सर्वे में वास्तविकता बनाए रखने छात्र कर सकेंगे एप पर एंट्री

महिलाओं के लिए असुरक्षित शहर के 55 हॉट स्पॉट पर जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्र जाकर सर्वे करेंगे। इस काम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के अलावा शौर्या दल की सदस्य और आशा कार्यकर्ता...

ग्वालियर. महिलाओं के लिए असुरक्षित शहर के 55 हॉट स्पॉट पर जीवाजी विश्वविद्यालय के छात्र जाकर सर्वे करेंगे। इस काम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के अलावा शौर्या दल की सदस्य और आशा कार्यकर्ता भी छात्रों की मदद करेंगीं। सर्वे में वास्तविकता बनाए रखने के लिए महिला बाल विकास ने ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन भी जानकारियां दर्ज कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विभाग ने एप भी डिजाइन कराया है। प्रत्येक क्षेत्र में जाने वाले छात्र रजिस्टर में जानकारियां दर्ज करेंगे। इसके साथ ही एप पर भी एंट्री करेंगे। एप पर एंट्री को लेकर भी छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए सेफसिटी कार्यक्रम शुरू किया है। प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर सहित छह शहरों में एक साथ शुरू किए गए इस कार्यक्रम के अंतर्गत सबसे पहले हॉट-स्पॉट चिह्नित किए गए थे। ग्वालियर में भी पुलिस ने शहर के 52 और अंचल के तीन स्थानों सहित 55 हॉट स्पॉट तय किए थे। इसके साथ महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए सम्मान कार्यक्रम शुरू किया था। इस कार्यक्रम के साथ-साथ महिला बाल विकास विभाग ने भी अपने स्तर पर चिन्हित हॉट-स्पॉट पर सुरक्षित माहौल तैयार करने के लिए योजना बनाई है। इस योजना में विभाग ने जीवाजी विश्वविद्यालय के एमएईईएसडब्ल्यू के 19 छात्रों को भी शामिल किया है। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह, सहायक संचालक राहुल पाठक, शालीन शर्मा, स्थानीय परिवाद समिति की अध्यक्ष रुचि मोदी, अर्चना राठौर, एडवोकेट सुनीता यादव ने सभी छात्रों को सेफसिटी के संबंध में बारिकी से जानकारी दी थी। इसके बाद शनिवार को कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के काशीपुरा स्थित स्कूल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में वार्डों के 10 स्थान सहित 28 हॉट-स्पॉट पर काम शुरू किया गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाली कामकाजी महिलाओं को सबसे पहले लैंगिक उत्पीडऩ से संबंधित कानून की जानकारी देने के साथ ही उनके अधिकारों के बारे में भी बताया जाएगा।


ग्रुप में काम करेंगे छात्र
अभियान के अंतर्गत एमएईईएएसडब्ल्यू के 19 छात्र कम से कम दो-दो की संख्या में समूह बनाकर सर्वे करेेंगे। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका छात्रों के साथ रहेंगी। कामकाजी महिलाओं की जानकारी कार्यकर्ता और सहायिका जुटाएंगीं। इसके बाद छात्र यह जानेंगे कि महिलाएं जिन घरों में काम करने जाती हैं, वहां किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

रिज़वान खान Desk
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