‘ग्राम सेवा’ की जगह खुद की थाली में ‘मेवा’ परोस रहे व्यवस्थापक

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हनुमानगढ़. गांवों में सहकारिता का माहौल बनाकर किसानों के जीवन को खुशहाल बनाने के मकसद से जिले में २१५ ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन किया गया। लेकिन अब कुछ व्यवस्थापक ग्राम सेवा की बजाय खुद की थाली में मेवा परोसने में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जिले की स्थिति यह है कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण कई व्यवस्थापक मनमर्जी कर करोड़ों रुपए डकार रहे हैं।

 

‘ग्राम सेवा’ की जगह खुद की थाली में ‘मेवा’ परोस रहे व्यवस्थापक
-नियमों को ताक पर रख व्यवस्थापक डकार रहे करोड़ों
-जिले की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में लगातार सामने आ रहे गबन के मामले
हनुमानगढ़. गांवों में सहकारिता का माहौल बनाकर किसानों के जीवन को खुशहाल बनाने के मकसद से जिले में २१५ ग्राम सेवा सहकारी समितियों का गठन किया गया। लेकिन अब कुछ व्यवस्थापक ग्राम सेवा की बजाय खुद की थाली में मेवा परोसने में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जिले की स्थिति यह है कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण कई व्यवस्थापक मनमर्जी कर करोड़ों रुपए डकार रहे हैं। सूबे की २१५ ग्राम सेवा सहकारी समितियों में ६८ तो ऐसी हैं जिनके व्यवस्थापक वार्षिक निरीक्षण के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन को रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह भी है कि बिना ऑडिट करवाए ही केंद्रीय सहकारी बैंक निरंतर रूप से इन समितियों से करोड़ों रुपए का लेनदेन जारी रखे हुए है। बैंक व समितियों में गड़बड़ी की बात करें तो हाल के पांच बरसों में ४० से अधिक सहकारी समितियों में अनियमितता की शिकायतें आ चुकी है। इनमें जिला व राज्य स्तर पर कार्रवाई चल रही है। लगातार समितियों में आ रहे गबन की शिकायतों के बाद अब केंद्रीय सहकारी बैंक के अधिकारी निरीक्षण नहीं करवाने वाली समितियों से सख्ती से निपटने की तैयारी में हैं। इसके तहत बैंक के प्रबंध निदेशक ने सभी वरिष्ठ प्रबंधक से लेकर ऋण पर्यवेक्षकों को लंबित निरीक्षण वाली समितियों के खिलाफ राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम २००१ की धारा ३१ (२) के तहत कार्रवाई करने के लिए पाबंद किया है।
इसके अलावा रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने में लापरवाही बरतने वाले व्यवस्थापकों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर संबंधित ग्राम सेवा सहकारी समिति के संचालक मंडल को निर्देशित किया है। बैंक के वर्तमान एमडी का कहना है कि पहले जो एमडी रहे हैं, उन्होंने किसान हितों को देखते हुए समितियों से लेनदेन में शिथिलता दे दी थी। इसके तहत किसानों को फसली ऋण वितरण किया जा रहा है। लेकिन अब निर्धारित समय में यदि निरीक्षण के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता है तो हम नियमानुसार उन ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

यहां हद हो गई
जिले में एक समिति तो ऐसी है, जहां पर आठ बरसों में एक बार भी बैंक निरीक्षण नहीं हुआ है। वहीं कई समितियां ऐसी है जिनका गत तीन बरस से अधिक समय से निरीक्षण नहीं हुआ। इनमें संबंधित समिति के व्यवस्थापक रिकॉर्ड देने में लगातार आनकानी कर रहे हैं। तीन बरस से अधिक समय से बकाया निरीक्षण वाली समितियों में अराईयांवाली, गुरुसर, मेहरवाला, चाइयां, मेघाना, टिडियासर, कलाना, छानीबड़ी, साहूवाला, जबरासर, सिरंगसर आदि शामिल हैं। इनमें साहूवाला समिति तो ऐसी है, जहां निरीक्षण आठ वर्ष से बकाया चल रहा है। तीन वर्ष से बकाया समितियों में सागडा, मेहराना, झांसल मलखेड़ा, खुईयां, पांडूसर, २२ एजी, न्यांगल, जंडवाला सिखान, लीलावाली, खाराखेड़ा, ढाणी अराईयान, बिरकाली, दलपतपुरा आदर्श फेफाना, ललानाबास, पदमपुरा श्योदानपुरा, धौलीपाल, डबलीराठान, डबली कुतुब, रोडावाली, टिब्बी, उज्जलबास, किराड़ाबड़ा शामिल है। दो वर्ष से बकाया निरीक्षण वाली समितियों में रणजीतपुरा, मैनावाली, चार सीवाईएम, चार डब्ल्यूएम, रावतसर, सात डीडब्ल्यूडी, भोमपुरा, मैरुसरी, खोडा, मोधूनगर, डबली खुर्द, खेदासरी, नुकेरा, फतेहपुर, ढाबां, हरिपुरा, भाखरावाली, जसाना, मलवानी, रामसरा, श्योरानी, डबली पीसीएम, मक्कासर, जोड़किया, गाहड़, खचवाना, भरवाना, ढाणी नेहरावाली, कुंजी, निनाण, मंदरपुरा, धानसिया आदि शामिल हैं।

