गड़बड़झाले की जांच करने जयपुर से आई टीम

तय मापदंडों की अनदेखी कर जिले में खाद्य सुरक्षा का गेहूं बांटने के मामले की जांच करने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, जयपुर की टीम गुरुवार को हनुमानगढ़ पहुंची। जांच दल में शामिल अधिकारियों ने टिब्बी क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर जाकर डिपो के रिकॉर्ड वगैरह खंगाले।

By: pawan uppal

Published: 14 Jul 2017, 07:45 AM IST

तय मापदंडों की अनदेखी कर जिले में खाद्य सुरक्षा का गेहूं बांटने के मामले की जांच करने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, जयपुर की टीम गुरुवार को हनुमानगढ़ पहुंची। जांच दल में शामिल अधिकारियों ने टिब्बी क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर जाकर  डिपो के रिकॉर्ड वगैरह खंगाले। ऑनलाइन वितरण व अन्य दस्तावेजों का मिलान किया। जांच टीम में डीएसओ सतर्कता डालचंद खटीक, प्रवर्तन अधिकारी राजेन्द्र गुरसर सहित कई जने शामिल हैं। 



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गौरतलब है कि जिले में ऑनलाइन सूची, राशन डिपो होल्डर के पास सूची तथा नगर परिषद व नगर पालिका की ओर से जारी सूची में अंतर होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया था कि जिले में तय मापदंडों के तहत पात्र नहीं होने के बावजूद मनमर्जी की सूची का उपयोग कर गेहूं बांटा जा रहा है। इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच के लिए सात टीम गठित कर करीब 47 हजार लोगों का नाम सूची से हटवाया, जो पात्रता की शर्तें पूरी नहीं कर रहे थे। 


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जयपुर से आया जांच दल गलत ढंग से गेहूं वितरण की पड़ताल कर संबंधित की जिम्मेदारी तय करेगा। इसके बाद उनसे गेहूं या उसके बराबर रकम की वसूली की कवायद शुरू होगी। साथ ही संबंंधित के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी। जानकारी के अनुसार जयपुर से आए जांच दल ने पहले दिन टिब्बी तहसील में गेहूं घोटाले की जांच की। इससे पहले डीएसओ कार्यालय से टिब्बी तहसील के लिए जारी गेहूं व पात्र व्यक्तियों की सूची हासिल की। इसके बाद कम्प्यूटर पर अब तक आवंटित गेहूं व  वितरण का मिलान किया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को शिकायत मिली थी कि पीलीबंगा और टिब्बी तहसील में गेहूं के वितरण के मामले मेें भारी गड़बड़ी हुई है। हालांकि यह टीम फिलहाल टिब्बी तहसील में हुए गेहूं घोटाले की जांच करेगी। 

उठाया था मुद्दा

उल्लेखनीय है कि पत्रिका में 09 जनवरी 2017 में 'हुकूमत का फरमान, राशन लेना है तो छीनो दूसरे का हक शीर्षक से समाचार प्रकाशन के बाद जिम्मेदार हरकत में आए और अलग-अलग टीमें गठित कर अपात्रों के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की। लंबा वक्त तक जांच कार्य जारी रहने के बाद 10 जुलाई 2017 को टीम ने रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी। अपात्रों का नाम हटाने के बाद अब पात्र लोगों के नाम प्राथमिकता से जोडऩे का काम शुरू किया जाएगा। ताकि योजना का सही लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा सके। जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में दुरुस्त सूची तैयार करने को गठित टीम ने जो रिपोर्ट दी है, उसमें सर्वाधिक गलत नाम पीलीबंगा में 14114 दर्ज थे। जबकि संगरिया में 3839, हनुमानगढ़ में 12768, नोहर में 2650, भादरा में 7580, रावतसर में 7932 व टिब्बी में 2695 गलत नाम दर्ज थे।



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 उक्त सभी नाम बिना सक्षम अधिकारी के ऑनलाइन सूची में शामिल हो गए थे। सूची से इन नामों को बाहर कर दिया गया है। बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के दर्ज ऑनलाइन नामों की छंटनी का काम पूरा कर उनको अपात्र माना गया। वर्ष 2013 व 2015 की सर्वे सूची को आधार मानकर अपात्र परिवारों का नाम हटाया गया। कई नाम तो ऐसे थे जो कम्प्यूटर ऑपरेटर ने अपने स्तर पर ही जोड़ दिए। 

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