ग्रामीणों ने जनसहयोग से बनाई श्रीकृष्ण गोशाला

ग्रामीणों ने जनसहयोग से बनाई श्रीकृष्ण गोशाला
ग्रामीणों ने जनसहयोग से बनाई श्रीकृष्ण गोशाला

Manoj Goyal | Updated: 24 Aug 2019, 12:00:55 PM (IST) Hanumangarh, Hanumangarh, Rajasthan, India

- लगन, मेहनत और इच्छाशक्ति का उदाहरण लीलांवाली गोशाला

हनुमानगढ़. कहते हैं जहां चाह होती है, वहां राह निकल आती है। कुछ ऐसा ही हनुमानगढ़ जिले के गांव लीलांवाली में गो सेवकों ने कर दिखाया है। लगभग पांच साल पहले गांव के युवा गो सेवकों ने गांव में निराश्रित घूम रहे गोवंश के लिए चारे-पानी की व्यवस्था के लिए खेळियां बनवाई। जिनमें प्रतिदिन पानी और चारा डाला जाने लगा। लगभग आधा दर्जन स्थानों पर बनाई गई चारे-पानी की खेळियों में प्रतिदिन चारा और पानी जन सहयोग से डाला जाने लगा। यह जन सहयोग बढ़ा तो गो सेवकों ने स्थाई गोशाला बनाने का विचार किया।

गो सेवक और जिला परिषद सदस्य डॉ. अजीत सिंह के अनुसार इस विचार को मूर्त रूप देने में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और गो सेवकों ने तन-तन-धन से सहयोग किया। डॉ. अजीत सिंह के अनुसार इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तत्कालीन विधायक एवं गांव के निवासी कृष्ण कड़वा और गांव के मूल निवासी एवं हनुमानगढ़ टाउन के व्यवसायी, गोसेवक मनोहर लाल बंसल ने। कड़वा और बंसल ने गोशाला के लिए भूमिदान की और आर्थिक सहयोग किया। इसके बाद तो जैसे ग्रामीणों में सहयोग की होड़ लग गई। गोशाला निर्माण के लिए ग्रामीणों ने बढ़-चढ़ कर सहयोग किया। नतीजा यह हुआ कि 23 फरवरी 2017 को गोशाला निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ और चंद ही महीनों में विशाल गोशाला निर्मित हो गई।

गोशाला निर्माण में हर वर्ग का भरपूर सहयोग रहा। इसमें उल्लेखनीय सहयोग गांव के गुरुद्वारा सिंह सभा और उसके सेवादारों का भी रहा। श्रीकृष्ण गोशाला सेवा समिति के सचिव डॉ. अजीत सिंह कहते हैं, गोशाला संचालन में गांव लीलांवाली के हर वर्ग का सहयोग है, इसके साथ ही आसपास के गांवों, चकों का भी आर्थिक सहयोग है। हनुमानगढ़ जंक्शन, टाउन, संगरिया के भी कुछ गो सेवकों का भी निर्माण और संचालन में सहयोग है। वर्तमान में गोशाला लगभग ढाई बीघा में निर्मित है। इसमें पशुओं के लिए छह बाड़े बने हुए हैं। लगभग 55 गुणा 125 फीट आकार का विशाल तूड़ी संग्रह के लिए हॉल बना हुआ है। चारा-तूड़ी लाने और संग्रह करने के लिए गोशाला समिति के पास स्वयं के दो ट्रैक्टर हैं। पानी के लिए सबमर्सिबल पम्प लगा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर भी गोशाला परिसर में निर्मित है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण चारा, तूड़ी इत्यादि का दान करने और श्रमदान करने के लिए गोशाला पहुंचते हैं।

गोशाला के बेहतर संचालन के लिए व्यवसायी बनवारी लाल वर्मा की अध्यक्षता में श्रीकृष्ण गोशाला सेवा समिति का गठन किया हुआ है। इसमें डॉ. अजीत सिंह, कृष्ण नैण, हेतराम सियाग, चोखाराम, रोशन सिंह, जवाहर सिंह गिल, जसप्रीत सिंह सिद्धू, गणेश गिल सहित बड़ी संख्या में सदस्य हैं। गोशाला में आधा दर्जन कर्मियों का स्टाफ भी है। डॉ. अजीत सिंह के अनुसार गोशाला में लगभग पौने तीन सौ छोटे-बड़े गोवंश हैं। यह संख्या निरन्तर बढ़ रही है। गोशाला में बीमार और घायल पशुओं के इलाज की भी व्यवस्था है। डॉ. अजीत सिंह के अनुसार गोशाला की विशेषता यह है कि यह जब से निर्मित हुई है, तब से निरन्तर विकास कार्य चल रहे हैं।

दानदाताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गोशाला संचालन में ईश्वरीय सहयोग है। हर किसी का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इनमें विजय सिंह राजपूत, टेकचंद बंसल, मनोहर लाल बंसल, जरनैल सिंह पुंगवाली का हरे चारे की बिजाई के लिए भूमि का सहयोग महत्वपूर्ण है। विजय सिंह राजपूत गर्मी के तीन महीने प्रतिदिन दस-बारह क्विंटल चारा अपनी तरफ से गोशाला भिजवाते हैं। चारा परिवहन के लिए उन्होंने एक ट्रैक्टर भी गोशाला को दान किया है।

सौर ऊर्जा प्लांट की तैयारी
गोशाला को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सौर ऊर्जा प्लांट गुरुद्वारा सिंह सभा के सहयोग से लगाया जा रहा है। इसके अलावा जनसहयोग से जैविक खाद का प्लांट लगाने की भी योजना है। डॉ. अजीत सिंह के अनुसार गोशाला समिति सदस्यों के सहयोग से गोशाला को भविष्य में आत्मनिर्भर करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया जा सके।

दूसरी मंजिल का विचार
गोशाला में पशुओं के लिए बने बाड़ों की छत आरसीसी की बनाई गई है और उस पर आवागमन के लिए पेड़ी के स्थान पर रैम्प बनाया गया है। डॉ.अजीत सिंह के अनुसार भविष्य में पहली मंजिल पर भी शैड बनाने की योजना है ताकि छोटे बछड़ों को अलग से रखने की व्यवस्था की जा सके।

उदाहरण है गोशाला
जिला गोशाला संचालन समिति के सचिव विजय रौंता एवं हनुमानगढ़ टाउन गोशाला समिति के अध्यक्ष मनोहर लाल बंसल के अनुसार लीलांवाली की गोशाला गो सेवकों के लिए उदाहरण और पे्ररणादायी है। लीलांवाली की गोशाला बहुत कम समय में तैयार हो गई और उसमें बड़ी संख्या में गोवंश की सारसंभाल की जा रही है।

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