हिंदी भाषा को मजबूत बनाने युवाओं को आना होगा आगे

आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में हिंदी भाषा साहित्य पर व्याख्यान

 

By: Mahesh Gupta

Published: 16 Sep 2021, 11:39 AM IST

ग्वालियर.

आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के स्कूल ऑफ साइंस विभाग की ओर से ‘हिंदी भाषा साहित्य और पत्रकारिता का योगदान’ विषय पर व्याख्यान हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजरानी शर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक रहीं। व्याख्यान का शुभारंभ आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर के कुलपति डॉ. एसएस भाकर ने किया। डॉ. राजरानी शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानी, देशभक्त, साहित्यकार और नेता कभी अलग नहीं थे। सभी को हिंदी भाषा ने एकता के सूत्र में बांधे रखा। उस समय निराला जी का जागो फिर एक बार, राष्ट्र के प्रति जागरुकता फैलाना था। उस समय के उपन्यास कर्म भूमि, गोदान, कफन सभी राष्ट्रवादी थे।

बोलचाल से लेकर इंटरनेट तक में हिंदी का प्रयोग करें
डॉ. राजरानी ने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई में गांधीजी ने भी सभी बेलगांव की सभा में बोला था कि हम स्वराज की बात करते हैं, पर अंग्रेजी में सब काम क्यों? उन्होंने कहा कि आज मैं भी आप सभी से यह बात कहना चाहती हूं कि हम भारतीय है, फिर अंग्रेजी क्यों नहीं त्याग सकते। हम क्यों अपनी प्यारी और स्वरों से सुस्वज्जित भाषा हिंदी का उपयोग नहीं करते। भारत विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन हम हिंदी का उपयोग क्यों नहीं करते। जिस तरह चाइना ने अपनी मातृभाषा को पहचान दी है। उसी तरह आप युवाओं को आगे आकर आपनी मातृभाषा हिंदी को पहचान दिलानी होगी। आम बोलचाल से लेकर इंटरनेट की दुनिया तक में सभी कार्य हिंदी में करने होंगे, तभी हमारा हिंदी दिवस का यह उद्देश्य सार्थक होगा।

हिंदी को अपने दिल में सम्मान दो फिर दुनिया में पहचान दो
कुलपित डॉ. एसएस भाकर ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया था कि हिंदी भारत की राजभाषा होगी। उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाए जाने का ऐलान किया था और पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। तब से लेकर हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। लेकिन आज आवश्यक्ता है तो हिंदी भाषा के संरक्षण की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में लगभग 500 मिलियन से भी अधिक लोगों द्वारा हिन्दी भाषा का प्रयोग किया जाता है और यह सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। आभार डॉ. रेखा वशिष्ठ ने व्यक्त किया।

Mahesh Gupta
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