scriptTwo months have passed, the decision on CCTV at the checkpost | दो महीने बीते, चेकपोस्ट पर सीसीटीवी को लेकर अभी तक नहीं हो सका फैसला | Patrika News

दो महीने बीते, चेकपोस्ट पर सीसीटीवी को लेकर अभी तक नहीं हो सका फैसला

जिले में रेत, काले और सफेद पत्थर के अवैध उत्खनन के बाद हो रहे अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में प्रमुख सचिव ने चेकनाके स्थापित कर सीसीटीवी लगवाने...

ग्वालियर

Updated: November 02, 2021 08:00:52 pm

ग्वालियर. जिले में रेत, काले और सफेद पत्थर के अवैध उत्खनन के बाद हो रहे अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में प्रमुख सचिव ने चेकनाके स्थापित कर सीसीटीवी लगवाने के निर्देश दिए थे।
वीडियो कांफ्रेंस के जरिये दिए गए निर्देश के साथ ही पीएस माइनिंग ने एक महीने की समय सीमा भी तय की थी। इस समय सीमा को पूरा हुये दो महीने का समय बीत चुका है और अभी तक कैमरे लगाने और चेकनाके स्थापित करने की प्लानिंग भी सही तरीके से नहीं की गई है। अधिकारी अभी तक सीसीटीवी को लेकर निर्णय भी नहीं ले सके है। यह स्थिति तब है जबकि तीन वर्ष पहले प्रदेश में सबसे पहले जिले में चेकनाकों के साथ ही सीसीटीवी लगाने के लिए स्थान तय किये जा चुके हैं और सिर्फ अनुमति ली जानी बाकी थी।
उल्लेखनीय है कि अवैध परिवहन पर लगाम लगाने के लिए 2016-17 में माइनिंग विभाग के तत्कालीन पीएस से अनुमति लेकर तत्कालीन माइनिंग ऑफिसर मनीष पालेवार ने चार जगह सीसीटीवी लगाने का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया था। इस पायलट प्रोजेक्ट को परखने के बाद शुरुआत में दो चेकनाकों पर सीसीटीवी लगाने के लिए शुरुआती मंजूरी भी दी गई थी। लेकिन यह योजना राजनीतिक दबाव और माइनिंग माफिया के प्रभाव की वजह से अस्तित्व में नहीं आ पाई। इसके साथ ही लगभग 2700 करोड़ रुपए के अवैध परिवहन और ओवर लोडिंग पर लगाम लगाने में पूरी प्रशासनिक मशीनरी असफल हो रही है।
cms_image-2
दो महीने बीते, चेकपोस्ट पर सीसीटीवी को लेकर अभी तक नहीं हो सका फैसला
यह प्लानिंग अमल में आती तो लग सकता था अंकुश
- सीसीटीवी और चेक नाके
- सीसीटीवी कैमरे लगाने का यह प्लान 2017 में तैयार हुआ, जनवरी 2018 में प्रस्ताव पर मंजूरी मिली।
- चिरवाई नाका, मोहनपुर टोल,पुरानी छावनी और महाराजपुरा पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनी थी।
- पायलट पे्राजेक्ट के तौर पर दो जगह कैमरे लगाने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया था।

पूर्व सैनिक करते सुरक्षा
- सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से सेवानिवृत सैनिकों को नियुक्त किया जाना था।
- प्रत्येक चेकनाके पर सुरक्षा की जिम्मेदारी पूर्व सैनिकों के हवाले रखी जाने का निश्चय किया गया था।
- पूर्व सैनिकों के चेकनाकों पर नियुक्त किए जाने से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लग सकता था।
- सीसीटीवी कैमरों के जरिए ओवरलोड की चेकिंग होती और सैनिकों द्वारा दस्तावेज चेक किए जाने का प्लान था।
एक नजर में खनिज परिवहन
- बिलौआ से 1500, बिजौली से 400 गिट्टी के ट्रक हैं।
- डबरा-भितरवार क्षेत्र में बह रही सिंध नदी से 500 डंपर और 300 ट्रॉली रेत निकल रहा है।
- चैतगांव, मछंड आदि घाटीगांव के राजस्व क्षेत्र में नकली रेत बनाकर शहर में खपाई जा रही है।
- घाटीगांव के वन क्षेत्र से अवैध उत्खनन करके 25 से 30 ट्रॉली सफेद पत्थर हर दिन शहर में लाया जा रहा है।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

कोरोना: शनिवार रात्री से शुरू हुआ 30 घंटे का जन अनुशासन कफ्र्यूशाहरुख खान को अपना बेटा मानने वाले दिलीप कुमार की 6800 करोड़ की संपत्ति पर अब इस शख्स का हैं अधिकारजब 57 की उम्र में सनी देओल ने मचाई सनसनी, 38 साल छोटी एक्ट्रेस के साथ किए थे बोल्ड सीनMaruti Alto हुई टॉप 5 की लिस्ट से बाहर! इस कार पर देश ने दिखाया भरोसा, कम कीमत में देती है 32Km का माइलेज़UP School News: छुट्टियाँ खत्म यूपी में 17 जनवरी से खुलेंगे स्कूल! मैनेजमेंट बच्चों को स्कूल आने के लिए नहीं कर सकता बाध्यअब वायरल फ्लू का रूप लेने लगा कोरोना, रिकवरी के दिन भी घटेCM गहलोत ने लापरवाही करने वालों को चेताया, ओमिक्रॉन को हल्के में नहीं लें2022 का पहला ग्रहण 4 राशि वालों की जिंदगी में लाएगा बड़े बदलाव
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.