UPSC SELECTION: शहर के युवाओं ने फहराया परचम

UPSC SELECTION: शहर के युवाओं ने फहराया परचम

मंगलवार की शाम को यूपीएससी-2015 का  फायनल रिज्लट घोषित किया गया हैं। जिसमें ग्वालियर शहर के स्टूडेंट्स ने सफलता हासिल की है।


ग्वालियर। मंगलवार की शाम को यूपीएससी-2015 का  फायनल रिज्लट घोषित किया गया हैं। जिसमें ग्वालियर शहर के स्टूडेंट्स ने सफलता हासिल की है। यूपीएससी-प्री का एग्जाम 23 अगस्त 2015 को हुआ था। यूपीएससी के मेंस एग्जाम 18 दिसंबर 2015 तक हुए थे। पूरे भारत से इस परीक्षा में 1078 स्टूडेट्स शामिल हुऐ थे। मध्यप्रदेश के कुल 13 स्टूडेंट्स का सिलेक्सन यूपीएससी 2015 में हुआ है। जिनमें से 3 तीन होनहार ग्वालियर के हैं। ग्वालियर शहर के अंकित खण्डेलवाल, उत्कर्ष मिश्रा व श्रीलेखा श्रोत्रीय का सेलेक्शन हुआ है।

जानिए सफलता की कहानी उन्हीं की जुवानी

अंकित खण्डेलवाल- Rank- 192


                        
शहर के विष्षु खण्डेलवाल और सुषमा खण्डेलवाल के सुपुत्र अंकित खण्डेलवाल मुरार क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होने बताया की पहले मैने इंदौर से बी.ई कंप्लीट किया। पिछले चार साल से में यूपीएसी की तैयारी कर रहा हूं। अब  मुझे सफलता मिली हैं। दो बार में साक्षात्कार तक पहुंच चुका हूं।

ये रहा सक्सेस मंत्र
तैयारी करने के दौरान मैं बहुत कम बार अपने घर आया। दिल्ली मे रह कर ही सारी तैयारी की। खुद में आत्मविश्वास बनायें रखने के लिए हर रोज सुबह शाम अपनी मां से फोन पर बात कर लेता था।

श्रीलेखा श्रोत्रीय- Rank 307
अशोक कॉलोनी खासगी बाजार में श्रीलेखा श्रोत्रीय का घर है। घर से बाहर न जाकर श्रीलेखा ने ग्वालियर में रहकर ही परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। तैयारी करने के लिए श्रीलेखा ने अपनी जॉब भी छोड़ दी। हर रोज ८-१० घण्टे की पढ़ाई की। श्रीलेखा के सिलेक्सन  होने में उनके परिवार की अहम भूमिका रही हैा परिवार का पूरा सर्पोट व हेल्प से ही ये पॉसिबिल हो पाया। 

श्रीलेखा ने कहा - कि वे जनता के अधिकार दिलाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहेगीं। प्रशासनिक सेवा से जुड़े एग्जाम की तैयारी करने वालों को मोटिवेट करेंगी।

उत्कर्ष मिश्रा- Rank 553
आपको जानकर खुशी होगी की यूपीएससी में सिलेक्ट हुए श्रीलेखा व उत्कर्ष कजिंस हैं। उत्कर्ष भी खासगी बाजार में रहते हैं। उनका कहा की मुझे यह सफसता चौथे प्रयास में मिली है। पहले में प्रसार भारती में कार्यरत था। जॉब के साथ पढ़ाई का तालमेल नहीं बैठ पा रहा था। इसलिए मैने जॉब को छोड़कर पढ़ाई पर फॉकस किया। जिसकी बजह से ही मुझे यह सफलता मिली है। उत्कर्ष के पिता सत्यकुमार और मां नलिनी मिश्रा अपने बेटे की सफलता पर बहुत खुश हैं। 
                             
उत्कर्ष ने बताया की एग्जाम काफी टफ रहा जिसके लिए उन्होने टाइम मैनेजमेंट कर के तैयारी की। कई चीजों का त्याग भी किया। जिसके बाद ही उन्हे ये सफलता हाथ लगी है।

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