कैंसर के इलाज के लिए करता था हथियारों की तस्करी, मास्टर माइंड के खुलासों से चौंक गई ग्वालियर पुलिस

Gaurav Sen

Publish: Feb, 15 2018 09:49:34 AM (IST) | Updated: Feb, 15 2018 10:27:08 AM (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
कैंसर के इलाज के लिए करता था हथियारों की तस्करी, मास्टर माइंड के खुलासों से चौंक गई ग्वालियर पुलिस

आमखो बस स्टैंड पर उतर कर भिण्ड की बस में बैठते वक्त पुलिस ने उन्हें लिफ्ट किया। तस्करी का मास्टरमाइंड कैंसर का मरीज है।

ग्वालियर। गुंडे, बदमाशों को पिस्टल, रिवाल्वर सप्लाई करने वाली गैंग के दो गुर्गे १२ देसी पिस्टल की खेप के साथ पकड़े गए। दोनों बड़वानी से पिस्टल बनवाकर भिण्ड जा रहे थे। आमखो बस स्टैंड पर उतर कर भिण्ड की बस में बैठते वक्त पुलिस ने उन्हें लिफ्ट किया। तस्करी का मास्टरमाइंड कैंसर का मरीज है। वह इलाज के लिए पैसों जुटाने अवैध हथियारों की डिलेवरी करता है। वह दो बार हथियारों की खेप लाकर खपा चुका है।

 

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पुलिस के मुताबिक तकिया मोहल्ला, गोहद निवासी मनोज कुमार श्रीवास्तव बड़वानी से अवैध हथियारों की खेप भिण्ड में सप्लाई कर रहा है। मुखबिर ने टिप में बताया मनोज के साथ सिमार गांव का सुरेश बघेल भी है। दोनों इंदौर बस से हथियारों की खेप लेकर आ रहे हैं। उन्हें राउंडअप करने पुलिस सुबह आमखो बस अड्डे पर खड़ी हो गई। दोपहर करीब १२.३० बजे दोनों तस्कर बैग लेकर उतरे उनके बैग की तलाशी ली तो मनोज के बैग में ६ पिस्टल और ६ कारतूस और सुरेश के बैग में ६ पिस्टल सात कारतूस मिले। उन्होंने बताया तारौली गांव मौ, निवासी महेंन्द्र पंडित कारोबार का सरगना है।

 

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उसने हथियारों की डिमांड की थी। बड़वानी में जोरसिंह सरदार को पिस्टल बनाने का ऑर्डर दिया था। दो दिन पहले जोर सिंह ने फोन पर कहा था सामान तैयार है ले जाओ, तो दोनों डिलेवरी लेने गए थे। मनोज ने बताया पहले भी दो बार जोर सिंह से हथियार बनवा कर महेन्द्र के जरिए भिण्ड में खपा चुके हैं। दोनों को कोर्ट पेश कर एक दिन की रिमांड पर लिया है।

 

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ज्यादा डिमांड पिस्टल की
तस्कर मनोज और सुरेश ने खुलासा किया भिण्ड में कई जगह कट्टे, तमंचे बनाने का धंधा है लेकिन यहां आधुनिक हथियारों की डिमांड बढ़ी है। महेन्द्र के कई गुर्गे बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर से देसी पिस्टल बनवाकर यहां खपा रहे हैं। जोर सिंह सरदार से करीब ५ हजार रुपए में पिस्टल खरीद कर करीब १० से १२ हजार रुपए में बेचता है। बड़वानी से हथियारों की एक बार खेप लाकर सप्लाई करने में करीब ४० हजार रुपए का मुनाफा होता है।


सुरक्षा में खामी से तस्करी आसान
तस्करों ने खुलासा किया बस से तस्करी करना कम जोखिम भरा रहता है, ट्रेन में तो पुलिसकर्मी राउंड पर आते हैं, लेकिन बस में पुलिस चेकिंग का झंझट नहीं रहता। इसलिए हर बार बस से हथियार की खेप लेकर आए हैं। बडवानी से ग्वालियर तक बस के सफर में कहीं पुलिस नहीं मिली। दोनों ने बताया फिर भी बस में चढऩे के बाद दोनों बैग अपनी सीट से काफी दूर रख दिए थे। वहीं से उन पर नजर रखकर सफर तय किया।

 

चुनाव में खपत
दोनों तस्करों ने पुलिस को बताया चुनाव के वक्त अवैध हथियारों की डिमांड बढ़ जाती है। उस वक्त पुलिस भी अलर्ट रहती है इसलिए कई गैंग अभी से अवैध हथियारों का जखीरा इक_ा कर रहे हैं। तस्करों ने पुलिस को हथियारों के अवैध धंधे से जुडे कई तस्करों और बिचौलियों की जानकारी पुलिस को मुहैया कराई है।


इलाज के लिए तस्करी का धंधा
पुलिस के मुताबिक तस्कर मनोज श्रीवास्तव बता रहा है कि तस्करी के धंधे में मोटा मुनाफा होता है। उसे मुंह का कैंसर है। इलाज के लिए हथियारों की तस्करी कर रहा है।


होगा खुलासा
हथियार तस्करों ने कई खुलासे किए हैं, तस्करों के पकड़े जाने पर कारोबार का सरगना फरार हो गया है। उसके पकड़े जाने पर खुलासा होगा कि अवैध हथियारों की खेप किस मकसद से मंगाई गई थी।
डॉ. आशीष एसपी ग्वालियर

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