scriptWrestling was fond of, father got his hair cut when he beat him to sin | पहलवानी का था शौक, पिता गाने के लिए पीटते तो बाल ही कटवा दिए | Patrika News

पहलवानी का था शौक, पिता गाने के लिए पीटते तो बाल ही कटवा दिए

सूफी गायक पद्मश्री उस्ताद पूरन चंद वडाली एवं लखविंदर वडाली से बातचीत....

ग्वालियर

Published: December 25, 2021 12:29:14 am

ग्वालियर.

मुझे पहलवानी का शौक था, लेकिन पिता (ठाकुरदास, गायक) चाहते थे कि मैं भी गायक बनूं। वे जबरदस्ती करते थे। कभी कभी तो मेरे बाल पकडकऱ पीटते थे। इसीलिए मैंने बाल कटवा दिए थे, लेकिन बाद में समझ आई सो उनसे गाना सीखा। पटियाला घराने के पंडित दुर्गादास जी को गुरू बनाया, उनसे भी सीखा वो सबके सामने है। यह कहना है पद्मश्री उस्ताद पूरन चंद वडाली का। वे तानसेन समारोह की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘गमक’ में शामिल होने शुक्रवार को ग्वालियर आए। सूफी गायकी के सरताज पद्मश्री उस्ताद पूरन चंद वडाली और उनके सुपुत्र लखविंदर वडाली शनिवार को सूफी गीतों की प्रस्तुति देंगे। पूरन चंद वडाली के कई गीत बॉलीवुड में धूम मचा चुके हैं।
पहलवानी का था शौक, पिता गाने के लिए पीटते तो बाल ही कटवा दिए
पहलवानी का था शौक, पिता गाने के लिए पीटते तो बाल ही कटवा दिए
मेले में गाने आए थे हम दोनों भाई, अब साथ नहीं प्यारे
पूरन चंद वडाली ने बताया कि मैं अपने छोटे भाई प्यारेलाल को बहुत मिस करता हूं। कुछ साल पहले हम दोनों ग्वालियर मेले में गाने आए थे। अब वो साथ नहीं है। पुरानी यादें ताजा करते हुए वे कहते हैं कि प्यारे मुझसे 13 साल छोटा था। मैंने ही उसे तैयार किया, फिर साथ-साथ ही गाने लगे। अब तो बस यादें ही रह गईं हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मियां तानसेन तो संगीत सम्राट थे, सुरों के बादशाह और कलंदर थे, हम तो उस महान हस्ती की पैरों की धूल भी नहीं। ये क्या कम खुशनसीबी है कि उनकी बारगाह में गाने का मौका मिला है।
हम किसी प्लानिंग या योजना से नहीं गाते
लखविंदर सिंह ने कहा कि मैं अपने चाचा की जगह तो कभी नहीं ले सकता, लेकिन अपना अच्छा देने का प्रयास हर मंच पर करता हूं। उन्होंने बताया कि हम दोनों किसी प्लानिंग या योजना से नहीं गाते, मंच पर पहुंचने के बाद अपने आप ही गीत आते जाते हैं और हम गाते जाते हैं।
हमारी भी वर्षों की तमन्ना थी, जो आज पूरी होगी
लखविंदर कहते हंै कि सूफी गायकी हमारी परंपरा है। अपने पिता के साथ मैं इसे आगे बढ़ा रहा हूं। आज के दौर में बाबा बुल्लेशाह बाबा फरीद सुल्तान बाहु बारिस शाह जैसे सूफियों द्वारा जलाई गई अमन की जोत को सहेजकर रखने की जरूरत है, हमारे देश की भी इसकी जरूरत है। पिता-पुत्र ने कहा कि हर कलाकार की चाहत होती है इस पवित्र जगह आने और गाने की। हमारी भी वर्षों से यहां आने की तमन्ना थी, जो अब पूरी हो रही है।

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