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हनुमानगढ़

विश्वविद्यालय के कुलपति बोले, नई शिक्षा नीति के जरिए युवाओं को मानसिक गुलामी से बाहर निकालने का प्रयास

हनुमानगढ़. महाराष्ट्र में पहले से ही कुलपति को कुलगुरु के नाम से संबोधित किया जाता रहा है। राजस्थान में अब इसे अपनाया गया है। यह अच्छा निर्णय है।

हनुमानगढ़Jul 11, 2024 / 08:29 pm

Purushottam Jha

विश्वविद्यालय के कुलपति बोले, नई शिक्षा नीति के जरिए युवाओं को मानसिक गुलामी से बाहर निकालने का प्रयास

विश्वविद्यालय के कुलपति बोले, नई शिक्षा नीति के जरिए युवाओं को मानसिक गुलामी से बाहर निकालने का प्रयास

हनुमानगढ़. महाराष्ट्र में पहले से ही कुलपति को कुलगुरु के नाम से संबोधित किया जाता रहा है। राजस्थान में अब इसे अपनाया गया है। यह अच्छा निर्णय है। यह बात महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि हमारी पुरातन व्यवस्था में जहां दस हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं, उसे गुरुकुल व उसके प्रभारी को कुलगुरु के नाम से जाना जाता है। परंतु करीब 200 वर्ष पहले यह व्यवस्था भंग हो गई थी। इसे अब विभिन्न राज्य अपना रहे हैं, यह अच्छा संकेत है। नई शिक्षा नीति के बारे में उन्होंने बताया कि इसके जरिए युवाओं को मानसिक गुलामी से बाहर निकालने का प्रयास है। कोई विद्यार्थी अब जितना भी पढ़ेगा, वह व्यर्थ नहीं जाएगा। क्रेडिट बैंक में उसकी ओर से प्राप्त अंक हमेशा के लिए उसके खाते में जमा होंगे। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि आज बॉटनी का विद्यार्थी भी पेड़ को नुकसान पहुंचा रहा है। यह ठीक नहीं है। इसका मतलब उसे वनस्पति से प्यार नहीं है। ऐसी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए ही नई नीति लागू की गई है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ का साथ लेकर विश्वविद्यालय अब गांवों का विकास करने की योजना बना रही है। इसमें हर कॉलेज अब एक गांव को गोद लेकर उसे विकसित करेगा। इसमें फंडिंग यूनिसेफ करेगा। विकसित राजस्थान बनाने में यह काफी मददगार साबित होगा। इस मौके पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक राजाराम चोयल, निजी कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण विजय, आशीष विजय, रौनक विजय, परमानंद सैनी, डॉ. विशाल पारीक, मनोज शर्मा सहित, राजकीय एनएम पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामपाल अहरोदिया, शिक्षाविद् डॉ. संतोष राजपुरोहित, डॉ. श्यामसुंदर शर्मा, सागरमल लड्ढ़ा आदि मौजूद रहे।
पौधे को पेड़ बनाने के बाद ही डिग्री देने का प्रस्ताव
ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पर चर्चा करते हुए वीसी मनोज दीक्षित ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हम अधिक से अधिक पौधे लगाकर युवा पीढ़ी को इसकी अहमियत समझा सकें। इसी क्रम में एक विद्यार्थी एक पौधा लगाने की मुहिम शुरू की गई है। युवाओं ने इसे गंभीरता से लिया तो विश्वविद्यालय में अध्ययनरत करीब पांच लाख विद्यार्थी एक-एक पौधा लगाकर भी इसे तैयार करेंगे तो पांच लाख पौधे तैयार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विषय की परीक्षा अभी हर जगह होती है। बेहतर होगा, स्नातक व अन्य कक्षा के विद्यार्थियों को प्रवेश के समय ही एक पौधा लगाकर उसे संभालने का टॉस्क दे दिया जाए। जब वह कॉलेज पूरी करके बाहर जाएगा तब तक पौधे पेड़ बन चुके होंगे। उसकी डिग्री में इसके अंक भी जोड़े जाएं। इससे अच्छी परीक्षा और परिणाम क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमने इस संबंध में प्रस्ताव बनाया है। सबकी सहमति से इसे लागू करने का प्रयास रहेगा।
इंटर्नशिप के माक्र्स खूब बढ़ेंगे
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा को व्यवहारिक बनाने के लिए इंटर्नशिप के माक्र्स आगे और बढ़ाने की तैयारी चल रही है। ताकि विद्यार्थी को जमीनी ज्ञान अधिक से अधिक मिल सके। उन्होंने शिक्षा में शासन के अधिक हस्तक्षेप को उचित नहीं बताया।
शिक्षकों का मानदेय अब दोगुना
विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में कॉपी जांचने वाले शिक्षकों का मानदेय अब दोगुना कर दिया गया है। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। कुलपति ने कहा कि इससे शिक्षकों को आर्थिक संबल मिलेगा। लंबे समय से शिक्षक इसकी मांग कर रहे थे। इसके अलावा खेल और शारीरिक शिक्षा से जुड़े शिक्षण कार्य भी शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से लेकर 2020 तक के परीक्षा परिणामों का अध्ययन करने के बाद नई शिक्षा नीति पर काम शुरू किया गया है। राजस्थान ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है।
सेमेस्टर सिस्टम लागू
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहाकि यूनिवर्सिटी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत ग्रेजुएशन और पीजी कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। परीक्षा पैटर्न में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। कुलपति ने कहाकि खुशी है कि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की ओर से उठाए गए कदम का राजस्थान के कई विश्वविद्यालयों ने फॉलो किया है।

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