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स्वस्थ रहने के लिए फल और सब्जियों को अच्छे से साफ करें, अनाज को भी सुरक्षित रखें

आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में 'फूड सेफ्टीÓ पर एक्सपर्ट लेक्चर

ग्वालियर

Published: August 22, 2021 11:34:32 am

ग्वालियर.

हमेशा भोजन के लिए स्वस्थ प्रणाली को अपनाना चाहिए। क्योंकि व्यक्ति स्वस्थ होगा तो समाज भी स्वस्थ होगा। कहा भी गया है कि प्रथम सुख निरोगी काया। इसलिए हमें भोजन संबंधित सुरक्षित चरणों का प्रयोग करना चाहिए। जैसे फलों, सब्जियों को अच्छे से पानी से साफ करना, इन्हें साफ करने के लिए क्लोरीन एवं सिरके का प्रयोग करना, सही तापमान पर रखना अािद का ख्याल रखना चाहिए। सूखे अनाज के भंडार में सुरक्षित भंडारण करना, प्रकाश, कीटों से रहित, नमी से दूर रखना आदि। कुछ ऐसी ही जानकारी दे रहे थे आइसीएआर दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ देवेंद्र ढींगरा। वे आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ साइंसेज के फूड टेक डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित एक्सपर्ट लेक्चर में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे। यह लेक्चर 'फूड सेफ्टीÓ विषय पर करवाया गया।
स्वस्थ रहने के लिए फल और सब्जियों को अच्छे से साफ करें, अनाज को भी सुरक्षित रखें
स्वस्थ रहने के लिए फल और सब्जियों को अच्छे से साफ करें, अनाज को भी सुरक्षित रखें
विशेष रूप से उपस्थित डॉ देेवेंद्र पोस्ट हार्वेसिंग विषय के विशेषज्ञ हैं। वे फिजी सरकार के कृषि मंत्रालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोज्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरे होते है।। भोजन हर व्यक्ति की आवश्यकता है। भोजन को सुरक्षित ग्रहण करना भी अति आवश्यक है। इसलिए हमें सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित भोजन की भी बहुत महत्वता है। भोजन पकने, रखने, भंडारण करने, खाने जैसी क्रियाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। इसका सबसे अहम कारण है कि असुरक्षित भोजन ग्रहण करने से शीघ्र एवं अधिक मात्रा में बच्चे, बुजुर्ग, गर्भस्थ महिलाएं एवं शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता की कमी वाले व्यक्तियों को जल्दी ही प्रभावित कर रोगग्रस्त करता है। इस मौके पर वाइस चांसलर डॉ एसएस भाकर ने भी फूड सेफ्टी की महत्वता को शारीरिक, मानसिक व आत्मिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया। स्कूल ऑफ साइंसेस की डीन डॉ रिचा कोठारी भी मौजूद रहीं। संचालन डॉ रीता शर्मा ने किया एवं आभार डॉ हृदेश राजपूत ने व्यक्त किया।
कई तरह से असुरक्षित होता है हमारा भोजन
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ देवेंद्र ने लेक्चर के दौरान फूड सेफ्टी विषय को चार चरणों में समझाया। उन्होंने बताया कि रोग का मुख्य कारण भोजन के प्रति सावधानियों की कमी होती है। हमारा भोजन, भौतिक, रासायनिक एवं जैविक तरीकों से असुरक्षित होता है। जैसे भोजन में पिन, कंकड़, बाल, बटन का आना, अधिक रासायनिक पदार्थों का भोज्य पदार्थों पर छिड़काव, बीमार जानवरों के उत्पादों का उपयोग, हवा एवं जल प्रदूषण का प्रभाव, कीड़े-मकौड़े, चूहे, मक्खी, सूक्ष्म जीवाणु एवं विषाणुओं से भोजन अखाद्य या विषाक्त होता है। डॉ देेवेंद्र ने भोज्य पदार्थ बनाने से लेकर आयात एवं निर्यात तक की प्रक्रिया में प्रयोग की जाने वाली प्रणालियों का विस्तार से चित्रण कर समझाया। साथ ही भोज्य पदार्थों का प्रबंधन करने वाली संस्थाओं और सर्टिफिकेट के बारे मे विस्तार से जानकारी दी।

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