ट््रांसपोर्टर का खुलासा, फूड कार्पोरेशन का कर्मचारी ले जाता था गेंहू

पहले पकडा गया ट््रांसपोर्टर जेल भेजा
गेहूं प्राप्त करने की रसीदें , ईमेल की फोटो कॉपी लेकर हाजिर हुआ ट््रांसपोर्टर

By: Puneet Shriwastav

Published: 29 Dec 2020, 03:17 AM IST

ग्वालियर। लॉकडाउन में गरीबों को मुहैया कराए गए 3करोड 7 लाख के गेहूं को चुराने में नए खुलासे हो रहे हैं। रविवार रात को इटावा, यूपी से पकडा गया ट््रांसपोर्टर राहुल अग्रवाल पूरी तैयारी के बाद पुलिस के हाथ आया है। उसने कुछ उचित मूल्य की दुकानों की गेहूं मिलने की रसीदें पुलिस को थमाई हैं।

इनमें कई रसीदों में गोदामों से गेहूं निकलने और दुकान तक पहुंचने में 4-5 महीने का अंतराल है। राहुल खुद को बेकसूर बता रहा है। उसने खुलासा किया अग्रवाल ट््रांसपोर्ट उसकी और अग्रवाल महाराष्ट््र ट््रांसपोर्ट मामा मुन्नलाल की फर्म हैं। दोनों फर्म के 8 ट््रक गेहूं ढोहने के लिए खादय विभाग ने किराए पर लिए थे।

उसका किराया उन्हें मिलना था, गोदाम से गेंहू ट््रक पर लदवाकर फूड कार्पोरेशन का कर्मचारी साथ जाता था। वह जिस दुकान पर गेहूं उतरवाने के लिए कहता ट््रक चालक वहां गाडी खडी करता था।

उसने गेहूं कहां उतवाया वह कैसे बता सकता है। राहुल ने दलील दी है कि उसे ट््रकों का किराया तक नहीं मिला। वसूली के लिए फूड कार्पोरेशन को कई इमेल भी किए थे।उनके भी कुछ प्रिंट आउट वह साथ लाया था वह पुलिस को थमाए है।


खादय विभाग का कर्मचारी, नाम भूल गया
ट््रांसपोर्टर राहुल अग्रवाल गेहूं चोरी से अपना पल्ला झाड रहा है। फूड कार्पोरेशन का वह कर्मचारी कौन है जो ट््रक में लदे गेहूं के साथ जाता था। इसका खुलासा भी नहीं कर रहा है।

उसका कहना है कि उसे सिर्फ इतना पता है कि गेहूं ले जाने वाला फूड कार्पोरेशन का कर्मचारी था। उसका नाम याद नहीं है। वैसे भी उसका काम सिर्फ विभाग को ट््रक मुहैया कराना था। उसमें कौन गेहूं लदवा रहा है, कहां ले जा रहा है। इससे कोई ताल्लुक नहीं था।
भांजा आया, मामा को जेल भेजा
गेहूं चोरी मामले में मुन्नालाल और उसके भांजे राहुल अग्रवाल से आमने सामने की पूछताछ नहीं हो पाई। राहुल को पुलिस सुबह इटावा से लेकर लौटी।

मुन्नालाल को अदालत ने सिर्फ एक दिन की रिमांड दी थी। इसलिए सोमवार सुबह उसका मेडिकल कराकर कोर्ट में पेश किया। अदालत ने उसे जेल भेजने के आदेश दिए।

हालांकि पुलिस मान रही थी कि मुन्नालाल की रिमांड की अवधि बढाने के लिए अदालत से कहेगी। लेकिन अदालत में उसकी दलील बेदम रही। इसलिए मुन्नालाल को जेल भेजना पडा।

पुलिस का कहना है मुन्नालाल ने पकडे जाने के तुंरत बाद जरूर कुछ अहम खुलासे किए थे। लेकिन फिर बातें बदलता गया।

उसका कहना था कि ट््रांसपोर्ट का काम ज्यादा होने की वजह से सरकारी गोदाम से गेहूं लाने और सरकारी उचित मूल्यों की दुकानों पर पहुंचाने के लिए प्रतिनिधि लगाए थे।इसकी जानकारी जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति विभाग को भी दी थी। पुलिस चाहे तो उन लोगों की जानकारी ले सकती है।


आमना- सामना मेंं हो सकते बडे खुलासे
मुन्नलाल और राहुल अग्रवाल का आमना सामना कराया जाता तो उसमें कुछ बडे खुलासे हो सकते थे। क्योंकि मुन्नालाल ने पकडे जाने के बाद खुलासा किया था कि वह तो सिर्फ मोहरा है।

क्या काला पीला हुआ इसकी जानकारी भांजे राहुल अग्रवाल को है। उसे पहले से पता था कि पुलिस गेहूं चोरी मामले में एफआइआर करने वाली है। इस खुलासे के बावजूद पुलिस ने मामा भांजे का सामना नहीं कराया।

अब इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है तो पुलिस भी चुप है। राहुल ने जो खुलासे किए है उससे जाहिर है कि करोडों के गेहूं को चुराने में ट््रांसपोर्टर और सरकारी कर्मचारी, अधिकारियो ंका नेटवर्क शामिल रहा है।

करोडो गेहूं चोरी करना सिर्फ ट््रांसपोर्टर मामा भांजे के बूते की बात नहीं है। इसलिए उन दुकानदारों की शिकयत को भी दवाने की कोशिश की गई जिन्होंने गेहूं नहीं मिलने की शिकायतें की थीं।

Puneet Shriwastav Reporting
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