बांधों में अच्छी आवक की उम्मीद, अफसोस हमारे किसानों की बजाय पाक के किसानों को मिलेगा इसका लाभ

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हनुमानगढ़. प्रकृति मेहरबान होकर हमारे यहां अपने विविध रंग जरूर बिखेर रही है लेकिन सिस्टम के कुप्रबंधन के कारण हम इसे सहेज नहीं पाते। इसलिए दुश्मन मुल्क पाकिस्तान को इसका सीधा फायदा मिल जाता है।

बांधों में अच्छी आवक की उम्मीद, अफसोस हमारे किसानों की बजाय पाक के किसानों को मिलेगा इसका लाभ
-हमारे पानी से लहलहाएंगे पाकिस्तान के खेत
-बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में इस बार अच्छी बर्फबारी, अप्रैल-मई से पहले बांधों को खाली करने की चुनौती

हनुमानगढ़. प्रकृति मेहरबान होकर हमारे यहां अपने विविध रंग जरूर बिखेर रही है लेकिन सिस्टम के कुप्रबंधन के कारण हम इसे सहेज नहीं पाते। इसलिए दुश्मन मुल्क पाकिस्तान को इसका सीधा फायदा मिल जाता है। स्थिति यह है नदियों का पाक जा रहे पानी को रोकने को लेकर पीएम व सीएम ने कई दावे किए थे। लेकिन यह दावे इस बार धरे रह जाएंगे। क्योंकि आने वाले महीनों में बर्फ पिघलने पर बांधों में इतनी ज्यादा आवक बढऩे की संभावना जताई जा रही है कि इस पानी को निश्चित तौर पर पाकिस्तान क्षेत्र में ही प्रवाहित किया जाएगा। पाक में पानी छोडऩे के अलावा भारत सरकार के पास इस पानी के उपयोग को लेकर अन्य कोई विकल्प ही नहीं है।
इस संबंध में बीबीएमबी चैयरमेन को भी केंद्र सरकार की तरफ से अवगत करवा दिया गया है। इस तरह साफ है कि इस बार हमारे मुल्क के पानी से फिर पाकिस्तान क्षेत्र के खेत लहलहाएंगे। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार देश और प्रदेश में इस बार अच्छी सर्दी पडऩे के साथ ही बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बर्फबारी भी हुई है। इसलिए बांधों में वर्तमान में आवक की स्थिति काफी ठीक हो गई है। आगे अप्रैल-मई में बर्फ पिघलने पर आवक की स्थिति और तेज होने की संभावना में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने भाखड़ा व पौंग बांध में जल प्रबंधन को लेकर अभी से कसरत शुरू कर दी है। इस मुद्दे पर दिल्ली में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक भी हो गई। इसमें राजस्थान, हरियाणा व पंजाब सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वह बांध में भंडारित पानी का अधिकतम उपयोग करने की व्यवस्था करें। ताकि आगे अप्रैल-मई में बर्फ जब पिघलेंगे तो पानी का प्रवाह सुचारू रखा जा सके।

राजस्थान में रहेगी बंदी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार हिमालय व इसके आसपास जो बर्फबारी हुई है, उसकी परत काफी मोटी है। इसलिए अप्रेल-मई में जैसे ही बर्फ पिघलेंगे, बांधों में पानी की खूब आवक होगी। वहीं नहरों की रीलाइनिंग के कारण राजस्थान में अप्रैल-मई में नहरबंदी रहेगी। इसलिए राजस्थान के किसानों को इसका ज्यादा लाभ नहीं मिल पाएगा। इस स्थिति में बांधों का जल स्तर मेनटेन रखने के लिए अप्रैल से पहले बांधों को खाली करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद मित्तल ने बताया कि बांधों का जल स्तर मेनटेन रखने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय स्तर पर बैठक हो चुकी है। इसमें राजस्थान सहित अन्य राज्यों को वर्तमान में भंडारित पानी का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए कहा गया है। हमने अधिकतम शेयर का इंडेंट बीबीएमबी को भेज दिया है।

बातें है, बातों का क्या
किसानों से जुड़े मुद्दे दरअसल नेताओं को चुनाव के वक्त ज्यादा याद आते हैं। बांधों मेें भंडारित पानी को लेकर चुनाव के वक्त इसके प्रबंधन को लेकर कई तरह के प्लान बनाने की बातें नेता कहते रहे हैं। लेकिन ठोस प्लान बनाने में हमारी सरकारें पांच दशक बाद भी खाली हाथ है। हर वर्ष बांधों में सर प्लस पानी की आवक के बाद इसे पाकिस्तान क्षेत्र में प्रवाहित करने के बाद संसद और विधानसभाओं में मुद्दा बनाया जाता है। लेकिन पता नहीं किस शोरगुल में किसानों के मुद्दे गुम हो जाते हैं।

जल स्तर पर नजर
१४ फरवरी २०१९ को भाखड़ा बांध का जल स्तर १६३३ फीट था। जबकि इस वर्ष इस तारीख को इसका लेवल १६२१.१६ फीट है। इसी तरह पौंग का जल स्तर १४ फरवरी २०१९ को १३४७.२४ फीट था, जो इस वर्ष इसी तारीख को १३६४.७६ फीट पर पहुंच गया है। पौंग बांध में सर्वाधिक शेयर राजस्थान का होने के कारण बीबीएमबी इस बांध में भंडारित पानी की तुलना में शेयर से अधिक पानी देने को भी इस वक्त तैयार है। इंदिरागांधी नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर सहित प्रदेश के दस जिलोंं को जलापूर्ति हो रही है।


.....फैक्ट फाइल.....
-राजस्थान क्षेत्र में इंदिरागांधी नहर की लंबाई ४४५ किमी है।
-1958 में इंदिरागांधी फीडर का निर्माण शुरू हुआ था।
-11 अक्टूबर 1961 में राजस्थान में पहली बार इंदिरागांधी नहर की नौरंगदेसर वितरिका में पानी प्रवाहित किया गया था।
-नहरी क्षेत्रों से राज्य में ४००० से ५००० करोड़ का उत्पादन हो रहा है।
-जल समझौते के तहत रावी व्यास के शेयर में राजस्थान का हिस्सा ८.६ एमएफ निर्धारित किया गया था। आज तक ०.६ एमएफ पानी पर विवाद नहीं निपट पाया है।

Purushottam Jha Reporting
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