सर्वार्थ सिद्धि योग में बहनें करेंगी भाई का तिलक

- कायस्थ समाज करेगा चित्रगुप्त और कलम-दवात का पूजन

By: Narendra Kuiya

Updated: 15 Nov 2020, 11:55 PM IST

ग्वालियर. भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व भाईदौज सोमवार 16 नवंबर को मनाया जाएगा। दीप पर्व के पांचवे दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। भाईदौज के लिए रविवार को दीपावली के बाद भी बाजारों में खरीदारी का दौर जारी रहा। भाई दौज का पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा।

इसलिए मनाते हैं भाईदौज
भाईदौज मनाने के पीछे भी किवदंती है कि यमराज की बहन यमराज सेे मिलने के लिए काफी उत्साहित थी और उन्हें कई बार अपने घर आमंत्रित कर चुकी थी। यमराज के पास समय का अभाव होने के कारण वह अपनी बहन के घर नहीं जा पा रहे थे। आज ही के दिन यमराज ने अपनी बहन को कुछ देर का समय दिया और उनके घर पहुंचे। घर पहुंचने पर बहन ने यमराज का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की, तभी सेे यह पर्व भाईदौज के रूप में मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।

ये हैं श्रेष्ठ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दौज का पर्व मनाया जाता हैै। पांच दिनों तक चलने वाले महापर्व का यह आखरी पर्व है। 16 नवंबर को द्वितीय तिथि सुबह 7.07 बजे से प्रारंभ होकर 17 नवंबर को सुबह 3.57 बजे तक रहेगी। भाई दौज पर तिलक का समय दोपहर 1.10 बजे से 3.18 बजे तक रहेगा। इस दिन बहन द्वारा पूजा की थाली सजाकर तिलक लगाकर अपने भाई को नारियल व मिठाई दी जाती है। उसके स्वरूप व दीर्घायु होने की कामना की जाती है। इस दिन बहन के घर भोजन करनेे का विशेेष महत्व है।

चित्रगुप्त और कलम-दवात का पूजन भी होगा
भाईदौज के दिन कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त का पूजन करते हैं। साथ ही इस दिन कलम-दवात की भी पूजा होती है। चित्रांश इंटरनेशनल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष नूतन श्रीवास्तव और जिला महामंत्री सतीश श्रीवास्तव ने बताया कि 16 नवंबर सोमवार को सुबह 11 बजे चित्रगुप्त महाराज मंदिर, आदर्शपुर कॉलोनी, गोले का मंदिर पर भगवान चित्रगुप्त पूजन संपन्न होगा।

Narendra Kuiya Reporting
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