देश में हर साल 175 मिलियन दूध का उत्पादन और असंगठित क्षेत्र का योगदान सिर्फ एक तिहाई

जेयू में तीन दिवसीय डेयरी फार्मिंग सेमिनार

 

ग्वालियर. वर्तमान में डेयरी उद्योग उभरता हुआ क्षेत्र है, यदि आइटी से तुलना की जाए तो यह केवल तकनीकी वर्ग तक सीमित है, लेकिन डेयरी क्षेत्र सभी वर्गों के लिए खुला है। देश में हर साल 175 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है और जानकारी के अभाव में इसका सिर्फ एक तिहाई प्रतिशत में केवल असंगठित क्षेत्र का योगदान है। अगर तकनीकी रूप से सक्षम युवा आगे आएं और छोटे व्यापारी और किसानों को प्रशिक्षित करें तो बहुत सी कमियों को दूर करके इसको आर्थिक उन्नति का साधन बनाया जा सकता है। यह बात एनडीआरआइ के कुलपति डॉ. आरआरबी सिंह ने कही है।
जेयू के गालव सभागार में रविवार से शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि यह उद्यामिता का युग है और युवाओं को ही यह तय करना है कि उन्हें रोजगार ढूंढने वाला बनना है या रोजगार सृजित करने वाला। दूध और इससे बने उत्पादों का क्षेत्र हमेशा से रोजगार का बेहतर जरिया रहा है, इस क्षेत्र में रुझान के साथ शुद्धता के मानकों को परखकर पूरी जागरुकता के साथ आगे बढ़ा जाए तो अपार संभावनाएं हैं। इस दौरान डीआरडीई के डायरेक्टर डॉ वीके दुबे ने कहा कि डेयरी उद्योग में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन भ्रम की स्थिति के कारण लोगों को बहुत कम जानकारी है। इसके अलावा दूग्ध उत्पाद के क्षेत्र में मिलावट तकनीक का सही इस्तेमाल न होना आदि ऐसे विषय हैं, जिनके कारण कई चुनौतियां अभी इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के सामने हैं, इसका निदान चाहिए तो समय समय पर अपडेट होन जरूरी है।
प्रो. डीडी अग्रवाल ने कहा कि इस व्यवसाय में पुराने मानकों को फ ॉलो किया जा रहा है। हर दस साल में मानकों का अपग्रेडेशन किया जाना चाहिए।

रविवार को दोपहर के समय जीवाजी यूनिवर्सिटी के गालव सभागार में ‘डेयरी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में उद्यमिता मुद्दे और चुनौतियां’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत हुई। आयोजन में विशेष अतिथि के तौर पर एनडीआरआई करनाल के कुलपति व निदेशक डॉ आरआरबी सिंह , जेयू कुलसचिव डॉ आईके मंसूरी, सीआईएफ कोऑर्डिनेटर प्रो. डीडी अग्रवाल, प्रोग्राम कन्वीनर डॉ. जीबीकेएस प्रसाद, एनडीआरआई के को ऑर्डिनेटर डॉ गोपाल सांखला सहित प्रोग्राम ऑर्गेनाइजिंग सैक्रेटरी नरेन्द्र मांडिल मौजूद थे। जीवाजी विश्वविद्यालय के फूड टैक्नोलॉजी, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल और दूध डेयरी व्यवसाय संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में डेयरी खाद्य उत्पाद, उपकरण और मशीनरी की जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

इन चुनौतियों से निपटना जरूरी
-वर्तमान में किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए मिलावट से निपटना बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ समय में यह सामने आया है कि कार्यवाही के दौरान क्रीम निकला हुआ दूध बेचने पर जुर्माना लगाया गया है। इसकी वजह यह है कि दूध का एक ही उत्पाद पूरे देश में अलग-अलग नाम से जाना जाता है और कुछ जगह प्रतिबंधित है। इसके लिए सरकार को सभी उत्पाद और उनके मानकों को क्लीयर करना चाहिए। हर दस साल मेंं मानक अपग्रेड होना चाहिए।
-गुणवत्ता और मिलावट में अंतर न समझने के कारण अधिकतर छोटे किसान और व्यापारी फंस जाते हैं, दूध में वसा की मात्रा कम होने पर उसको मिलावटी समझा जाता है, इस संबंध में प्रशासन जागरुकता कार्यक्रम चलाए।
-दुकानों पर सामान्य तौर पर दूध से पनीर बनाने के लिए कैमिकल मिल जाते हैं, व्यवसाइयों के जरिए विक्रय होने वाले इन कैमिकल्स के बारे मेंं कई बार गलत जानकारी दी जाती है, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं। इसका असर डेयरी व्यवसाय पर पड़ता है।

prashant sharma
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