क्षेत्रीय जनप्रतिनिधी गंभीर नहीं: 26 साल में दो बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा लेकिन नहीं बस सका साडा

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधी गंभीर नहीं: 26 साल में दो बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा लेकिन नहीं बस सका साडा

Gaurav Sen | Publish: Oct, 14 2018 10:20:52 AM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 10:20:53 AM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधी गंभीर नहीं: 26 साल में दो बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा लेकिन नहीं बस सका साडा

 

ग्वालियर। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) को अस्तित्व में आए 26 साल हो गए हैं, इस बीच प्रदेश में 2 बार कांग्रेस की और 3 बार भाजपा की सरकार रही, लेकिन साडा नहीं बस पाया। शहर के दक्षिण-पश्चिम और उत्तरी क्षेत्र की लगभग 75 हजार हेक्टेयर जमीन पर नये ग्वालियर को बसाने के लिए कागजी घोड़े तो खूब दौड़ाए गए, लेकिन सरकारों के गंभीर नहीं होने से यह महत्वाकांक्षी योजना फेल हो गई है। प्रदेश सरकार के जो पांच मुख्यालयों के कार्यालय यहां आने थे, अब वह सिरोल क्षेत्र में स्थापित होने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि सडक़ें और दूसरे निर्माण पर लगभग 500 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी से जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए बनी यह महत्वाकांक्षी योजना क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के ठीक से रुचि नहीं लेने से उपेक्षा का शिकार हो गई।

1992 में साडा का काम धरातल पर आया

 

नहीं निभाई जिम्मेदारी

  • प्रदेश में 7 दिसंबर 1993 से 8 दिसंबर 2003 तक कांग्रेस की सरकार रही। इस अवधि में साडा का ज्यादातर विकास फाइलों में ही चलता रहा। तब के क्षेत्रीय विधायकों ने इस क्षेत्र की उपेक्षा की।
  • प्रदेश में 8 दिसंबर 2003 से अब तक भाजपा की सरकार है। इस अवधि में अधिग्रहीत क्षेत्र का विभाजन ग्वालियर दक्षिण, ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर और भितरवार विधानसभा के बीच रहा है।

एक नजर साडा पर
शुरुआत में 30 हजार हेक्टेयर जमीन सुरक्षित थी, अब बढकऱ 75 हजार हो गई है। इसमें 5000 प्लॉट, 300 हेक्टेयर में गोल्फ कोर्स, मनोरंजन पार्क, थीम पार्क, वाटर पार्क, शिल्प बाजार आदि विकसित करना थे। इसके अलावा 1 हजार हेक्टेयर में विशेष पर्यावरण क्षेत्र विकसित होना था।

कौन कितना जिम्मेदार

  • 1993 से 2003 तक भितरवार से दो बार कांग्रेस, गिर्द से 1-1 बार भाजपा-कांग्रेस, ग्वालियर से 1 बार कांग्रेस और तीन बार भाजपा के विधायक रह चुके हैं।
  • साडा की उपेक्षा के लिए कांग्रेस से ज्यादा भाजपा उत्तरदायी है, क्योंकि साडा की अधिग्रहीत भूमि जिन विधानसभा क्षेत्रों में है, वहां ज्यादातर समय भाजपा के विधायकों को प्रतिनिधित्व मिला है।

एक भी कार्यालय नहीं पहुंचा
साडा में प्रदेश और केन्द्र ने भी अपने कुछ कार्यालयों को यहां पहुंचाने की बात कही थी, लेकिन इनमें से एक भी कार्यालय नहीं पहुंचा। लोगों ने बसने में रुचि नहीं दिखाई।


फस्र्ट फेज में खर्च

सडक़ों पर 47 करोड़
पॉवर स्टेशन पर 16 करोड़
वाटर सप्लाई 29.65 करोड़

नीलकमल योजना: 10.16 करोड़ से 600 फ्र ी होल्ड प्लॉट विकसित करना थे जो बन न सके।


सौजना हाउसिंग प्रोजेक्ट

  • 236 आवासों पर 45.17 करोड़ की लागत आई है, यहां कोई रहने को तैयार है।
  • बरा आवासीय योजना 250 फ्री होल्ड प्लॉट विकसित होने हैं, अब तक अतिक्रमण पर ही खानापूर्ति हो रही है।
  • 288 ईडब्ल्यूएस भवन निर्माण पर जमीन का विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
  • 128 एलआइजी भवन बनाने पर 10 करोड़ रुपए खर्च, आवासों का आवंटन हो चुका है, लेकिन रहने कोई नहीं आया।

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