किसानों पर प्राकृतिक आपदा, भयानक सूखे की दस्तक ने तोड़ी कमर

Ruchi Sharma

Publish: Sep, 17 2017 03:54:24 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
किसानों पर प्राकृतिक आपदा, भयानक सूखे की दस्तक ने तोड़ी कमर

किसानों पर प्राकृतिक आपदा, भयानक सूखे की दस्तक ने तोड़ी कमर

हमीरपुर. देश में बुलेट ट्रेन की आधारशिला के साथ उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में सूखे की जबरदस्त दस्तक से किसानों में हाहाकार मच गया है। इस इलाके में समय से बारिश न होने से खरीफ की फसल नहीं बोई गई थी और अब रवि की फसल में भी सूखे का ग्रहण लग गया है। सभी खेत खाली पड़े है। हालात इतने खराब है कि खेतों में चारा तक नहीं है, सूखे खेतों में धूल उड़ रही है, जिससे किसानों के सामने भुखमरी, पलायन और खुदखुशी के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है।


सूखे पड़े इन खाली खेतों को देखिए इस वक्त इन खेतों में तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग, मसूर की फसले लहलहाती थी पर इस साल बरसात ने इन फसलों को ठेंगा दिखा दिया है। खाली पड़े खेत देख कर किसानों का कलेजा दहल रहे है उनके सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गयी है।

समय पर वर्षा न होने से जहां खरीफ की फसल नहीं बोई जा सकी थी तो, वही अब रवि की फसल बोई जानी है, लेकिन बरसात का कही कोई ठिकाना ही नहीं है लोग बारिश की उम्मीद छोड़ चुके है। ऐसे में गेंहू, चना, लाही, अलसी आदि की फसल खत्म हो गयी है। लोगों का कहना है कि इस सदी का सब से भयानक सूखा है जिससे आने वाले समय में हाहाकार मच जाएगा।

इस भयानक सूखे से पूरे बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों महोबा, बांदा, चित्रकूट, जालौन, झांसी, ललितपुर अौर हमीरपुर जिलों में किसानों की हालत बहुत खराब है।

बरसात ना होने से सिर्फ खेत ही खाली नहीं पड़े है बल्कि इस पूरे इलाके में नदियां, तालाब और कुएं भी सूखे पड़े है। जिससे चारे पानी के आभाव में जानवरों के मरने का भी सिलसिला शुरू हो गया है। रोज दर्जनों जानवर भूख प्यास की वजह से दम तोड़ रहे है। जानवरों के साथ-साथ किसानों की मौतों का सिलसिला भी नहीं थम रहा है।


पानी ना बरसने के बावजूद कुछ किसानों ने भगवान भरोसे अपने खेतों में फसल बो तो ली थी पर वर्षा न होने से उनमें दाना ही नहीं पड़ा और उस फसल को अन्ना जानवर चट कर गए है। इस साल की दोनों फसल नष्ट हो जाने से अब किसानों को कुछ समझ नहीं आ रहा कि उनकी जिंदगी अब कैसे कटेगी। क्योंकि कर्ज माफी के नाम पर सरकार ने उन्हें दस, बीस रुपयों का कर्ज माफ करने से छले गये किसानों का दर्द आप खुद सुन सकते है।


बुंदेलखंड में जल वायु परिवर्तन के कारण साल दर साल सुखा और अतिवृष्टि का शिकार होती कृषि के क्षेत्र से किसानों का मोह भंग होता देखा जा रहा है। वर्तमान में ऐसा देखने को मिल रहा है कि कृषि को अनुपयोगी खेती समझ कर किसान पलायन कर रहे है। जिसमें कृषि विकास को गति नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र में बारिस की स्थिति लगातार साल दर साल गिरती जा रही है। पिछली रबी की फसल के दौरान बेमौसम बारिश और तूफान ने पकी फसल को बर्बाद कर दिया। अब जब किसानों की खड़ी फसल को पानी की जरूरत है तो सूखे बादल यहां किसानों को मुंह चिढ़ा रहे है। बारिश के आंकड़े जिला कृषि अधिकारी ने हमें दिए वह चौंकाने वाले है।

2005 से 2015 सितम्बर तक में हुई बारिश के आकड़ें

वर्ष          बारिश

2005     704.30
2006     795.42
2007     578.80
2008    569.90
2005    1190.03
2010    672.42
2011     908.03
2012    796.41
2013    1027.22
2014    433.12
2015    315.37
20 16   51. 18
2017    20.12

यानि कि पचास प्रतिशत से काम बारिश हुई है, जिले के आला अधिकारी भी मान रहे है कि कम बारिश से हालात खराब हुए है, खेतों का सर्वे कराया जा रहा कि कितना नुकसान हुआ है। 

 

बुंदेलखंड के किसानों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले बारह सालों से यहां कभी सूखा अभी भारी बारिश और कभी बाढ़ से किसान तबाह और बर्बाद होते रहे है। अब इस साल सदी के सब से बड़े सूखे ने यहां दस्तक दे दी है।जिससे एक बार फिर बुंदेलखंड की तकदीर में बर्बादी, तबाही, भुखमरी की लकीरे साफ दिखाई पड़ रही है।

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