मेट्रो की तर्ज पर शहर में शुरू हो नाइट कल्चर, बनेगा हेल्दी माहौल, बढ़ेंगे टूरिस्ट

मेट्रो की तर्ज पर शहर में शुरू हो नाइट कल्चर, बनेगा हेल्दी माहौल, बढ़ेंगे टूरिस्ट
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Mahesh Gupta | Publish: May, 01 2019 12:33:09 PM (IST) | Updated: May, 01 2019 12:33:11 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

मेट्रो की तर्ज पर शहर में शुरू हो नाइट कल्चर, बनेगा हेल्दी माहौल, बढ़ेंगे टूरिस्ट

शहर के बिजनेसमैन ने गिनाए मुद्दे और दिए सुझाव

हमारे शहर में नाइट कल्चर नहीं है। इसे डवलप किया जाना चाहिए। इससे शहर में हेल्दी माहौल बनेगा और हम शॉप से फ्री होकर अपने परिवार के साथ हेल्दी टाइम दे पाएंगे। यकीनन इससे शहर को रोजगार भी मिलेगा। यह कहना था शहर के उन बिजनेसमैन का, जो लोकसभा चुनाव को लेकर आयोजित टॉक शो में शामिल हुए थे। पत्रिका ऑफिस में मंगलवार को आयोजित टॉक शो में युवा सराफा संघ के पदाधिकारियों ने कई मुद्दे उठाए, तो अपनी राय भी दी।


हमारे शहर का हेरिटेज बहुत रिच है। जरूरत है ब्रांडिंग की और कई डेस्टिनेशन डवलप करने की। महाराज बाड़ा और फूलबाग की प्रॉपर प्लानिंग कर टूरिस्ट को जोड़ा जा सकता है।
नीलेश बिंदल

गवर्नमेंट की योजनाएं बहुत हैं, लेकिन सरकार द्वारा उसका हेल्दी फॉलोअप लिया जाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि कई स्टेज में टीम बनाई जाएं, जो समय-समय पर रिपोर्ट सरकार तक पहुंचाए।
नितिन अग्रवाल

शहर में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई गई, जो टेक्निकली रॉन्ग है। उनका रैम्प ऐसा है, जहां गाड़ी चढ़ाने या उतारने में डर लगता है। शायद इसके लिए प्रॉपर प्लानिंग नहीं हो पाई या फिर इंजीनियर ही केवल नाम के थे।
चेतन दानी

स्वच्छता में इंदौर तीन साल से लगातार टॉप पर है और ग्वालियर पिछड़ता जा रहा है। इसका कारण है कि हमारे पास प्रॉपर प्लान नहीं है। वादे और दावों से रैंकिंग नहीं बढ़ाई जा सकती। उसके लिए काम करना होगा।
भरत सिंघल

हमें ऐसा सांसद चाहिए, जो सडक़ पर निकलकर लोगों की समस्याओं को सुने और उसे दूर करे। हमें ऐसा सांसद नहीं चाहिए, जो एसी में बैठा हो और जिस तक पहुंचने में हमें परेशानी का सामना करना पड़े।
रवि जैन

स्मार्ट सिटी में ग्वालियर को शामिल किया गया है। शहर में डवलपमेंट भी हो रहा है, लेकिन उसका सही मेंटीनेंस नहीं है। लाखों की लागत से शहर में लगे डेटा बोर्ड गलत रीडिंग दे रहे हैं।
चंदन दानी

स्टार्टअप शुरू करने के लिए युवाओं को सब्सिडी की व्यवस्था है, लेकिन जब युवा प्रैक्टिकली फील्ड पर उतरता है, तो उसे मालूम चलता है कि यह सब कागजों पर ही है। प्रॉपर मॉनीटरिंग करनी होगी।
जीतेन्द्र बंसल

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सही नहीं है। ऑफिस टाइम और शाम के समय शहर भर में ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। मार्केट में 400 मीटर की दूरी तय करने में 30 मिनट लग जाते हैं।
राजेश दानी

शहर में रोजगार नहीं है। इस कारण लोग बाहर निकल रहे हैं, जबकि यहां इंडस्ट्रियल एरिया है। यदि यहां इंडस्ट्री बढ़ जाए, तो ग्वालियर के साथ ही आसपास के लोगों को भी रोजगार मिल सकेगा।
हेमंत बंसल

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