मंत्री को रेड कार्पेट पसंद है, छोड़ना नहीं चाहते वीवीआईपी कल्चर

उत्तरप्रदेश के राज्य मंत्री व भाजपा के मंत्री , सांसद और विधायक वीवीआईपी कल्चर छोड़ने को तैयार नही हैं।

By: आलोक पाण्डेय

Published: 11 Sep 2017, 08:39 PM IST

हमीरपुर, आज जिले में ऋण माफी योजना के ऋण मोचक प्रमाण पत्र बाँटने आए प्रदेश के राज्य मंत्री व भाजपा के मंत्री , सांसद और विधायक वीवीआईपी कल्चर छोड़ने को तैयार नही हैं। हमीरपुर के प्रभारी मंत्री मनोहर लाल पंत उर्फ मन्नू कोरी का कार्यक्रम में रेड कार्पेट का जमकर  इस्तेमाल हुआ जिसमें हमीरपुर सांसद पुष्पेंद्र सिंह चन्देल, राठ विधायक मनीषा अनुरागी व प्रभारी मंत्री मनोहर लाल पंत सीना चौड़ा कर के प्रतिबंधित रेड कार्पेट का इस्तेमाल करते हुए नजर आए। हालांकि वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी ने वीवीआईपी सम्मान के प्रतीक लाल कार्पेट का उपगोग कोई मंत्री , सांसद, विधायक नही करेगा लेकिन मुख्यमंत्री के आदेश की जम कर धज्जियां उड़ाते दिखे मंत्री, सांसद और विधायक|

उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शासन सत्ता पर पहुंची भाजपा सरकार ने आते ही बड़े बड़े दावे किए थे। वीवीआईपी चलन को पूर्णतया समाप्त करने जैसे लाल नीली बत्तियों व रेड कार्पेट का चलन खत्म करने जैसे आदेश जारी किए गए पर हुआ क्या आज भी उसी भाजपा पार्टी के ज़िम्मेदार लोग प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे है। जब इस सम्बन्ध में जिले के ज़िम्मेदार अधिकारियों से बात करनी चाही तो इन को अपनी गलती का एहसास हुआ पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से मना कर दिया।

 एडीएम ने मंत्री की चापलूसी  के लिए की सारी हदें पार 

उत्तर प्रदेश में किसानों के ऋण माफ़ी प्रमाण पत्र वितरण के लिए जनपद भर से किसानों को जिला मुख्यालय में एकित्रत करने के लिए और इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने वह काम कर दिया जिसकी आपने उम्मीद भी न की होगी| इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए और मंत्री जी को खुश करने के लिए ज़िले के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया और सभी स्कूल की बसों के द्वारा कोने-कोने से किसानों को मुख्यालय लाया गया| जब प्रभारी जिलाधिकारी से स्कूलों को बंद कर के बसों को किसानों को ढोने के लिए लगाए जाने के बारे में बात की तो वो मुँह छिपा कर भागने लगे। और कैमरे के सामने कुछ भी नही बोला और वहां से तुरन्त अपनी गाड़ी में बैठ कर कार्यक्रम स्थल से निकल गए।

सिर्फ प्रभारी मंत्री को खुश करने के लिए प्रशासन ने सभी स्कूल कालेजो को बंद कर उनकी बसों को किसानों को ढोने के लिए लगा देने से बच्चो को एक दिन की पढ़ाई से वंचित होना पड़ा, लेकिन प्रशासन को इससे कोई लेना देना नही है| सवाल ये उठता है कि  क्या कार्यक्रम के लिए जिले भर के स्कूलों की छूट्टी करना और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना ज़िम्मेदार प्रभारी जिलाधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल का ये फैसला सही था। जब इस बात का पता बच्चों के अभिवावकों को चला तो उनमें भी खासी नारजगी देखने को मिली।

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आलोक पाण्डेय
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