बाउंड्रीबाल टूटने और सुरक्षा नहीं होने से बढ़े रहे सुसाइड के केस

ताल की गहराई अधिक होने के कारण यहां हमेशा खतरा रहता है, कई बार लोग इसमें कूदकर जान दे चुके हैं, इसके बावजदू प्रशासन ने अभी तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए हैं, यहां तक कि बाउंड्रीवॉल भी नहीं बनाई गई है

ग्वालियर. शहर में स्थित सागरताल अक्सर सुर्खियों में रहता है। ताल की गहराई अधिक होने के कारण यहां हमेशा खतरा रहता है, कई बार लोग इसमें कूदकर जान दे चुके हैं, इसके बावजदू प्रशासन ने अभी तक यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए हैं, यहां तक कि बाउंड्रीवॉल भी नहीं बनाई गई है, जिसके कारण कोई भी आसानी से ताल में जा सकता है। बार-बार होने वाली घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यहां बाउंड्रीवॉल बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं किया गया है। सागरताल में अक्सर घटनाएं होती रहती हैं, यहां एक साल में कई लोगों ने कूदकर जान दी है। कई बार लोगों ने कूदते देखा तो पुलिस को सूचना देकर जान बचाई है। दरअसल, ताल की गहराई अधिक है, ऐसे में लोग जब कूदते हैं तो गहरे पानी में चले जाते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

दीवार बनने से सुसाइड के रुकेंगे केस

ताल के चारों ओर सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं हैं। दीवार बनाने के बजाए ताल पर लोहे के सरिया लगाए गए हैं, ऐसे में लोग इन पर चढकऱ ताल के अंदर छलांग लगा देते हैं। बार-बार होने वाली घटनाओं के चलते यहां अक्सर बाउंड्रीवॉल बनाने की बात उठी है। इस पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन घटना होने के कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। दीवार न बनने से ताल में असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है। अगर बाउंड्रीवॉल का निर्माण हो जाए तो यहां लोग नहीं आ पाएंगे और छलांग भी नहीं लगा सकेंगे, जिससे होने वाली घटना पर अंकुश लगाया जा सकेगा। आसपास के रहवासियों की मानें तो यहां सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए, जिससे किसी प्रकार की घटना न हो।

सफाई की व्यवस्था भी हो

नगर निगम द्वारा शहर के तालाबों और जलाशयों की सफाई की बात कही जाती है, लेकिन यह महज दिखावा साबित हो रहा है। सागर ताल की बात करें तो यहां भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, जिससे ताल का पानी खराब हो जाता है, लोग इसमें ही कचरा डाल देते हैं। इन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है, जिससे ताल में गंदगी जमा हो रही है।

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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