तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है...

मेला रंगमंच पर गीतों की महफ़िल सजी

ग्वालियर। व्यापार मेला रंगमंच पर पुराने फिल्मी गीतों की महफ़िल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रविवार रात कला मंदिर में जॉइंट्स ग्रुप ऑफ ग्वालियर तथा गायक कलाकार मित्र समूह ने संयुक्त रूप से संगीत निशा 'ये शाम मस्तानी' का आयोजन किया।
आरंभ में मेला संचालकद्वय शील खत्री व मेहबूब भाई चेनवाले, राजेंद्र शर्मा, आनंद मिश्रा आदि ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। गीतों की इस महफ़िल में मेला उपाध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल, चेम्बर के पूर्व मानसेवी सचिव भूपेंद्र जैन आदि भी मौजूद थे। संगीत निशा की शुरुआत अतुल राजावत ने 'मेरे मेहबूब कयामत होगी...' से की। इसके बाद सुरेश घोड़के ने 'छलकाए जाम...', बबलू भोंसले ने ' तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है...', उत्कर्ष चौधरी ने 'राफ्ता-राफ्ता आंख मेरी लड़ी है...', स्वाति परमार एवं राजेंद्र भोजकर ने 'दिल की ये आरजू है...', 'सुनील सिंह मुंबई व नंदा पाटनी ने 'हुस्न पहाड़ों का...', पदमाकर खंडालकर ने 'पलभर के लिए कोई हमें प्यार कर ले...', रौनित चौहान ने गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं...' गीतों की प्रस्तुतियां दीं। इस संगीत निशा में 30 गायकों ने मशहूर पुराने फिल्मी गानों से अपनी आवाज का जादू बिखेरा। इस अवसर पर जॉइंटस अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष संदीप अग्रवाल आदि उपस्थित थे। संचालन अनुराधा घोड़के ने किया। आभार शरद गौतम ने माना।

राजेंद्र ठाकुर Desk
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