भक्तों की प्रार्थना रूपी निर्मल धार में प्रतिदिन स्नान करते हैं प्रभु

- हजीरा में मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा में मुनि विहर्ष सागर बोले

By: Narendra Kuiya

Updated: 22 Feb 2020, 10:54 PM IST

ग्वालियर. सत्य की साधना कष्टदायी हो सकती है, लेकिन इसके फलस्वरूप हमें ईश्वर की प्राप्ति होती है। आप सभी को भगवान को पाने के लिए सत्य की साधना करनी पड़ेगी। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सारी मर्यादाएं तोड़ दीं तब भगवान ने नर रूपी अवतार लेकर जन्म लिया। प्रभु भक्तों की प्रार्थना रूपी निर्मल धार में प्रतिदिन स्नान करते हैं। यह विचार जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज ने गुरूवार को हजीरा स्थित न्यू कालोनी में नवीन धर्मनाथ मंदिर में मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा में व्यक्त किए। इस मौके पर मुनि विजयेश सागर का 41वां जन्मोत्सव भी धूमधाम के साथ मनाया गया।
जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज ने कहा कि गजेंद्र एक हाथी था। जो नाम नहीं ले सकता था केवल पुकारता है और भगवान करुण पुकार सुनकर पहुंच कर ग्राह के बंधन से छुड़ाते हैं। यें हमें शिक्षा देती है कि जब एक हाथी की पुकार पर भगवान आ सकते हैं तो क्या हमारे बुलाने पर नहीं आएंगे। भगवान की हम पर इतनी कृपा क्या कम है। हमें भी 24 घंटों में से 24 मिनट भगवान के पास बैठना चाहिए। बच्चों को केवल स्कूल के भरोसे ना छोड़ें हमारी संस्कृति और संस्कार भी दें। प्रवचन से पूर्व नवीन मंदिर के अजय जैन, विजय जैन, अमन जैन परिवार ने पाद प्रक्षालन कर श्रीफल चढ़ाकर आर्शीवाद लिया।

Narendra Kuiya Reporting
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