समय के साथ शिक्षकों को अपग्रेड होने की आवश्यकता

आइटीएम में टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम

ग्वालियर. आइटीएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, एआइसीटीई नई दिल्ली एवं आरजीपीवी भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में पांच दिवसीय टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ गुरुवार को किया गया। ये टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स एवं फ ाइनाइट एलिमेंट मेथड के इंट्रोडक्शन इम्प्लीमेंटेशन एव एप्लिकेशन पर आधारित है। शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेन्द्र साहू, निदेशक, एबीवी आइआइआइटीएम, विशिष्ठ अतिथि डॉ. सावन सिन्हा, एसोसिएट प्रोफेसर आइआइटी दिल्ली, संस्था की डायरेक्टर डॉ. मीनाक्षी मजूमदार, डीन एकेडमिक डॉ. एसएस चौहान उपस्थित रहे।

तरल यांत्रिकी पर आधारित है मौसम का पूर्वानुमान
डॉ. मजूमदार ने बताया कि कम्प्यूटर फ्लूइड डायनामिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग वायुयान, राकेट, ऑटोमोबाइल एवं अन्य यानों की डिजाइन करने में, मौसम का पूर्वानुमान करने में किया जाता है। क्योंकि मौसम का पूर्वानुमान तरल यांत्रिकी पर आधारित है और इसके लिये बहुत सारे नेवियर स्टोक्स समीकरण हल करने पड़ते हैं। इसके अलावा इसका उपयोग कृत्रिम चौनलों के डिजाइन, क्रूड आयल और प्राकृतिक गैस ले जाने वाले पाइप लाइनों में प्रवाह का अध्ययन एवं रक्त वाहिनियों में रक्त के प्रवाह का अध्ययन करने में करते हैं।

टीचर्स का महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. राजेन्द्र साहू ने कहा कि समय के साथ बढ़ती हुई तकनीकी के चलते शिक्षकों को भी अपग्रेड होने की आवश्यकता है, जिसके लिए ऐसे कार्यक्रमों का होना अति आवश्यक है। अंत मे सीनियर प्रोफेसर एटी थोमरे ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में एक अध्यापक का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसके पश्चात डॉ. सावन एस सिन्हा, एसोसिएट प्रोफेसर आइआइटी दिल्ली द्वारा सीएफ डी के विभन्न चरणों के बारे में जानकारी दी।

Mahesh Gupta
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