शिष्य को धैर्यवान एवं गुरु के प्रति समर्पित होना चाहिए

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कथक नृत्य विभाग की ओर से शनिवार को ऑनलाइन कथक सेमिनार हुआ। इसमें स्पीकर के रूप में पद्मश्री डॉ. पुरू दाधीच मौजूद रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं एवं कलाकारों को कथक नृत्य की पारंपरिक एवं विश्वविद्यालयन शिक्षा प्रणाली विषय पर जानकारी दी।

By: Harish kushwah

Updated: 10 May 2020, 08:04 PM IST

ग्वालियर. राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कथक नृत्य विभाग की ओर से शनिवार को ऑनलाइन कथक सेमिनार हुआ। इसमें स्पीकर के रूप में पद्मश्री डॉ. पुरू दाधीच मौजूद रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं एवं कलाकारों को कथक नृत्य की पारंपरिक एवं विश्वविद्यालयन शिक्षा प्रणाली विषय पर जानकारी दी। यह कार्यक्रम विश्वद्यालय की डॉ. अंजना झा द्वारा ऑर्गेनाइज किया गया। उन्होंने बताया कि छात्र विश्वविद्यालय में नृत्य के अध्ययन के लिए शामिल होते हैं। वह भी एक अच्छे कलाकार हो सकते हैं। यह संभव है, लेकिन इसके लिए लगन और मेहनत की जरूरत है। इस दौरान छात्र एवं छात्राओं ने सवाल भी किए।

उन्होंने बताया कि शिष्य को धैर्यवान एवं गुरु के प्रति समर्पण की भावना रखनी चाहिए। गुरु ही आपकी प्रतिभा को निखार सकता है। गुरु का साथ कभी न छोड़ें। उन्होंने कहा कि जो ग्रंथ बाजार में नहीं मिलते हैं और प्रकाशित हो चुके हैं उन ग्रंथों को विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी द्वारा छात्र एवं छात्राओं को प्रयुक्त कराने चाहिए, जिससे कथक का शास्त्रीय पक्ष नई पीढ़ी तक पहुंच सके। आभार डॉ. अंजना झा ने व्यक्त किया।

प्रश्न - 'कथक नृत्य करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर - कथक नृत्य करते समय रस का समावेश रखना जरूरी है।

प्रश्न - 'लोक कलाओं का जन्म पहले हुआ या शास्त्रीय कलाओं का?

उत्तर - शास्त्रीय कलाओं का जन्म पहले हुआ। इसका अनुमान प्राचीन ग्रंथों में लगाया गया है एवं जनसाधारण के जन्म के साथ ही लोक कलाओं का भी जन्म हुआ।

प्रश्न - 'अशोक मल्ल के नृत्य अध्याय के बारे में बताएं?

उत्तर - अशोक मल्ल का नृत्य अध्याय बहुत पहले प्रकाशित हो चुका है एवं नृत्य के सभी पक्षों पर विचार इस अध्याय में देखने को मिलता है। लगभग 15 से अधिक अध्याय इसमें शामिल हैं।

प्रश्न - 'पीएचडी का विषय कैसे चुने?

उत्तर - जो प्रश्न हमारे मन में उत्पन्न होते हैं, हमें उसी विषय को अपने शोध कार्य के लिए चुनना चाहिए।

प्रश्न - 'ठुमरी की कोरियोग्राफ ी कैसे करें?

उत्तर - जो बोल हम ले रहे हैं हर बोल के अलग-अलग मतलब निकाल कर उनका अभ्यास करें। हर एक बोल को कथक नृत्य में कई प्रकार से बताया जा सकता है।

Harish kushwah Desk
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