हनुमानगढ़ जिले में सरकारी कर्मचारी ठाठ से तोड़ रहे गरीबों का निवाला

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हनुमानगढ़. जिले में कई सरकारी कर्मचारी कई माह से गरीबों के हक का निवाला ठाठ से निगल रहे हैं। सरकार की अनदेखी की वजह से लंबे समय से अपनी रसूख का इस्तेमाल कर ऐसे कर्मचारी लगातार सरकारी नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। हलांकि जिले में अब ऐसे ५९१ अपात्र परिवारों की सूची तैयार कर जिला रसद विभाग की टीम इनके नाम हटाने में लगी हुई है। इन सरकारी मुलाजिमों से वसूली की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

 

By: Purushottam Jha

Updated: 25 Jun 2020, 08:15 AM IST

हनुमानगढ़ जिले में सरकारी कर्मचारी ठाठ से तोड़ रहे गरीबों का निवाला
-सरकार की अनदेखी से खाद्य सुरक्षा सूची में नहीं थम रही गड़बडिय़ां
-खाद्य सुरक्षा सूची में जिले के ५९१ सरकारी कर्मचारियों के नाम शामिल
हनुमानगढ़. जिले में कई सरकारी कर्मचारी कई माह से गरीबों के हक का निवाला ठाठ से निगल रहे हैं। सरकार की अनदेखी की वजह से लंबे समय से अपनी रसूख का इस्तेमाल कर ऐसे कर्मचारी लगातार सरकारी नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं। हलांकि जिले में अब ऐसे ५९१ अपात्र परिवारों की सूची तैयार कर जिला रसद विभाग की टीम इनके नाम हटाने में लगी हुई है। इन सरकारी मुलाजिमों से वसूली की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
अभी तक जिले में करीब ९० से अधिक कर्मचारियों से करीब सात लाख रुपए से अधिक की वसूली भी कर ली गई है। इन अपात्र लोगों के नाम हटाकर उनसे २७ रुपए प्रति किलो के हिसाब से वसूली की जा रही है।
जिले में कुल २६०६०३ परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल हैं। दो अक्टूबर २०१३ को यह खाद्य सुरक्षा योजना शुरू हुई थी। लॉकडाउन से पहले चयनित परिवारों को प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं दो रुपए किलो के हिसाब से वितरित किया जाता था। लेकिन अब सरकार के निर्देश पर नि:शुल्क वितरित किया जा रहा है।

कई महकमे के कर्मचारी
जिले में खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल कई सरकारी मुलाजिम तो मोटी तनख्वाह ले रहे हैं। जिला रसद विभाग नोहर-भादरा क्षेत्र में कार्यरत प्रवर्तन निरीक्षक जय सिंह कुलडिय़ा ने बताया कि कुछ सदस्य तो ऐसे हैं जो रेलवे, बैंक, आर्मी, नेवी, सीआरपीएफ, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा विभाग व रेलवे में कार्यरत हैं।

नहीं जोड़ रहे पात्रों के नाम
खाद्य सुरक्षा सूची में एक तरफ जहां अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। वहीं पात्रों के नाम जोडऩे का काम रोक दिया गया है। लॉकडाउन लागू होने के तत्काल बाद विभागीय पोर्टल को बंद कर दिया गया था। इसके बाद से पोर्टल बंद ही पड़ा है। यानी लॉकडाउन के बाद जो गरीब हुए हैं, वह खाद्य सुरक्षा सूची में शामिल होने से वंचित हो रहे हैं।

नोटिस का नहीं असर
विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को नोटिस भेजकर खाद्य विभाग ने उनसे वसूली करने का निर्देश जारी किया है। लेकिन इन नोटिस का असर ज्यादातर कर्मचारियों पर नहीं पड़ा है। नोटिस जारी करने के एक पखवाड़े बाद भी खाद्य विभाग को जवाब का इंतजार है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार नोटिस का जवाब नहीं देने तथा रिकवरी में आनाकानी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ आगे विभाग एफआईआर करवा सकता है। इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी गई है।

.....फैक्ट फाइल....
-जिले में कुल ६८१ उचित मूल्य की दुकानें संचालित।
-जिले में कुल २६०६०३ परिवार खाद्य सुरक्षा योजना में चयनित हैं।
-लॉकडाउन से पहले चयनित परिवारों को दो रुपए प्रति किलो गेहूं वितरित किया जाता था। अब नि:शुल्क है।
- जिले में खाद्य सुरक्षा योजना में कुल ११ लाख सदस्यों के नाम हैं।
-इनमें ५९१ कर्मचारियों के नाम अब सूची से हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।
-जिले में अभी तक अपात्र लोगों से ०७ लाख रुपए की हो चुकी वसूली।

.......वर्जन.....
नाम हटा रहे
खाद्य सुरक्षा सूची में जिले के ५९१ सरकारी कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। इन्हें चिन्हित करके अब इनसे वसूली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनके नाम भी सूची से हटा रहे हैं।
-सुनील कुमार घोड़ेला, डीएसओ, हनुमानगढ़

Purushottam Jha Reporting
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