नहर के पेंदे का निर्माण कार्य जोरों पर,नहरबंदी तक पूरा करने की चुनौति

Rajender pal nikka | Publish: Apr, 13 2019 11:10:24 PM (IST) Sri Ganganagar, Sri Ganganagar, Rajasthan, India

-वहीं सेमग्रस्त गांव सिलवाला खुर्द, मसीतांवाली, डबली खुर्द व डबली कलां तथा मिर्जावाली मेर के किसानों का मामना है कि जब नहर का पानी जमीन में रिसेगा नहीं तो सेम समाप्त हो जाएगी जिससे टिब्बी तहसील के आधा दर्जन गावों के सैंकडो किसानों को फायदा मिलेगा

टिब्बी. इंदिरा गांधी नहर में बंदी के बाद पिछले करीब 18 दिनों से इसकी मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों के पास नहरबंदी समाप्त होने से पूर्व प्रस्तावित कार्यो को पूरा करने की गम्भीर चुनौति है। जिसके कारण ठेकेदार लगातार 24 घण्टे काम करवा कर प्रस्तावित कार्य को पूरा कराने में जुटे हुए है। इंदिरा गांधी फीडर व इंदिरा गांधी मुख्य नहर में कई जगहों पर नहर के पेंदे के निर्माण का कार्य चल रहा है।

निर्माण कार्य में सबसे बड़ी बाधा नहर के पेंदे में पड़ी हजारो टन बरेती है जिसे पिछले 18 दिनों से लगातार नहर से बाहर निकाला जा रहा है। बरेती को एक्सकेवेटर मशीन व ट्रैक्टर ट्रॉलियों से बाहर निकलवाया जा रहा है लेकिन भारी मात्रा में पेंदे में बरेती होने की वजह से इसे 18 दिन बाद भी पूरी तरह से बाहर नही निकाला जा सका है। तथा अभी भी मशीनों से इसे बाहर निकलवाया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी नहरबंदी पूर्ण होने से पूर्व नहर का सारा कार्य पूरा कराने को लेकर आश्वस्त है।

-पटरियों पर बरेती के लगे ढेर

इंदिरा गांधी नहर के पेंदे के नवनिर्माण के दौरान नहर से निकाली जा रही बरेती से नहर की पटरी पर बरेती के बड़े ढेर लग गए है। तथा अभी और भी बरेती नहर से निकाली जा रही है। नहर की पटरी पर बरेती के ढेर लगने से इस पर से होकर आवागमन करने वाले ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं नहर से निकाली गई बरेती पर सम्बंधित ठेकेदार का ही अधिकार होगा जिसे वह अपने स्तर पर बेच सकता है अथवा निस्तारित कर सकता है लेकिन इसके एवज में जलसंसाधन विभाग ने ठेकेदारों से एक निश्चित राशि वसूल की है। नहर के निर्माण कार्य पूरे होने के बाद ठेकेदार नहर की पटरियों पर रखी बरेती को निस्तारित करेगें।

-लाभ हानि के गणित में उलझे किसान,किसान बोले लाभ कम हानि अधिक होगी

टिब्बी तहसील क्षेत्र के खेतों को सिंचित कर आबाद करने वाली इंदिरा गांधी नहर के पेंदे के नवनिर्माण पर किसान लाभ-हानि के गणित में उलझे हुए है। किसानों के लाभ-हानि के गणित में उलझने का मुख्य कारण नहर के पेंदे के निर्माण के दौरान दस एमएम मोटाई की सीमेंटेड परत चढाने से पूर्व उसके नीचे प्लास्टिक की चद्दर बिछाना है। नहर किनारे बसे सूरेवाला, नाइवाला, राठीखेड़ा आदि गावों के किसानों का मानना है कि प्लास्टिक की चद्दर से पानी जमीन में रिस नही पाएगा जिससे भू जल स्तर गिर जाएगा तथा नलकूपों से पानी निकालना मुश्किल हो जाएगा।

वहीं सेमग्रस्त गांव सिलवाला खुर्द, मसीतांवाली, डबली खुर्द व डबली कलां तथा मिर्जावाली मेर के किसानों का मामना है कि जब नहर का पानी जमीन में रिसेगा नहीं तो सेम समाप्त हो जाएगी जिससे टिब्बी तहसील के आधा दर्जन गावों के सैंकडो किसानों को फायदा मिलेगा। किसानों का मानना है कि नहर में प्लास्टिक की चद्दर बिछाने से किसानों को नुकसान कम तथा फायदा अधिक होगा।

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