हनुमान जी की मूर्ति से बह निकली रक्त की धारा, तब से ही...

हनुमान जी की मूर्ति से बह निकली रक्त की धारा, तब से ही...
Hanuman Mandir Hamirpur

Shatrudhan Gupta | Publish: Nov, 08 2017 09:54:18 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

प्रसिद्ध हनुमान जी के दर्शन करने के लिए दूर-दराज के भक्त भी आए।

हमीरपुर. इटरा के सुप्रसिद्ध बजरंग बली मंदिर का दो दिवसीय मेला मंगलवार को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ शुरू हो गया। मेले में प्रथम दिन भक्तों ने अल सुबह से ही मंदिर पहुंच कर हनुमान जी का पूजन-अर्चन कर प्रसाद अर्पण किया। संकटमोचन के दर्शन-पूजन को देर रात तक भक्तों की भीड़ रही। इस प्रसिद्ध हनुमान जी के दर्शन करने के लिए दूर-दराज के भक्त भी आए।

150 साल से लग रहा है मेला

इटरा आश्रम की ख्याति जिले के अलावा आसपास के जिलों में है। प्रतिवर्ष यहां पर कार्तिक पूर्णिमा के बाद पडऩे वाले प्रथम मंगलवार से दो दिवसीय मेला शुरू होता है। इस वर्ष भी मंगलवार को दो दिवसीय मेले के साथ मंदिर परिसर में चौबीस घंटे का अखण्ड राम नाम संकीर्तन पाठ शुरू हुआ। बुधवार को अखण्ड कीर्तन सम्पन्न होने के बाद भंडारे के साथ मेले का बुधवार को समापन हो गया। लोगों का कहना है कि यह मेला करीब 150 वर्ष पुराना हो चुका है।

मूर्ति से बह निकली रक्त की धारा

इटरा के बजरंग बली आश्रम में पताली हनुमान की मूर्ति विराजमान है। मान्यता है कि यह मूर्ति कभी जंगल में एक निर्जन स्थान पर एक चरवाहे को दिखी थी। इसकी जानकारी उसने चन्द्रपुरवा गांव के लोगों को दी। गांव वालों ने जमीदार परिवार को अवगत कराया। सैकड़ों ग्रामीण जंगल में उस स्थान पर गए, जहां चरवाहे ने यह दुर्लभ प्रतिमा देखी थी। जमीदार ने मूर्ति कों खोदकर बाहर निकालने की बात कही, लेकिन जैसे ही फावड़ा कुदाल का उपयोग किया गया, वैसे ही मूर्ति से रक्त की धारा बह निकली। यह देख ग्रामीण दंग रह गए। उन्होंने उसी स्थान पर मंदिर बनवाने का फैसला किया।

जंगल में ही बनवाया मंदिर

ग्रामीणों ने जंगल को साफ सुथरा करके उसी स्थान पर पूजन अर्चन शुरू कर दिया। बाद में इस स्थान की ख्याति दिन प्रतिदिन बढऩे लगी। प्रतिमा के दर्शन मात्र से लोगों की इच्छा पूर्ण होने लगी। भीड़ देख गांव के जमीदार ने मूर्ति के आसपास की कई बीघे की जमीन मंदिर के नाम कर दी। बाद में कस्बा के लालमन सेठ ने यहां पर मंदिर बनवाया था। चन्द्रपुरवा बुजुर्ग के लोगों का कहना है कि यह मेला करीब 150 वर्ष पुराना हो चुका है। यहां पर माथा टेकने वाले भक्तों की ज्यादातर मुराद पूरी होती है। बताते हैं कि पूर्व में इस पाताली मूर्ति का स्पर्श करके लोग पूजन अर्चन करते थे, लेकिन अब ये प्रक्रिया मंदिर के महंत बलराम दास महाराज ने बन्द कराकर मूर्ति के चारो तरफ बैरीकेडिंग करावा दी है।

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