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गर्मी से पहले ही शुरू हुई आहट गांवों में होने लगी जल संकट की आहट

जिले के 500 गांवों में से 93 आदिवासी बस्तियां हैं, इन बस्तियों में हर वर्ष गर्मी में पीने का पानी नहीं मिलता, जबकि इस बार गर्मी से पहले ही घाटीगांव क्षेत्र की 20 बस्तियों में जल...

ग्वालियर

Published: March 11, 2022 06:30:32 pm

ग्वालियर. जिले के 500 गांवों में से 93 आदिवासी बस्तियां हैं, इन बस्तियों में हर वर्ष गर्मी में पीने का पानी नहीं मिलता, जबकि इस बार गर्मी से पहले ही घाटीगांव क्षेत्र की 20 बस्तियों में जल संकट की आहट दिखने लगी है। पथरीले क्षेत्र में बसी इन आदिवासी बस्तियों में पीने के पानी की कमी अभी से होने लगी है। गांव के लोग पानी के लिए पास की नदी या फिर दूर खेतों में लगे नलकूपों पर निर्भर हैं।
दरअसल, बीते वर्ष दोनों संभाग की 1523 बस्तियों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए काम शुरू किए गए थे। इनमें से 153 बस्तियोंं में बाढ़ आने से पहले काम कराने का दावा किया गया था। इनमें से ग्वालियर संभाग की 1072 बस्तियों में और चंबल संभाग की 451 अदिवासी बस्तियों में पेयजल प्रबंधन के लिए काम कराने का दावा किया गया था। ग्वालियर जिले के 93 गांवों में सबसे पहले काम कराना था, इन गांवों में काम कराने के लिए राशि भी आवंटित हुई, लेकिन लोगों के घरों तक पेयजल अभी भी नहीं पहुंचा है। ग्वालियर जिले के घाटीगांव विकासखंड के अलावा श्योपुर जिले में भी पेयजल संकट बना हुआ है।
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गर्मी से पहले ही शुरू हुई आहट गांवों में होने लगी जल संकट की आहट

ट्रायल में ही अमृत का पानी नहीं पहुंचा घरों
अमृत का पानी घरों तक पहुंचे इसके लिए इन दिनों ट्रायल चल रही है, लेकिन ट्रायल में दीनदयाल नगर के जी सेक्टर में सप्लाई फेल हो गई। इससे हजारों लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ा। एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई जी सेक्टर में होना थी, लेकिन सुबह पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। इसके चलते लोग परेशान होते रहे। अधिकांश लोग तो पानी की टंकी पर पहुंच गए। जहां चौकीदार ने कहा कि टंकी ही खाली पड़ी हुई है। चौकीदार ने लोगों को बताया कि शाम को पानी आएगा, लेकिन शाम को भी अधिकांश घरों तक पानी नहीं पहुंचा। इसके चलते लोगों को काफी परेशानी हुई।
वहीं सुबह से शाम तक लोग पानी का इंतजार ही करते रहे।
एक सप्ताह से बढ़ी परेशानी : दीनदयाल नगर में एक सप्ताह से पानी को लेकर काफी परेशानी बनी हुई है। आठ दिन पहले चौबीस घंटे तक पानी की टंकी भरने के साथ सप्लाई खोली गई, लेकिन पानी जब भी घरों में नहीं पहुंच सका। अमृत योजना के तहत चौबीस घंटे पानी आना है। इसी की ट्रायल इन दिनों चल रही है, लेकिन अभी से ही घरों में पानी नहीं आ रहा है।
यह है जिलों की स्थिति
ग्वालियर में 93, दतिया में 105, गुना में 363, अशोकनगर में 189, शिवपुरी में 322, मुरैना में 95, श्योपुर में 215 और भिंड में 141 बस्तियोंं में पानी की कमी बनी हुई है।
एक से डेढ़ किमी से लाते हैं पीने का पानी
घाटीगांव के आरोन क्षेत्र और सुरेहला, लखनपुरा, लदेरा जैसी बस्तियों के संपन्न लोग गर्मी में ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर पानी लाते हैं। पीने का पानी लोग ड्रम में भरकर लाते हैं।
डबरा में नदी किनारे के गांवों में हैंडपंप खराब हैं, रेत के अवैध उत्खनन की वजह से गांवों का जल स्तर नीचे चला गया है।
भितरवार में बाढ़ के बाद खराब हुए जल स्रोतों को सुधारने में पीएचई अधिकारियों ने लगातार लापरवाही बरती है।
ठेकेदार और इंजीनियर की मिलीभगत से गोलमाल
पीएचई के माध्यम से हर वर्ष ग्रामीण क्षेत्र में 100 से ज्यादा नलकूपों का खनन किया जाता है, जबकि एक से डेढ़ हजार फीट राइजर पाइप डालने का बिल बनाया जाता है। यह बिल लगभग हर वर्ष बनते हैं, इसके बाद भी हैंडपंपों में पानी नहीं रहता। बीते दिनों चीनोर क्षेत्र में काम करने वाले पीएचई के ठेकेदार पर एफआइआर करने के आदेश कलेक्टर ने दिए थे, लेकिन पीएचई के अधिकारियोंं ने पूरे मामले को दबाकर कलेक्टर को ही गुमराह करने की कोशिश शुरू कर दी है।
पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने दिए निर्देश
पेयजल उपलब्धता बढ़ाने के लिए पीएचई को निर्देश दिए हैं। पीएचई द्वारा कराए जा रहे कामों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए सभी कलेक्टर और पीएचई के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।
आशीष सक्सेना, संभागायुक्त
इनका कहना है
मोती झील से पानी की सप्लाई नहीं होने से कई क्षेत्रों में पानी की समस्या आ रही है। इसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा।
एपीएस भदौरिया, उपायुक्त नगर निगम

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