scriptThe market of sesame dishes smelling before Makar Sankranti | मकर संक्रांति से पहले महक रहा तिल के व्यंजनों का बाजार | Patrika News

मकर संक्रांति से पहले महक रहा तिल के व्यंजनों का बाजार

- पिछलेे साल से 10 फीसदी महंगी है गजक, मकर संक्रांति पर पर बढ़ जाती है पूछ-परख

ग्वालियर

Published: January 11, 2022 09:54:29 am

ग्वालियर. ठंड के मौसम में तिल से बने व्यंजनों की बात ही कुछ और है। मकर संक्रांति के मौके पर इनकी पूछ-परख और भी बढ़ जाती है। इन दिनों बाजार में तिल से बनी गजक और दूसरे सभी व्यंजनों की महक बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच रही है। हालांकि गजक कारोबारियों का कहना है कि पिछले साल से इस बार बिक्री में 20 फीसदी की गिरावट है, पर मकर संक्रांति के मौके पर उन्हें बिक्री बढऩे की उम्मीद है। गजक के दामों में पिछले साल से 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बताया जाता है कि इस वर्ष तिल्ली की फसल कम होने के कारण पुरानी तिली की ही गजक अधिक बनाई जा रही है।
मकर संक्रांति से पहले महक रहा तिल के व्यंजनों का बाजार
मकर संक्रांति से पहले महक रहा तिल के व्यंजनों का बाजार
ये हैं दाम
सादा गजक-300 रुपए, ड्रॉयफ्रूट देसी घी गजक-480 रुपए, तिल मावाबाटी-480 रुपए, गजक का समोसा-680 रुपए, पंचरत्न बर्फी-400 रुपए, मावे की गजक-480 रुपए, साबुत तिल्ली के लड्डू-280 रुपए, रेवड़ी-280 रुपए, देसी घी की रेवड़ी-320 रुपए, गुड़ की चिक्की-240 रुपए।
(नोट-सभी दाम प्रति किलो में हैं)
फैक्ट फाइल
- शहर में गजक की छोटी-बड़ी 300 दुकानें हैं।
- नवंबर से फरवरी तक के सीजन में करीब 10 करोड़ की गजक की बिक्री होती है।

शुगर फ्री और इम्यूनिटी बूस्टर गजक भी मौजूद
डायबिटीज के मरीजों को ध्यान में रखते हुए शुगर फ्री (नौ कैलोरी) गजक भी बाजार में मौजूद है। शुगर फ्री गजक के दाम इस साल 480 रुपए प्रति किलो है, गत वर्ष ये 440 रुपए किलो थी। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इम्यूनिटी बूस्टर वाली गजक भी बाजार में मिल रही है। इसमें गुड़ की मात्रा काफी अधिक होती है। इसके दाम 360 रुपए किलो रखे गए हैं।
20 फीसदी कम है गजक की बिक्री
गजक कारोबारी महेश राठौर ने बताया कि सीजनल गजक की बिक्री फरवरी माह तक जारी रहती है, पर मकर संक्रांति पर तिल से बने व्यंजनों की पूछ-परख बढ़ जाती है। इस साल गजक की बिक्री 20 फीसदी कम है। गजक व्यापारी विनोद गुप्ता का कहना है कि इस साल कोविड-19 के कारण बाजार में उठाव कम ही दिख रहा है।

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