scriptsudha raghuraman sang swaranjali to maharishi tansen ceremony | तानसेन समारोह : सुधा रघुरामन ने दी कर्नाटक शैली के रागों से गान महर्षि तानसेन को स्वरांजलि | Patrika News

तानसेन समारोह : सुधा रघुरामन ने दी कर्नाटक शैली के रागों से गान महर्षि तानसेन को स्वरांजलि

गायिका सुधा रघुरामन ने संगीत मोहक गायन से अलग ही रंगत बिखेरी। गान महृषि तानसेन को उन्होंने हिदुस्तानी शास्त्रीय संगीत अर्थात कर्नाटक शैली की मिसुरी भरी राग-रागनियों से स्वरांजलि अर्पित की।

ग्वालियर

Published: December 29, 2021 10:06:06 pm

ग्वालियर. कर्नाटक संगीत की ख्यातिनाम गायिका सुधा रघुरामन ने संगीत मोहक गायन से अलग ही रंगत बिखेरी। गान महृषि तानसेन को उन्होंने हिदुस्तानी शास्त्रीय संगीत अर्थात कर्नाटक शैली की मिसुरी भरी राग-रागनियों से स्वरांजलि अर्पित की। तानसेन समारोह में प्रस्तुति देने दिल्ली से पधारीं रघुरामन ने कर्नाटक शैली के राग "अमृत वर्षिणी" में अपने गायन का आगाज़ किया।

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तानसेन समारोह : सुधा रघुरामन ने दी कर्नाटक शैली के रागों से गान महर्षि तानसेन को स्वरांजलि


अपनी खनकदार आवाज से सुंदर स्वरावली का उपयोग करते हुए उन्होंने दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संगीतज्ञ संत मुत्थु स्वामी की रचना का सुमधुर गायन किया। इसके बाद उन्होंने राग वासंती" और आदि ताल में मराठी अभंग की मनोहारी प्रस्तुति दी। संत नामदेव द्वारा रचित इस अभंग के बोल थे "पांडुरंगे अनाथाच्चा दीनाचा दयाड़ा"। रघुरामन ने राग शुद्ध सारंग" में जयदेव रचित अष्टपदी "सखीए येशी मदन.." की कर्णप्रिय प्रस्तुति देकर बड़ी संख्या में मौजूद संगीत रसिकों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। यह प्रस्तुति मिश्र चप्पू ताल में निबद्ध थी, जिसे उत्तर भारत में रूपक कहा जाता है। उन्होंने राग वृंदावनी सारंग" में दक्षिण भारतीय तिल्लाना" पेश कर अपने गायन को विराम दिया।

आपके साथ बांसुरी पर जी रघुरामन, मृदंगम पर एम व्ही चन्द्रशेखर और तबले पर शम्भूनाथ भट्टाचार्य ने कमाल की संगत कर गायन को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। सुधा रघुरामन कर्नाटक शैली में अब तक ढाई सौ से अधिक गीत रिकॉर्ड करा चुकीं हैं। वे देश के प्रसिद्ध संगीत समारोहों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका सहित दुनियां के कई देशों के प्रतिष्ठित मंचों पर भी हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दे चुकीं हैं।


"गूंद गूंद लाओ री मालनिया..." बनारस घराने की गायकी से गुंजायमान हुआ प्रांगण

प्रतिभावान युवा गायक राहुल मिश्रा व रोहित मिश्रा की जोड़ी ने जब अपनी दानेदार व बुलंद आवाज़ में राग "देशी तोड़ी" और तीन ताल में निबद्ध छोटा ख्याल "गूंद गूंद लाओ री मालनिया..." का गायन किया तो बनारस घराने की गायकी जीवंत हो उठी। तानसेन समारोह में मंगलवार की प्रातः कालीन सभा में चौथे कलाकार के रूप में बनारस घराने की इस युवा जोड़ी की प्रस्तुति हुई।

राग "देशी तोड़ी" में सुंदर रागदारी के साथ बड़ा ख्याल पेश किया। एक ताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे "चैन न आवे"। इसके बाद द्रुत गति में बंदिश गाकर अपने गायन को ऊँचाइयाँ तक पहुंचाया। युवा गायकों की जोड़ी ने रसिकों की फरमाइश पर जब बनारस घराने का प्रसिद्धि टप्पा "गुलशन में बुलबुल चहकी.." गाकर सुनाया तो सभी मंत्रमुग्ध हो गए। प्रसिद्ध ठुमरी गोरी तोरे नैन काजर बिन कारे.." और एक भजन सुनाकर अपने गायन को विराम दिया। गायन की जुगलबंदी में हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र, तबले पर श्री अंशुल प्रताप सिंह और सारंगी पर उस्ताद मजीद खान ने नफासत भरी और कमाल की संगत की।

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