गणेश चतुर्थी पर भी नहीं बिक रहीं गणेश की मूर्तियां, भुखमरी की कगार पर मूर्तिकार

मूर्तिकारों के दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है और उनका परिवार दाने दाने को मोहताज हो चुका है।

By: Mahendra Pratap

Updated: 24 Aug 2020, 06:04 PM IST

हमीरपुर. कोरोना महामारी के बीच प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा की तस्वीर आप सभी ने देखी होंगी लेकिन अब मूर्तिकारों के परिवार में भी भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है। कोरोना के चलते सारे तीज और त्योहार को मनाने के लिये प्रशासन ने रोक लगा रखी है। चाहे वो नवरात्रि का पर्व हो या गणेश चतुर्थी के पर्व हो। मूर्तिकारों के बनाई गई मूर्तियां उनके गोदामों में खड़ी धूल फांक रही है और उनको बनाने में उनका सारा पैसा और मेहनत बर्बाद हो चुकी है। अब गणेश चतुर्थी का पर्व होने के बावजूद गणेश जी की इक्का दुक्का ही मूर्तियों ही बिक रही हैं। मूर्तिकारों के दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है और उनका परिवार दाने दाने को मोहताज हो चुका है। देखिये एक हमीरपुर से एक खास रिपोर्ट....

कोरोना काल मे धरी रह गई मूर्तिकार की कारीगरी। जरा गौर से देखिये इन कारीगरों को जो मूर्ति में रंग भरकर अपने जीवन को रंगीन सपने के साथ संजोने का सपना देखते थे और प्रत्येक साल यह कारीगर साल भर इंतजार करके अपने परिवार को मूर्ति बेचकर भरण पोषण करते थे अब कोरोना काल उनके जीवकोपार्जन के लिए काल बनकर आया है जिससे अब उनके सपने चूर चूर हो गए है, क्योंकि नवरात्रि व गणेश पूजा में मूर्ति रखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और अब इन मूर्तिकारों की मूर्तियां बिकनी बंद हो गई है जिससे अब यह परिवार भूखमरी की कगार में पहुंच जाएगा।

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