नहरी पानी पर संकट बरकरार, बीबीएमबी चैयरमेन ने नहीं साफ की स्थिति

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हनुमानगढ़. भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई। जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए अगले माह के शेयर की स्थिति साफ करने की बात बीबीएमबी चैयरमेन से कही।

 

By: Purushottam Jha

Updated: 16 Jan 2021, 09:47 AM IST

नहरी पानी पर संकट बरकरार, बीबीएमबी चैयरमेन ने नहीं साफ की स्थिति
-मौसम पर निर्भर करेगा इंदिरागांधी नहर के फरवरी के बाद का रेग्यूलेशन
-बैठक में मुख्य अभियंता ने बीबीएमबी चैयरमेन के समक्ष रखा राजस्थान का प्रस्ताव
हनुमानगढ़. भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की बैठक शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई। जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए अगले माह के शेयर की स्थिति साफ करने की बात बीबीएमबी चैयरमेन से कही। इस दौरान बीबीएमबी चैयरमेन ने साफ तौर पर कह दिया कि अभी आगे के शेयर के बारे में कुछ भी बता पाना जल्दबाजी होगी। आगे मावठ की स्थिति क्या रहती है, बांधों में कितनी आवक होती है, इसकी सही गणना करने के बाद ही शेयर के बारे में कोई स्थिति साफ की जा सकेगी।
जानकारी के अनुसार तय अनुबंध के अनुसार चालू वर्ष में राजस्थान का जितना शेयर बनता है, उसके हिसाब से फरवरी माह में पानी खत्म हो जाएगा। फरवरी तक केवल छह बारी पानी का इंतजाम ही अभी राजस्थान के पास है। इस स्थिति में फरवरी के बाद आगे एक बारी यानी सातवीं बारी पानी नहरों में कैसे चलेगा, इसका बंदोबस्त करने में जल संसाधन विभाग के अधिकारी जुटे हुए हैं। इसके तहत जल संसाधन विभाग राजस्थान के शासन सचिव ने बीबीएमबी चैयरमेन को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि फरवरी के बाद राजस्थान की नहरों में पानी कैसे चलेगा, इस बारे में स्थिति साफ करें। मुख्य अभियंता भी इसी मैटर पर बीबीएमबी चैयरमेन से चर्चा करने शुक्रवार को चंडीगढ़ गए थे। सूत्रों के अनुसार बांधों का जल स्तर नीचे ले जाकर राजस्थान की नहरों को रेग्यूलेशन के अनुसार चलाने का आग्रह राज्य सरकार स्तर पर भी बीबीएमबी से किया गया है। परंतु बांधों में आवक की स्थिति नहीं सुधरने के कारण बीबीएमबी अभी कुछ भी स्थिति साफ करने से गुरेज कर रहा है।

२५ प्रतिशत बैटर इनफ्लो माना था
बीते दिनों हनुमानगढ़ में संपन्न जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों व विधायकों ने मिलकर तय शेयर की तुलना में २५ प्रतिशत बैटर इनफ्लो मानते हुए इंदिरागांधी नहर में सात बारी पानी चलाने का रेग्यूलेशन निर्धारित किया था। इसमें मावठ में पानी की आवक होने के आधार पर जनवरी में समीक्षा बैठक बुलाने के बात पर भी सहमति बनी थी। मगर इस समय बांधों के आसपास मावठ काफी कमजोर होने के कारण बांधों में उम्मीद के अनुरूप पानी की आवक नहीं हो रही है। इसके कारण स्थानीय स्तर पर जल परामर्शदात्री समिति की बैठक भी नहीं बुलाई जा रही है।

समझिए पानी का गणित
२१ सितम्बर २०२० को किए गए आंकलन के अनुसार रावी व्यास नदियों के पानी में राजस्थान का डिप्लीशन अवधि में पानी का हिस्सा १७८३९६३ क्यूसेज डेज बनता है। इसमें इंदिरागांधी नहर परियोजना का हिस्सा १३३१८५७ क्यूसेक डेज है। इस उपलब्ध पानी के आधार पर विभाग ने सात बारी पानी का निर्धारण किया गया। इसमें दो बारी पानी यानी 26 सितम्बर से तीस अक्टूबर २०२० तक इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने के बाद बाकी की पांच बारी तीन में एक समूह में चलाने का रेग्यूलेशन पारित किया गया है। इस रेग्यूलेशन के अनुसार नहरों को चलाने के लिए भी कुल १५६१३७५ क्यूसेक डेज पानी की जरूरत है। जाहिर है इस रेग्यूलेशन को प्रभावी बनाने में भी वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए २२९५१८ क्यूसेक डेज पानी की कमी महसूस की जा रही है। अब आवक की स्थिति नहीं सुधरने पर तय रेग्यूलेशन पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।

Purushottam Jha Reporting
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