यूं लगा रहे चपत
जिन सहकारी समितियों की गत वर्ष जांच करवाई गई, उनमें वित्तीय गड़बड़ी का आरोप था। इसमें खाद-बीज विक्रय में स्टॉक में हेरफेर, निर्धारित वेतनमान से अधिक वेतन भुगतान, कैश बैलेंस में कमी, एफडी राशि बैंक के खाते में जमा नहीं करवाना आदि शामिल है। हाल ही में झाम्बर व अमरपुरा थेहड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति में व्यवस्थापक की ओर से की गई करीब दो करोड़ की हेराफेरी का मामला गर्माया हुआ है। इन दोनों समितियों में गड़बडिय़ों का खुलासा कुछ जागरूक ग्रामीणों की वजह से हो पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन की अनदेखी के चलते समितियों में व्यवस्थापक व अध्यक्ष मिलकर मनमानी कर रहे हैं।

चूना लगाकर चल बसे
सहकारिता के क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपए की चपत लगाने का खेल बरसों से चल रहा है। सहकारिता क्षेत्र में गबन व अनियमितता के दो आरोपियों ने आत्महत्या कर ली। इसमें पल्लू सहकारी बैंक में करीब सवा दो करोड़ के गबन मामले में आरोपित एक प्रबंधक व व्यवस्थापक शामिल है। आधा दशक पहले पल्लू में फर्जी दस्तावेजों से ऋण वितरण करके बैंक को करीब सवा दो करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप था। जांच के बाद आरोपितों से अधिकांश राशि हालांकि वसूली करवा ली गई।

......फैक्ट फाइल......
-हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक की साख सीमा कुल १५०० करोड़ है।
- बैंक से एक लाख ४००० ऋणी किसान जुड़े हुए हैं।
-वर्तमान में ६८ ग्राम सेवा सहकारी समितियां ऐसी हैं, जहां पर दो से आठ वर्ष के बीच में निरीक्षण नहीं हुआ है।
-रबी सीजन वर्ष २०१९-२० में केंद्रीय सहकारी बैंक हनुमानगढ़ को २३० करोड़ का फसली ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया था, इनमें २१५ करोड़ का ऋण वितरित किया जा चुका है।
...........वर्जन...........
निरीक्षण को पाबंद
....फोटो......
पहले बिना निरीक्षण वाली समितियों की ओर से ऋण वितरण कार्य करने पर रोक लगा दी गई थी। परंतु मेरे से पहले जिन एमडी के पास चार्ज था, उन्होंने किसान हितों को देखते हुए निरीक्षण से वंचित समितियों में ऋण वितरण कार्य में शिथिलता प्रदान कर दी थी। इसे मैंने भी जारी रखा है। हमारा प्रयास है कि सभी समितियों का निरीक्षण करवा लेंवे। हाल ही में मैंने वरिष्ठ प्रबंधक से लेकर ऋण पर्यवेक्षकों को लंबित निरीक्षण वाली समितियों के खिलाफ राजस्थान सहकारी सोसायटी अधिनियम २००१ की धारा ३१ (२) के तहत कार्रवाई करने के लिए पाबंद किया है।
दीपक कुक्कड़, प्रबंध निदेशक, केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड, हनुमानगढ़

Purushottam Jha Reporting
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