नशा बेचने वालों पर कंट्रोल क्यों नहीं?

पब्लिक अगर अलर्ट रहेगी तो न तो रोजमर्रा की जिदंगी में कई समस्याओं का समाधान खुद ही हो सकता है। वर्तमान समय में यातायात, नशा, महिलाओं के साथ अपराध की शिकायतें पुलिस के सामने आती हैं।

ग्वालियर. पुलिस पर तो रोज उंगली उठाती हैं, लेकिन लोगों यह समझना चाहिए कि अगर लोग जागरुक हो जाएं तो तमाम समस्याओं का समाधान हो सकता है। पब्लिक अगर अलर्ट रहेगी तो न तो रोजमर्रा की जिदंगी में कई समस्याओं का समाधान खुद ही हो सकता है। वर्तमान समय में यातायात, नशा, महिलाओं के साथ अपराध की शिकायतें पुलिस के सामने आती हैं। इन पर कंट्रोल करने के लिए प्रयास भी लगातार किए जाते हैं। सब ठीक चलता है तो लोग इसे सामान्य मानते हैं, लेकिन जब कहीं बात बिगड़ती है तो ठीकरा पुलिस, प्रशासन के सिर फोड़ा जाता है। इसमें सुधार की भी जरुरत है। यह भी देखना चाहिए कि जो समस्या पैदा हुई है उसमें अगर आम लोगों का सहयोग मिले तो उसे किस हद तक दूर कर किया जा सकता है।
-उपनगर ग्वालियर में बड़ी समस्या यातायात है, इसका ठोस समाधान नहीं हो सका है। खासकर किलागेट से लोहामंडी का रास्ता तो लगभग जाम की हालत में ही रहता है। इसे लेकर कोई प्लान क्यों नहीं बनाया जा सका है?
-यह इलाका पुराने ग्वालियर शहर का हिस्सा है, यहां सडक़ें शहर के दूसरे इलाकों की तुलना में संकरी हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ऐसा कोई इंतजाम नहीं है जिससे लोगों को मुकाम तक पहुंचने का सुमचित साधन हो। ऑटो, टेंपो ही आने-जाने का जरिया हैं। किलागेट का यह हिस्सा भी यातायात के इन साधनों की आवाजाही से व्यस्त रहता है। हालांकि इस पर कंट्रोल के लिए रोज शाम को करीब तीन घंटे चौराहे पर पुलिस का चेकिंग प्वाइंट लगाया जाता है। जिससे जाम की स्थिति नहीं बने और लोग सलीके से वाहन चलाएं।
- नशा कारोबार पर कंट्रोल पुलिस के लिए बडा टॉस्क है,उपनगर ग्वालियर में भी नशा बेचने वाले सक्रिय हैं। इन पर पूरी तरह कंट्रोल क्यों नहीं हो सका है?
- पुलिस का फोकस नशे का इस्तेमाल करने वालों ज्यादा बेचने वालों पर होता है।जहां नशा बिकता है वहां रहने वाले अगर पुलिस को जानकारियां दें तो नशा कारोबार पर कार्रवाई जल्दी और ज्यादा हो सकती हैं।
- पुलिस कार्रवाई भी करती है उसके बावजूद उस पर आरोप भी लगते हैं। खामी कार्रवाई में है या तरीके में?
- पुलिस का काम थैंकलेस है। जब तक सब ठीक चल रहा है तो इसे सामान्य माना जाता है, जब कोई बात बढ़ी तो उसमें लोग सीधे पुलिस, प्रशासन पर उंगली उठाते हैं। पब्लिक को यह भी समझना चाहिए कि समाज को सुधारने में उनकी भी भूमिका है।

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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