डीपीआर में 'स्मार्ट सिटीÓ बनाने में पास, धरातल में फेल

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By: Anurag thareja

Published: 10 Apr 2019, 12:15 PM IST

डीपीआर में 'स्मार्ट सिटीÓ बनाने में पास, धरातल में फेल
- न लगी ट्रैफिक लाइट, न बने फुटपाथ
- 2017 के बाद अमृत से नहीं मिला धेला
- अब तक दस करोड़ ही स्वीकृति मिली
हनुमानगढ़. शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के जो ख्वाब दिखाए गए थे वह अधूरे ही रहेंगे। हनुमानगढ़ नगर परिषद ंक्षेत्र में पांच वर्ष में न तो ट्रैफिक लाइट्स पर काम हुआ है और न ही मुख्य सड़कों पर फुटपाथ का। जबकि 2020 तक शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जाना था। गत दो वर्षों से स्मार्ट बनाने वाली योजना की फाइलें भी धूल फांक रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष चुनावों के चलते आचार संहिता में बीत जाएगा। फिलहाल लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगी हुई है, इनके निपटने के दो से तीन माह बाद राजस्थान निर्वाचन आयोग निकाय चुनावों की घोषणा कर देगा। दरअसल, 2015 में हनुमानगढ़ को 'स्मार्ट सिटीÓ बनाने का दावा करते हुए इसे अमृत योजना में शामिल किया था। इसके तहत हनुमानगढ़ नगर परिषद को प्रथम स्तर पर पांच वर्षों में पहले 150 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति दी गई। इसके पश्चात स्वीकृत हुई राशि को रिवाइजड किया गया तो इसमें हनुमानगढ़ में चल रहे आरयूआईडीपी फेज वन के मद्देनजर 66 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट की राशि को कम करने का निर्णय लिया गया। 150 करोड़ की डीपीआर में 60 करोड़ की कटौती कर 90 करोड़ पर अंतिम मुहर लगाई गई थी। योजना के शुरू होने से दो वर्ष के भीतर 2017 अगस्त तक हनुमानगढ़ नगर परिषद को दस करोड़ की राशि से दो बड़े प्रोजेक्ट दिए गए। इनमें साढ़े सात करोड़ रुपए टाउन-जंक्शन मार्ग पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दिए गए। यह प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहा था। इसके अलावा पार्कों को विकसित करने के लिए दस करोड़ की डीपीआर में से ढाई करोड़ रुपए की राशि दी गई। हैरत की बात है इस प्रोजेक्ट में बकाया चल रहे 20 लाख रुपए, इसी मार्च में नगर परिषद को दिए गए। अगस्त 2017 से अब तक अमृत योजना से शेष 80 करोड़ में से नगर परिषद को धेला तक नहीं मिला।
'90 के लिए 16 किए थे खर्चÓ
नगर परिषद ने अमृत योजना से 90 करोड़ रुपए लेने के लिए 16 लाख रुपए खर्च किए थे। इस राशि से नप ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की। इसमें हनुमानगढ़ शहर को 'स्मार्ट सिटीÓ कैसे बनाया जा सकता है। इसका पूरा ब्यौरा व भविष्य का नक्शा दिल्ली की मल्टीनेशनल कंपनी से तैयार करवाया गया था। इस डीपीआर में तो हनुमानगढ़ 'स्मार्ट सिटीÓ बन गई लेकिन 80 करोड़ नहीं मिलने से धरातल पर नहीं बन पाई। यह वजह है कि अब 16 लाख की डीपीआर फाइल अलमारी के एक कौने में पड़ी है।

'गैंगटोकÓ बनाने का था प्रयास
सिक्किम की राजधानी गैंगटोक की तरह दस करोड़ की लागत से शहर के सभी मुख्य मार्गों पर सड़कों के किनारे फुटपाथ व साइकिल ट्रैक का निर्माण होना था। इसके अलावा 10 करोड़ की लागत से दिल्ली की प्रसिद्ध सरोजनी बाजार की तरह मल्टीस्टोरी पार्किंग व 10 करोड़ की लागत से सभी मार्गों पर ट्रैफिक लाइट्स, स्पीड ब्रैकर पर स्टोपर लाइट व सभी सड़कों के किनारे सौर ऊर्जा से संचालित सफेद पट्टी पर लाइटें लगाने का डीपीआर में प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके अलावा 20 करोड़ की लागत से 24 'सिटी बसÓ खरीद कर शहर में ठेके पर चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था ताकि इसके संचालन से लोगों को कम किराए पर बेहतर सफर देने का प्रयास व इससे नगर परिषद को आय होने की भी उम्मीद थी।

पार्कों पर दस करोड़
शहर के 45 वार्डों में करीब 125 पार्कों का सौंदर्यीकरण, फुटपाथ, व सौर ऊर्जा से संचालित फुटपाथ की लाइटें व जिला पार्क आदि पर दस करोड़ रुपए की डिमांड स्वीकृत हुई थी। इसमें से केवल जिला पार्क के लिए ढाई करोड़ की राशि 2017 में स्वीकृति की थी। इसमें से भी 20 लाख रुपए इसी मार्च में नगर परिषद के कोष में जमा हुए हैं। इसी तरह के शहर के ड्रैनेज सिस्टम पर तीस करोड़ रुपए मिलने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह योजना 2020 में खत्म हो जाएगी। अमृत योजना के तहत राशि नहीं मिलने से हनुमानगढ़ में अभी तक न तो गैंगटोक की तरह फुटपाथ बन पाया और न ही दिल्ली की सरोजनीनगर की तरह मल्टीलेवल पार्किंग।

दस करोड़ मिले हैं
हनुमानगढ़ को अमृत योजना के तहत दस करोड़ की राशि मिली है। इसमें से साढ़े सात करोड़ रुपए एसटीपी के लिए व ढाई करोड़ रुपए जिला पार्क के निर्माण के लिए। दोनों प्रोजेक्ट का कार्य पूरा हो चुका है। अन्य प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए बजट देने के लिए नगर परिषद की ओर से राज्य सरकार को पत्र भेजा जा चुका है।
सुभाष बंसल, अधिशासी अभियंता, नगर परिषद

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