सरकारी अस्पताल में मरीज किसके भरोसे...

सरकारी अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए केन्द्र से लेकर राज्य सरकार ने कई योजना लागू की हैं। इसके अलावा अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थित के लिए कार्रवाई तक करने निर्देश तक दे डाले हैं। बावजूद इसके मरीजों को अस्पताल में चक्कर काटना पड़ता है।

ग्वालियर. शहर में जयारोग्य अस्पताल के बाद जिला अस्पताल सबसे बड़ा अस्पताल है, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं को देखकर लगा ही नहीं कि यह जिला अस्पताल है। अस्पताल के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं इसके बावजूद यहां मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि मरीजों को इलाज के लिए कई बार चक्कर लगाना पड़ते हैं फिर भी चिकित्सक नहीं मिल पाते हैं। पत्रिका की टीम ने अस्पताल में पाया कि ओपीडी केवल एक चिकित्सक बैठा था, जबकि मरीजों की संख्या डॉक्टर के इंतजार में लंबी लगी थी। इनमें से कई मरीज तो परेशान होकर घर ही लौट गए।

मुरार में जिला अस्पताल में ओपीडी में चिकित्सक नहीं आते। एक दो चिकित्सक ही यहां मौजूद रहते हैं। शनिवार को भी यहां कुछ यही हाल था। चिकित्सक के नाम पर सिर्फ एक डॉक्टर मौजूद था। सुबह 8 बजे से ओपीडी शुरू होती है,लेकिन यहां 10.30 बजे भी सभी डॉक्टर नहीं पहुंचे थे। जिसके कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह हाल सिर्फ एक दिन का नहीं है यहां अक्सर यही हाल रहते हैं इसके बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। शहर से करीब 45 किमी दूर से पति के साथ आईं मोतीबाई ने बताया कि उनके कमर में दर्द है और वह दो दिन से आ रही हैं लेकिन चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं। जिसके कारण उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही गोसीपुरा से आए खेमराज के अनुसार वह भी दो दिन से लगातार आ रहे हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। जिसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है।

नहीं होती कार्रवाई

जिला अस्पताल में चिकित्सक मनमानी करते हैं। ओपीडी में अधिकांश डॉक्टर बैठते ही नहीं है। यहां पदस्थ डॉक्टर ओटी में ऑपरेशन की होड़ करते हैं। यही कारण है कि ओपीडी में ड्यूटी होने के बावजूद ओटी में ऑपरेशन करते हैं। अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं करते, जबकि इसको लेकर कई बार मरीजों ने शिकायत की है यहां तक कि विधायक मुन्नालाल गोयल ने भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। इसका असर स्वास्थय विभाग के अधिकारियों पर नहीं हुआ।

-ओपीडी के लिए रोस्टर बनाया गया है। उसके अनुसार ही डॉक्टर ओपीडी में ड्यूटी पर रहते हैं। अगर कोई अनुपस्थित रहता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. वीके गुप्ता, सिविल सर्जन

राजेश श्रीवास्तव
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