टूटे झूले और बदहाल बाउड्री बनी रेलवे पार्क की पहचान

जिसका मेंटनेंस भी रेलवे को ही करना है, लेकिन उसके बावजूद भी रेलवे के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है।

रेलवे कॉलोनी में एक मात्र पार्क उसका भी बुरा हाल
ग्वालियर. रेलवे कॉलोनी का पार्क सिर्फ नाम का ही पार्क बनकर रह गया है। इस पार्क में अब पार्क जैसा कुछ भी नहीं है। पार्क में काफी समय पहले झूलों के साथ पेड़- पौधें और बाउड्रीवाल हुआ करती थी, लेकिन अब न तो पेड़- पौधे बचे है और न ही बच्चों के लिए झूले। इन दिनों हालात यह है कि पार्क में जंगली पेड़ पौधो के साथ आसपास का कचरा होने से यहां रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। केशरबागर के पीछे स्थित रेलवे कॉलोनी में लगभग दो सौ से ज्यादा परिवार यहां पर निवास करते है। इन परिवारों के लिए रेलवे ने एक मात्र पार्क बनाया है। जिसका मेंटनेंस भी रेलवे को ही करना है, लेकिन उसके बावजूद भी रेलवे के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। अब हालात यह हो गए है कि पार्क में जगह- जगह गंदगी के ढेर के साथ आसपास के क्षेत्रों के जानवर आ जाते है। इसके चलते कॉलोनी के लोग भी परेशान हो रहे है। रेलवे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों के बच्चे पार्क न होने के कारण घरों में कैद होकर ही रह गए है। ऐसे में यहां के लोगों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ कॉलोनी में स्टीट लाइट भी अधिकांश बंद होने के कारण शाम होते ही कॉलोनी के लोगों की परेशानी ओर भी बढ़ जाती है। रेलवे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी चौबीस घंटे की होने के कारण कर्मचारियों के परिजन कभी- कभी अकेले भी रहते है। ऐसे में रात को स्टीट लाइटें बन रहती है। लगभग पौने दो वर्ष पूर्व यहां रेलवे के कई बड़े अधिकारी आए थे। इन अधिकारियों ने भी पार्क को मेंटनेंस करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने यहां पर अपनी रुचि नहीं दिखाई। जिसके कारण आज भी पार्क में गंदगी और अव्यस्थाएं बनी हुई है। पार्क को ठीक करने के लिए झांसी मंडल के पूर्व डीआरएम एके मिश्रा ने भी संबंधित अधिकारियों को ठीक करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बाद भी अभी तक पार्क का हाल जस का तस बना हुआ है। अब तो हालात यह है कि धीरे- धीरे पार्क की स्थिति और खराब होती जा रही है।

Neeraj Chaturvedi
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