कारोना काल में घर से निकाले गए डॉग्स का सहारा बनी ग्वालियर की नम्रता, स्ट्रीट डॉग को भी भूखा ना सोने दिया

दो माह में 7 घायल डॉग के कराए ऑपरेशन, ठीक होने तक घर पर रखा

By: Mahesh Gupta

Published: 15 Jun 2021, 10:20 PM IST

ग्वालियर.

इंसान और जानवर का बहुत पुराना रिश्ता रहा है। हालांकि अब इस भागदौड़ भरी जिंदगी में काफी कुछ बदल गया है। लोग अपने ही जीवन और सुख सुविधाओं में व्यस्त हैं, लेकिन इन्हीं में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो जानवरों के दर्द को अपना समझते हैं और अपने प्यार का मरहम लगाते हैं। इन्हीं में से एक हैं ग्वालियर की नम्रता सक्सेना, जो कोरोना काल में घर से निकाले गए डॉग का सहारा बनी। उन्होंने अपने घर पर इन डॉग्स को रखा और सेवा की। वहीं कुछ डॉग्स को एडॉप्ट भी करवाया। स्ट्रीट डॉग के प्रति उनकी सेवा लम्बे समय से चल रही है।

घर पर बीस डॉग की कर रहीं सेवा
नम्रता ने बताया कि कोरोना के पीक टाइम में घर के घर संक्रमित हो गए थे। ऐसे में उनके सामने डॉग्स के खिलाने की दिक्कत आई। वहीं कई लोग ऐसे भी रहे, जो डॉग्स से भी कोरोना फैलने का भ्रम लेकर बैठ गए और उन्होंने घर से डॉग को निकाल दिया। ऐसे डॉग के लिए मैंने पहल की और उनके रहने का प्रबंध किया। इस समय मेरे पास 20 डॉग हैं। इनमें स्ट्रीट डॉग भी शामिल हैं।

स्ट्रीट डॉग के लिए कर रहीं भोजन व्यवस्था
नम्रता पिछले कई वर्षों से डॉग के लिए काम कर रही हैं। रोजाना सुबह और शाम सड़क किनारे डॉग को खाना खिलाने के साथ ही उनके इलाज में के लिए भी आगे रहती हैं। पिछले दो माह में उन्होंने 7 घायल डॉग का ऑपरेशन कराया है। ये डॉग ऐसे थे जिनकी हाथ, पैर व कमर टूट गई थी। उन्हें अपने घर पर ही ठीक कराया और फिर उन्हें उनके एरिए में छोड़ा। आज इलाज कराए हुए डॉग उनके घर पर हैं।

संक्रमण का डर था, लेकिन हौसला उससे बड़ा
नम्रता को संक्रमण का डर था, लेकिन डॉग को भूखा न सोने देने का हौसला उससे अधिक था। बीच में वह व उनके पति राहुल गौतम बीमार भी हुए, लेकिन उन्होंने सेवा बंद नहीं की। बाहर से खाना खिलाकर आने के बाद वह अपने आपको सेनेटाइज करतीं, फिर अपने बेटे उत्कर्ष (5 साल) के पास जातीं।

Mahesh Gupta
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