शहर में शामिल होकर गांव से बदतर जन सुविधाओं की हालत, बरसों से खमियाजा भुगत रहा खुंजा

शहर में शामिल होकर गांव से बदतर जन सुविधाओं की हालत, बरसों से खमियाजा भुगत रहा खुंजा

Adrish Khan | Publish: Mar, 17 2019 12:01:59 PM (IST) Hanumangarh, Hanumangarh, Rajasthan, India

शहर में शामिल होकर गांव से बदतर जन सुविधाओं की हालत, बरसों से खमियाजा भुगत रहा खुंजा
- तीन दशक से अधिक समय से नहीं मिल रहा भवन
- शहरी क्षेत्र में आने बाद और बढ़ी अनदेखी
- सब सेंटर को भवन नहीं, शहरी पीएचसी मिली नहीं
हनुमानगढ़. बरसों से सब सेंटर के लिए भवन उपलब्ध नहीं है। शहरी पीएचसी वहां मंजूर नहीं की गई। स्वास्थ्य केन्द्र को ना देकर पंचायत भवन में लाइब्रेरी बना दी गई। बरसों पहले ग्राम पंचायत से नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किए गए खुंजा इलाके की सेहत की अनदेखी की जा रही है। शहरी क्षेत्र में शामिल होने के कारण बरसों पहले मंजूर सब सेंटर को आज तक उप स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत नहीं किया गया है। और जब शहरी पीएचसी खोलने की बात आई तो खुंजा को भुला दिया गया। जंक्शन बस स्टैंड, सुरेशिया और नई आबादी में शहरी पीएचसी खोल दी गई, जहां से नजदीकी सरकारी अस्पताल की दूरी दो किलोमीटर से भी कम है।
मगर खुंजा इलाके से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की दूरी चार से पांच किलोमीटर तक है। उप स्वास्थ्य केन्द्र में जो एएनएम का पद मंजूर है, उसे भवन के अभाव में आंगनबाड़ी से कामकाज करना पड़ रहा है। जाहिर है कि स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर खुंजा में केवल खानापूर्ति ही की जा रही है। स्वास्थ्य केन्द्र को क्रमोन्नत करने या नया अस्पताल खोलने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। शहरी क्षेत्र में आने के बाद चिकित्सा विभाग भी खुंजा के उप स्वास्थ्य केन्द्र अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहा।
शहरी के बाद भी नहीं सुविधा
जानकारी के अनुसार वर्ष १९९४ से पहले खुंजा ग्राम पंचायत थी। जिला बनने के बाद इसे शहरी क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। खुंजा में ग्राम पंचायत के समय से ही उप स्वास्थ्य केन्द्र मंजूर था जो पंचायत भवन में चल रहा था। शहरी क्षेत्र में आने के बाद भी खुंजा के लोगों को सेहत के नाम पर कोई सुविधा नहीं मिली बल्कि स्वास्थ्य केन्द्र के लिए भवन का टोटा पड़ गया। इसके लिए बरसों से अलग भवन बनाने की मांग की जा रही है। उप स्वास्थ्य केन्द्र का अलग भवन बनने के बाद वहां लेबर रूम का संचालन भी किया जा सकता है। यद्यपि तीन दशक से अधिक समय पुराना सब सेंटर होने तथा कैचमेंट एरिया की बढ़ती आबादी के बावजूद इसे अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत नहीं किया गया है। रही-सही कसर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र योजना में शामिल कर पूरी कर दी गई है। वर्ष २०१५-१६ में राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्र में पीएचसी खोलने की योजना शुरू की थी। इसके तहत हनुमानगढ़ शहरी क्षेत्र में तीन पीएचसी मंजूर हुई थी। इनमें से सुरेशिया व नई आबादी में नई पीएचसी खोल दी गई। जबकि जंक्शन बस स्टैंड के पास संचालित राजकीय डिस्पेंसरी को शहरी पीएचसी का रूप देकर खानापूर्ति कर ली गई। जबकि यह तो पहले ही संचालित थी। तीसरी पीएचसी खुंजा में खोली जा सकती थी।
सेहत की अनदेखी
आबादी के लिहाज से खुंजा बड़ा इलाका है। इसके बावजूद स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर यहां स्थिति खराब है। बरसों पहले मंजूर सब सेंटर का अपना भवन तक नहीं है। इसे क्रमोन्नत करने में भी अनदेखी की जा रही है। - एडवोकेट मोहम्मद मुश्ताक जोईया।
तो मिले राहत
खुंजा इलाके में चिकित्सा सुविधा का अभाव है। यहां से नजदीक के सरकारी अस्पताल की दूरी भी चार से पांच किलोमीटर है। सब सेंटर की पीएचसी में क्रमोन्नति से लोगों को काफी राहत मिल सकती है। - मनोज बड़सीवाल।
क्रमोन्नति का प्रयास
जमीन संबंधी दिक्कत के कारण भवन के लिए बजट नहीं मिला। क्रमोन्नति आदि को लेकर भी पहले मुख्यालय स्तर पर बातचीत कर प्रयास किया गया था। - डॉ. अरुण चमडिय़ा, सीएमएचओ।

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