आंदोलन का डर, किसानों से पहले मुख्य अभियंता कार्यालय पर पुलिस जाब्ता तैनात

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हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन को लेकर किसान नेता और विभागीय अधिकारियों के बीच तकरार थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार से किसानों के प्रस्तावित बेमियादी पड़ाव को लेकर पुलिस महकता सतर्क हो गया है। मुख्य अभियंता कार्यालय के आगे पुलिस का जाब्ता सुबह दस बजे तैनात कर दिया गया था। एएसपी व डीएसपी ने मुख्य अभियंता से जाकर कई देर तक वार्ता की। इसमें पुलिस के अफसरों ने पानी के गणित को समझने का प्रयास किया।

 

आंदोलन का डर, किसानों से पहले मुख्य अभियंता कार्यालय पर पुलिस जाब्ता तैनात
हनुमानगढ़. इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन को लेकर किसान नेता और विभागीय अधिकारियों के बीच तकरार थमने का नाम नहीं ले रहा। सोमवार से किसानों के प्रस्तावित बेमियादी पड़ाव को लेकर पुलिस महकता सतर्क हो गया है। मुख्य अभियंता कार्यालय के आगे पुलिस का जाब्ता सुबह दस बजे तैनात कर दिया गया था। एएसपी व डीएसपी ने मुख्य अभियंता से जाकर कई देर तक वार्ता की। इसमें पुलिस के अफसरों ने पानी के गणित को समझने का प्रयास किया।
किसान नेताओं ने हर हाल में १२ दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग की है। जबकि विभागीय अभियंता तीन में एक समूह में पानी चलाने की बात कह रहे हैं। इसके कारण इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस मामले में जहां किसान नेताओं ने सोमवार से मुख्य अभियंता कार्यालय क आगे बेमियादी पड़ाव डालने की चेतावनी दी है, वहीं मुख्य अभियंता विनोद कुमार मित्तल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नहरी पानी की ताजा स्थिति स्पष्ट की है। ऐसे हालात में अब सबकी नजर मावठ पर टिकी हुई है। अच्छी मावठ होती है तो बांधों में पानी की आवक बढ़ जाएगी। इसके बाद पानी की कमी भी बांधों में दूर हो जाएगी। इससे इंदिरागांधी नहर क्षेत्र के किसानों को मांग के अनुसार पानी मिलना संभव हो सकेगा। पानी के मामले में जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता विनोद कुमार मित्तल ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि बारह दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। मित्तल ने बताया कि विभिन्न संगठनों के साथ अब तक हुई वार्ता में उपलब्ध सिंचाई पानी के संबंध में विस्तृत रूप से आंकड़ों को रखा जा चुका है। उन्होंने बताया कि २१ सितम्बर २०१९ को बीबीएमबी की ओर से इंदिरागांधी नहर प्रणाली के लिए आवंटित शेयर १५७६०६८ क्यूसेक डेज था। उक्त मात्रा को ध्यान में रखकर ३० सितम्बर २०१९ को जल परामर्शदात्री समिति की बैठक में लगभग नौ बारी पानी देना प्रस्तावित है। इसके तहत १९ सितम्बर से १२ दिसम्बर २०१९ तक पांच बारी पानी चार में दो समूह में तथा इसके बाद २३ मार्च २०२० तक चार बारी पानी तीन में एक समूह पानी दिया जाना तय किया गया था। उक्त लगभग नौ बारी पानी के लिए १७७८००० क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। इस तरह वर्तमान में नौ बारी पानी के लिए भी तय शेयर के तुलना में पानी की काफी कमी चल रही है। इस स्थिति में रेग्यूलेशन प्रोग्राम को रिव्यू करना उचित नहीं है। जितने पानी की कमी चल रही है, उसकी भरपाई दिसम्बर मध्य व जनवरी में होने वाली मावठ में होने के आसार हैं। मुख्य अभियंता ने बताया कि किसान संगठनों की मांग के अनुसार शेष चार बारियों में तीन में एक समूह के स्थान पर चार में दो समूह में नहरें चलाई जाती है तो पानी १८ फरवरी २०२० को ही खत्म हो जाएगा। जबकि मार्च में फसलों की पकाई के लिए पानी की बहुत जरूरत पड़ती है। इस स्थिति में किसान हितों का ध्यान रखते हुए इंदिरागांधी नहर के रेग्यूलेशन में परिवर्तन किया जाना उचित नहीं रहेगा।

समझें पानी का गणित
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सितम्बर से मार्च तक जो रेग्यूलेशन बनाया गया था, उसमें २३ प्रतिशत पानी को कमी मानकर किया गया था। इसमें से अभी तक १० प्रतिशत पानी की आवक ही हो पाई है। इस स्थिति में जब तक पानी की कमी दूर नहीं होती, तब तक किसानों की मांग को पूरा करने में दिक्कत आएगी।

बैठक से कर रहे इनकार
भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में सोमवार को जंक्शन में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष शुरू होने वाले बेमियादी पड़ाव को लेकर किसान नेताओं ने रविवार को कई गांवों में जनसंपर्क किया। जिलाध्यक्ष चरणजीत सिंह, उपाध्यक्ष जगदेव सिंह खोसा, अमरचंद चाहर व टिब्बी ब्लॉक अध्यक्ष कुलवंत सुथार सहित अन्य ने हर हाल में बारह दिसम्बर के बाद भी इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि पूरा पानी नहीं चलाने पर रबी की प्रमुख फसलें गेहूं, सरसों को काफी नुकसान होगा। उन्होने आरोप लगाया कि मुख्य अभियंता अब जल परामर्शदात्री समिति की बैठक बुलाने से परहेज कर रहे हैं। इसके कारण किसानों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है।

Purushottam Jha Reporting
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