दक्षिण भारतीय आइटी प्रोफेशनल दंपत्ति ने गोद ली बेटी, मालवा के व्यवसाई को मिला बेटा

-दो साल के इंतजार के बाद कारा की बेवसाइट के जरिए हुआ भावी माता-पिता का चयन

ग्वालियर। दक्षिण भारतीय आई टी प्रोफेशनल दंपत्ति ने शहर के शिशुग्रह से बेटी को गोद लिया है, जबकि मालवा अंचल के प्रतिष्ठित निर्माण व्यवसाई को दत्तक पुत्र के रूप में बेटा मिला है। बच्चों को गोद लेने के लिए अभिभावक अपने-अपने शहर से ग्वालियर आए थे। इसके बाद मातृछाया शिशुग्रह पहुंचकर महिला बाल विकास अधिकारियों की मौजूदगी में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की है। सोमवार को यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद दंपत्ति अपने शहर को वापस चले गए हैं।

दत्तक दी गई बालिका विभाग को शिवपुरी में और बालक ग्वालियर में ही लावारिस स्थिति में मिला था। इसमें बालक की स्थिति खराब होने पर जयारोग्य अस्पताल के एसएनसीयू में एक महीने तक इलाज कराया गया था। इसके बाद इनको देखभाल के लिए शिशु ग्रह में रखा गया था। गोद के समय बालिका की उम्र नौ माह और बालक की उम्र चार माह बताई गई है।

 

इस तरह हुआ दत्तक ग्रहण


कारा की बेवसाइट पर सभी दस्तावेज और वेटिंग लिस्ट में नाम आने के बाद बच्चा मैच होने पर दंपत्ति ने जिला दत्तक ग्रहण समिति के सामने पेश होकर दस्तावेज परीक्षण कराए और साक्षात्कार दिया है। इसके बाद आज न्यायालय के माध्यम से छह महीने के लिए प्री एडॉप्शन केयर के लिए देगा। इसी अवधि में सक्षम न्यायालय दत्तक ग्रहण का आदेश जारी करेगा। इस आदेश के बाद बच्चे की देखरेख का निरीक्षण करने के लिए छह-छह महीने के अंतराल में तीन फॉलोअप किए जाएंगे। फॉलोअप में बच्चे की स्थिति बेहतर मिली तो फिर बच्चा हमेशा के लिए भावी माता-पिता के संरक्षण में रहेगा।

 

बच्चा गोद लेना है तो इन शर्तों को करना होगा पूरा


-गोद लेने के लिए कारा.एनआईसी.इन पर पंजीयन कराना पड़ता है।

 

-इसके बाद वेटिंग लिस्ट के हिसाब से दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों का नंबर आता है।


-यूजर नेम और पासवर्ड के जरिए कारा और अभिभावकों की बातचीत होती है।

 

-नर्सिंग होम, अस्पताल, थाना सहित किसी भी अन्य स्थान से बच्चा गोद लेना अपराध की श्रेणी में आता है।


-परिवार में भी दत्तक ग्रहण कारा के जरिए ही मान्य है।

 

-भावी दत्तक माता-पिता को शारीरिक-मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है।


-बच्चे के जीवन को जोखिम में डालने वाली स्थिति नहीं होनी चाहिए।

 

-एकल महिला किसी भी ***** के बच्चे को गोद ले सकती है।


-एकल पुरुष को बालिका दत्तक ग्रहण की पात्रता नहीं है।

 

-बालक के भावी माता-पिता की उम्र में न्यूनतम अंतर 25 वर्ष होना चाहिए।


-तीन से अधिक संतान वाले दंपत्ति को दत्तक ग्रहण का अधिकार नहीं है।

 

-आयु की गणना के लिए दोनों की उम्र मिलाकर 90 वर्ष है तो आठ महीने का बच्चा मिल सकेगा। दंपत्ति की उम्र 100 वर्ष है तो चार से आठ माह का बच्चा मिल सकता है। 110 वर्ष उम्र है तो आठ से अठारह वर्ष तक का बच्चा गोद मिल सकता है।
-विवाहित दंपत्ति के लिए मैरिज सर्टिफिकेट सबसे ज्यादा जरूरी है।


-बच्चों को परिवार का प्यार बेहद जरूरी है, इसके लिए लोगों को आगे आकर दत्तक ग्रहण में रुचि लेना चाहिए। सोमवार को जिन दंपत्तियों ने दत्तक ग्रहण की औपचारिकता पूरी की है, उनको कारा के जरिए सभी परीक्षण पूरे होने के बाद ही प्री एडॉप्शन फॉस्टर केयर में बच्चे दिए गए हैं।

शालीन शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी

Dharmendra Trivedi
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