मटका पद्धति से बचा सकते हैं पानी और पौधे, जानिए यह है तरीका

मटका पद्धति से बचा सकते हैं पानी और पौधे, जानिए यह है तरीका
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Parmanand Prajapati | Publish: Jul, 26 2019 12:59:18 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

मटका पद्धति से बचा सकते हैं पानी और पौधे, जानिए यह है तरीका

ग्वालियर. पौधरोपण एेसे स्थान पर किया जा रहा है, जहां पानी की उपलब्धता कम है, तो एेसे स्थान पर मटका पद्धति बहुत कारगर साबित होती है। इससे न केवल पानी की बचत होती है वरन पानी उतना ही लगता है जितने पानी की आवश्यकता पौधों को होती है। इस प्रकार कम पानी में पौधे ज्यादा दिनों तक अपने को बचाए रख पाते हैं। मटका पद्धति को लेकर किए गए प्रयोग सफल होते हुए दिखने लगे हैं। अब लोग भी जागरूक होकर मटका पद्धति का उपयोग कर पानी और पौधे बचाने में रुचि दिखाने लगे हैं, जिससे पर्यावरण का भी संरक्षण हो सकेगा।

भीषण गर्मी के कारण पौधे नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें नियमित रूप से पानी नहीं मिल पाता है। पानी की किल्लत होने के कारण भी लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में पौधे धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो देते हैं। पौधों को गर्मी से बचाने के लिए गांधी रोड स्थित एक बंगले में मटका पद्धति का प्रयोग किया गया तो काफी सफलता मिली। मटका पद्धति का उपयोग करने वालों ने बताया कि पौधों को पानी देने की इस प्रक्रिया से जमीन और मिट्टी को कटाव से बचाया जा सकता है। इसके कई प्रयोग शहर के आसपास हो चुके हैं। हाल ही में गांधी रोड पर स्थित एक बंगले में सैकड़ों पौधे मटका पद्धति से भीषण गर्मी के दौरान शत-प्रतिशत बचे हैं। इसके लिए जरूरी है कि जो पौधे लगाए जा रहे हैं उनकी उम्र कम से कम चार वर्ष की होनी चाहिए, ताकि बड़े आकार के पौधे आसानी से लगाए जा सकें। इसके लिए हरियाली एक्सपर्ट ने पत्रिका एक्सपोज से बात करते हुए सरकारी अफसरों को सलाह दी है कि वह पौधों को बचाना चाहते हैं तो उक्त प्रक्रिया का शत प्रतिशत पालन करें ताकि शहर को हरियाली मुहैया कराई जा सके, जिससे पौधे भी बचे रहें और पर्यावरण का भी संरक्षण हो सके। अब आम लोग भी इस पद्धति के प्रति जागरुकता दिखाते हुए पौधों को बचाने का शत प्रतिशत प्रयास कर रहे हैं, साथ ही यहां पर आने वाले लोगों को भी मटका पद्धति के बारे में अवगत कराकर इस प्रयोग को करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
वहीं कई लोग इस पद्धति को अपना रहे हैं।

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