बेटा खेल में नाम कमा सके, इसलिए दोस्तों से उधार रुपए लेकर खरीदवाएं थे जूते

मालनपुर के पास स्थित है छोटा सा गांव सितौले का पुरा। जहां खेलने के लिए सुविधाएं नहीं है, लेकिन गांव के एक युवा गौरव शर्मा का सपना था कि वह खेलों में कुछ करें जिससे उसकी एक अलग पहचान बन सके और उसने यह कर भी दिखाया। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता 2019-20 में रजत पदक जीतने वाले गौरव शर्मा ने पहली बार भुवनेश्वर में खेले गए खेलो इंडिया में कांस्य पदक जीतकर ग्वालियर का नाम पूरे भारत में रोशन कर दिया।

By: Vikash Tripathi

Published: 07 Mar 2020, 08:24 PM IST

गौरव बताता है, घर की आर्थिक स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी, पिता खेती से जो कमाते थे उससे ही घर खर्च चलता था। मुझे और दो बहनों को पढ़ाना भी काफी मुश्किल था। शुरुआत में नंगे पांव ही दौडऩे की प्रैटिक्स करता था। आर्मी भर्ती के लिए दौडऩे की खूब प्रैटिक्स की, फिजीकल में पास हो गया, लेकिन चेस्ट में बाहर कर दिया।

नौकरी का सपना टूट गया तो खेल में कुछ करने की ठानी। पिता को बताया तो पहले उन्होंने मना कर दिया, लेकिन बाद में वे मान गए। गौरव ने ग्वालियर में एसएलपी कॉलेज में एडमिशन लिया और दौड़ की प्रैटिक्स की। यहां मैदान पर दौडऩे के लिए अच्छे जूते की जरुरत पड़ी तो पिता को बताया। पिता ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए दोस्तों से उधार पैसे लेकर जूते दिए। नए जूते पहनकर गौरव ने पिछले मुडकऱ नहीं देखा और सफलताएं हासिल करता गया।
पदक जीतने वाला पहला धावक
एसएलपी के खेल अधिकारी लखविन्दर सिंह ढीढ़सा ने बताया, 2018 में जब गौरव कॉलेज में पढऩे आया तो उसकी दौड़ देखकर लग गया था कि कुछ करेगा। जिला और संभाग स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। उसका चयन जीवाजी विवि टीम में हुआ और ऑल इंडिया इंटरयूनिवर्सिटी में उसने रजत पदक जीता। इस आधार पर गौरव को खेलो इंडिया में भाग लेने का मौका मिला। यहां भी उसने बेहतरीन प्रदर्शन किया और एथलेटिक्स में ग्वालियर चंबल अंचल के लिए एक मात्र कांस्य पदक जीता।
खेलो इंडिया में सुधरा टाइम
गौरव शर्मा ने खेलो इंडिया के 800 मीटर इवेंट में १:५१:८७ का समय लेकर कांस्य पदक जीता। अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता 2019-20 में छात्र गौरव शर्मा ने सिल्वर मेडल १:५३:३७ समय के साथ प्राप्त किया था। खेलो इंडिया गौरव ने समय को तो सुधारा लेकिन पदक कांस्य प्राप्त हुआ।
भारतीय टीम में खेलने का सपना
गौरव का लक्ष्य भारतीय टीम में खेलने का है और देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है। फिलहाल गौरव रोहतक में एथलेटिक्स की कोचिंग ले रहा है। रोज करीब 5 से 6 घंटे प्रैटिक्स करता है। अप्रैल में होने वाली फेडरेशन एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की तैयारी में जुटा है। गौरव का कहना है, छोटी-छोटी से उत्साह बना रहता है और यही आपको अपने लक्ष्य की ओर ले जाती है। इसलिए छोटी हो या बड़ी प्रतियोगिता मैं पूरी मेहनत से तैयारी करता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरी मेहनत का फल मुझे मिलेगा और एक दिन मैं इंडिया टीम के लिए भी खेलूंगा यही अब मेरे जीवन का लक्ष्य भी है और सपना भी। इसे पाने के लिए कोई कसर नहीं छोडूंगा।

Vikash Tripathi
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