scriptWomen will get special grant for setting up new industries | नए उद्योग स्थापित करने पर महिलाओं को मिलेगी विशेष ग्रांट | Patrika News

नए उद्योग स्थापित करने पर महिलाओं को मिलेगी विशेष ग्रांट

- दस से पचास करोड़ के निवेश पर मिलेगी एमएसएमइ नीति की रियायतें, नियम भी होंगे सरल
- एमएसएमई को उनके भुगतान से संबंधित शिकायतों का समाधान करने मध्यप्रदेश एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल का गठन
- प्रदेश सरकार ने 13 अगस्त से नई एमएसएमई नीति पूरे प्रदेश में लागू की, प्रदेश के लघु उद्यमियों को बढ़ावा देगी नई उद्योग नीति

ग्वालियर

Published: August 22, 2021 11:17:03 am

ग्वालियर. प्रदेश सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश एमएसएमइ विकास नीति 2021 तथा मध्यप्रदेश एमएसएमइ प्रोत्साहन योजना 2021 लागू कर दी है। इसके अंतर्गत उद्योगों में यंत्र और संयंत्र में दस से पचास करोड़ तक के निवेश को लघु एवं सूक्ष्म मध्यम उद्योग के दायरे में शामिल किया गया है। सरकार ने 13 अगस्त से नई एमएसएमइ नीति को लागू कर दिया है। इसमें उद्योगों को मिलने वाली रियायतें और भूमि आवंटन ऑनलाइन होगा। खास बात यह है कि नई नीति में उद्योगों के प्रति महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए उन्हें विशेष अनुदान (ग्रांट) दी गई है। सरकार प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट और फार्मास्यूटीकल सेक्टर के क्लस्टर बनाना चाहती है, इसलिए इन सभी सेक्टर को सरकार ने नई नीति में कुछ रियायतें प्रदान की हैं।
नए उद्योग स्थापित करने पर महिलाओं को मिलेगी विशेष ग्रांट
नए उद्योग स्थापित करने पर महिलाओं को मिलेगी विशेष ग्रांट
दस करोड़ के निवेश पर ये मिलेगा अनुदान
- नई औद्योगिक यूनिट को संयंत्र, मशीनरी और भवन में किए गए निवेश का 40 फीसदी उद्योग विकास अनुदान के रूप में चार समान वार्षिक किश्तों में प्रदान किया जाएगा। इसमें भवन की लागत, संयंत्र और मशीनरी की लागत की 100 फीसदी तक सीमित होगी।
- महिला उद्यमी या अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमी को स्थापित इकाई के लिए प्रतिवर्ष 2 फीसदी चार वर्ष तक या अजा-अजजा श्रेणी की महिला उद्यमी को प्रतिवर्ष 2.5 फीसदी चार वर्षों तक अतिरिक्त उद्योग विकास अनुदान मिलेगा।
- औद्योगिक इकाइयों के 50 फीसदी से अधिक वार्षिक निर्यात करने पर चार वर्ष तक 12 फीसदी अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
- संयंत्र एवं मशीनरी में 25 लाख रुपए तक का निवेश करने वाली इकाई के आइएसओ/बीआइएस/बीइइ प्रमाण पत्र लेने पर 5 लाख रुपए का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
- निर्यात के लिए गुणवत्ता प्रमाण-पत्र लेने पर 25 लाख रुपए का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
- एमएसएमइ इकाई के पेटेंट लेने पर 5 लाख रुपए का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
- निजी या अविकसित शासकीय भूमि में स्थापित नई इकाई को उसके परिसर तक अधोसंरचना विकास (सडक़, बिजली एवं पानी) में किए गए खर्च का 50 फीसदी दिया जाएगा।
- प्रदूषण दूर करने के लिए इकाई की ओर से अपशिष्ट उपचार संयंत्र (इटीपी) लगाने पर 50 फीसदी अनुदान मिलेगा। 10 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली इकाई को अनुदान की रकम एक करोड़ रुपए होगी।
- निजी सेक्टर में औद्योगिक क्षेत्र/बहुमंजिला औद्योगिक परिसर बनाने पर 50 फीसदी अनुदान मिलेगा।
- यदि कोई इकाई ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए एनर्जी ऑडिट कराती है तो ऑडिट की लागत का 50 फीसदी और ऑडिट में सुझाए गए उपकरणों को अपनाने के व्यय का 5 लाख रुपए अनुदान मिलेगा।
इन सेक्टर के लिए विशेष पैकेज
- रेडीमेड गारमेंट सेक्टर में न्यूनतम 25 कर्मचारी होने पर प्रत्येक कर्मचारी जो मध्यप्रदेश के स्थायी निवासी है, उनके वेतन का 25 फीसदी अधिकतम 2500 रुपए प्रतिमाह 5 वर्ष तक वेतन अनुदान दिया जाएगा।
- रेडीमेट गारमेंट सेक्टर में स्टॉम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज और विद्युत ड्यूटी भी सरकार वहन करेगी।
- फार्मास्यूटिकल इकाई के लिए उद्योग विकास अनुदान भवन की लागत, संयंत्र और मशीनरी की लागत की 200 फीसदी तक सीमित होगी।
- 20 एचपी तक की क्षमता वाली पॉवरलूम इकाई लगाने पर विद्युत प्रदाय में डेढ़ रुपए प्रति यूनिट सब्सिडी मिलेगी।
- खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने पर 50 फीसदी या पांच वर्ष की अवधि के लिए मंडी शुल्क से छूट मिलेगी।
- 25 करोड़ से अधिक निवेश वाली टेक्सटाइल यूनिट लगाने पर 5 वर्ष तक 5 फीसदी अनुदान मिलेगा।
नई उद्योग नीति से ये होंगे फायदे
- अधिक से अधिक महिला उद्यमी उद्योग लगाने के लिए प्रेरित होंगी।
- प्रदेश में निर्यात आधारित इकाइयों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
- प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।
- प्रदेश के उद्योगों में होने वाले उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
- उद्योगों का बिजली का खर्च कम होगा और दूसरे प्रदेश के उद्योगों से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
- निजी उद्योग क्षेत्र और अविकसित शासकीय भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
52 जिलों को लाभ मिलेगा
पीएम नरेन्द्र मोदी का सपना आत्म निर्भर भारत का है। सबसे बड़ी समस्या रोजगार के अवसरों की है, इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में अधिक से अधिक नए उद्योगों को लाना चाहते हैं। नई नीति को ऐसा तैयार किया है जिससे प्रदेश के 52 जिलों को लाभ मिल सकेगा। ये नीति अगले ढ़ाई वर्ष में प्रदेश के उद्योगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है
- ओमप्रकाश सखलेचा, एमएसएमइ मंत्री, मध्यप्रदेश शासन
औद्योगिक विकास गति पकड़ेगा
ये प्रदेश सरकार की स्वागत योग्य नीति है, जो पूर्व की कई विसंगतियों को दूर करती है। यह हमारे आसपास के राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात से भी बेहतर नीति प्रतीत होगी। मेरा मानना है कि इससे न केवल प्रदेश का औद्योगिक विकास गति पकड़ेगा बल्कि अन्य राज्यों के उद्यमी भाी यहां उद्योग लगाने के लिए आएंगे। इसमें उद्योग जगत की अधिकांश मांगों और सुझावों का समावेश कर लिया गया है।
- आशीष वैश्य, जोनल चेयरमेन, सीआइआइ

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