबारियों में सुरक्षा की भावना हों। जो अपराध ट्रेस नहीं हुए हैं उन्हें सुलझाया जाएगा। अपराधी कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा। 

पुलिस अगर फरियाद सुन लेती तो मेरा पति जिंदा होता
साहब, पुलिस अगर फरियाद सुन लेती तो मेरा पति जिंदा होता, एक साल से वह इंसाफ के लिए जनकगंज थाने के चक्कर काट रहा था। एसपी से भी शिकायत की, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। बल्कि पड़ोसन के इशारे पर गुंडा स्क्वाड का सिपाही चुप रहने की धमकी देता रहा। प्रताडऩा से तंग आकर पति ने खुदकुशी की है।  अब तो परिवार को  इंसाफ दिलाओ।  घोसीपुरा (जनकगंज) निवासी राजू राठौर की पत्नी रीना ने मासूम बच्चोंं के साथ आफिसर्स मैस पहुंचकर डीजीपी सुरेन्द्र  सिंह से इंसाफ मांगा।


अमृतलाल ने डीजीपी सिंह से कहा साला राजू राठौर सिर्फ अपने मकान की दूसरी मंजिल बनना चाहता था। पड़ोसन उमा सिसौदिया इसके लिए राजी नहीं थी। उसने कई बार जनकगंज पुलिस से मदद मांगी। लेकिन उसकी शिकायत नहीं सुनी गइ्र्र। मौत से एक दिन पहले उसने एसपी की जनसुनवाई में भी अपनी परेशानी रखी। अब मौत को तीन दिन हो चुके हैं। सबको घटना पता है। लेकिन तीन दिन बाद भी इंदरगंज पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।


लूट ट्रेस, अब चोरों के टारगेट पर हम


शहर के कारोबारियों की परेशानी थी झपटमार और लुटेरों की गैंग को पुलिस ने बस्र्ट कर लिया है, लेकिन चोर पर पुलिस काबू नहीं कर पा रही है।  पिछले दिनों में चोरों ने भाऊ का बाजार में गिरधारीलाल अग्रवाल और कपड़ा व्यापारी दीपक गोयल के नई सड़क स्थित  घर से लाखों रुपए की चोरी की। पुलिस कुछ पता नहीं कर पाई। युवा व्यवसायी नितिन जुगरानी करीब 2 साल से लापता है। लगता पुलिस ने उनकी फाइल को उठाकर रख दिया है। गंभीरता से नितिन को तलाशा जाए। चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल और मानसेवी सचिव प्रवीण खंडेलवाल सहित पदाधिकारियों ने कहा शहर में नशे का कारोबार बढ़ रहा है। पुलिस भी मानती है। अपराध की जड़ नशा है। लेकिन इसे बस्र्ट करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

मेहनत के बाद भी अपराधों को ट्रेस नहीं कर पाने का रहेगा मलाल : सिंह
प्रदेश पुलिस के मुखिया सुरेन्द्र सिंह कहते हैं पूरी ईमानदारी और मेहनत से नौकरी करने के बावजूद कुछ चुनौती भरे अपराधों को सुलझाने में नाकाम रहना जिदंगी भर खलेगा, जब भी वो  अपराध याद आते हैं तो दिल में टीस उठती है आखिर खामी कहां रही।  सिंह ने बेवाक दिल की बात रविवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान प्रेस से कही।


उन्होंने माना ग्वालियर-चंबल अंचल में पुलिस प्रमोशन के मामले में दूसरे जिलों से काफी पीछे हैं। लेकिन इसका ठीकरा भी पुलिसकर्मियों पर ही फोड़ कर कहा ग्वालियर-चंबल अंचल के पुलिसकर्मी कहीं से भी भर्ती हुए हों उनकी तमन्ना सिर्फ इसी इलाके में डयूटी की रहती है। यही वजह है प्रमोशन के लिए पुलिसकर्मियों ने दूसरे जिलों में तबादले कराए। पदौन्नत होने के बाद ग्वालियर जिले में वापसी के लिए एेडी चोटी की जुगाड़े़ लगाईं।  इस आदत की वजह से ही खाली पद भर गए। दूसरों को आगे बढऩे का मौका नहीं मिला। होम सिकनेस पर काबू के लिए तय किया गया प्रमोशन पाने वाले पुलिसकर्मियों का 5 साल तक पुरानी जगह पर तबादला नहीं किया जाएगा।


पब्लिक की है पुलिस
1.सिंह कहते हैं पब्लिक को पुलिस से नहीं बल्कि कानून से डरना चाहिए। क्योंकि पुलिस सरकार की नहीं जनता की है। कानून में जो अधिकार पुलिस को दिए गए हैं वहीं पब्लिक को दिए गए हैं। 
मोह छोड़ें तो मिले पदोन्नति
2. प्रमोशन में ग्वालियर पुलिस दूसरे जिलों की तुलना में काफी पिछड़ी है। इसके लिए डीजीपी अंचल के पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हैं। 
3. डीजीपी ने कहा अब जमाना हाईटेक पुलिसिंग का है। इसलिए थानों का कम्प्यूटरीकरण किया गया है। प्रदेश के लगभग सभी थानों का डाटा अपडेट किया जा चुका है। 
4. पुलिस में राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। मसलन ट्रांसफर पोस्टिंग बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के आसान नहीं है। इस पर डीजीपी सिंह का कहना है वह अधीनस्थों को भी राजनीतिक प्रेशर के दबाव में काम नहीं करने की हिदायत देते रहे हैं। जहां तक उनकी बात है उन पर कभी कोई प्रेशर हावी नहीं हुआ। संभाग और जिला स्तर पर पुलिस अधिकारी दबाव में रहते हो तो वह कह नहीं सकते। 
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rishi jaiswal
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