भिण्ड के रास्ते आया टिड्डी दल, घबराए लोगों ने बजाईं थालियां

कृषि विभाग का दावा, खेत खाली होने से नुकसान की आशंका नहीं

By: monu sahu

Published: 30 Jun 2020, 12:33 AM IST

ग्वालियर। फसलों और पेड़-पौधों को चट कर जाने वाले टिड्डी दल सोमवार शाम करीब एक घंटे तक शहर के आसमान पर मंडराता रहा। भिंड के लहार क्षेत्र से होता हुआ टिड्डियों का झुंड दीनदयाल नगर के रास्ते शहर में घुसा। इससे लोगों में घबराहट फैल गई। मोहल्लों और कॉलोनियों में लोगों ने तेज आवास से इनको भगाने शोर मचाया और थालियां बजाईं। इसके बाद टिड्डी दल गोला का मंदिर, थाटीपुर और दर्पण कॉलोनी में दिखा। गनीमत रही कि वह यहां रुके बिना वापस मुरैना रोड की ओर गया और मऊ-जमाहर के रास्ते शहर से बाहर निकल गया। दोपहर करीब तीन बजे भिंड से टिड्डी दल आगे बढ़ा था। वहां लहार तक इसको देखा गया, लेकिन ग्वालियर में कृषि विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

इसी वजह से जिन इलाकों से टिड्डी दल गुजरा वहां पर प्रशासनिक स्तर पर कोई तैयारी नजर नहीं आई। करीब डेढ़ दर्जन क्षेत्रों के ऊपर से निकले टिड्डियों के समूह को भगाने के लिए न तो फायर ब्रिगेड की तैनाती दिखी और न ही छतों के लगभग ऊपर से निकले टिड्डियों को भगाने के लिए मुस्तैदी दिखी। कृषि विभाग का दावा है कि इस समय खेत भी खाली हैं, इसलिए फसलों को नुकसान होने की आशंका नहीं है, इसके अलावा अचानक शहर में आए टिड्डियां के हवा के साथ उड़ जाने की वजह से पेड़-पौधे आदि को नुकसान नहीं है।

कई बार पहुंचा ग्वालियर की सीमा में
कृषि विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो पिछले करीब डेढ़ महीने से जिले की सीमा में टिड्डियों के दल अलग-अलग जगह दिखाई दे रहे हैं। पिछले महीने झांसी-दतिया और शिवपुरी की सीमा से सटे ग्वालियर के गांवों में टिड्डियों का दल देखा गया था। इसके बाद शिवपुरी की ओर से आए टिड्डी दल ने भितरवार और डबरा के गांवों में खेतों पर हमला किया था। इस दौरान नगर निगम सीमा से सटे गांवों तक पेड़-पौधों की पत्तियों पर देखे गए थे। गांवों में लोगों ने फसलों पर स्प्रे करने वाली दवाई का छिड़काव करके भगाने की कोशिश की थी। इसके बाद अब भिंड की ओर से टिड्डियों का दल सीधे शहर में आ धमका था।

Tiddi Dal Attack : Locust Swarm Attack in gwalior

हवा ने बचा लिया नुकसान से
टिड्डियों के हमले से सरकारी इंतजामों की तो हर बार की तरह पोल खुल गई लेकिन शहर के आसमान में तेज हवा के बहाव ने टिड्डी दल को टिकने नहीं दिया। अगर हवा थमी होती तो ज्यादा पेड़-पौधे वाले क्षेत्रों में नुकसान हो सकता था। इसके अलावा बाहर खेल रहे बच्चों और टहलने के लिए निकले बुजुर्गों को भी यह झुंड नुकसान पहुंचा सकता था।

आंखों देखी...जहां से निकला आसमान हुआ काला
टिड्डी दल सबसे पहले दीनदयाल नगर क्षेत्र में नजर आया था, लेकिन यहां जब तक लोग कुछ समझते पूरा झुंड गोला का मंदिर क्षेत्र में निकल गया। इसके बाद इंद्रमणि नगर के ऊपर से थाटीपुर क्षेत्र में पहुुचा और फिर दर्पण कॉलोनी तक आकर वापस मुड़ गया। यह झुंड जिधर से निकला, उस क्षेत्र का आसमान असंख्य टिड्डियों की वजह से कुछ देर के लिए काला नजर आने लगा था। अगर यह झुंड सिरोल या जीवाजी विश्वविद्यालय की ओर निकलता तो खेतों में खड़ी सब्जी और जेयू परिसर में हरियाली को नुकसान पहुंचा सकता था।

संयुक्त संचालक कृषि आनंद बड़ोनिया ने बताया कि टिड्डी दल भिंड के रास्ते दोपहर बाद ग्वालियर की सीमा में आया था। इसके बाद दीनदयाल नगर, गोले का मंदिर,थाटीपुर होते हुए वापस डीडी नगर की ओर मुड़ गया और मऊ-जमाहर, रायरू होते हुए शहर से बाहर निकल गया। हवा के साथ उड़ता हुआ आया टिड्डी दल एक दिन में 80 से 150 किलोमीटर तक उड़ सकता है। हालांकि, इस समय खेतों में फसल नहीं है, इसलिए विशेष नुकसान की संभावना नहीं है, इसके बावजूद हमने फ ायर बिग्रेड के साथ ट्रैक्टर से स्प्रे करने की तैयारी की थी।

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