हमारे हक में विदेशियों ने ट्वीट किया तो तिलमिला गई बीजेपी

delहनुमानगढ़. किसान आंदोलन के हक में विदेशियों ने ट्वीट किया तो बीजेपी तिलमिला गई और कहने लगी कि यह भारत का अंदरूनी मसला है, इस पर किसी अन्य देश के लोगों को नहीं हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। लेकिन पीएम मोदी ने अमेरिका जाकर पूर्व राष्ट्रपति ड्रोनाल्ड ट्रंप के लिए वोट मांगे और फिर गुजरात बुलाकर, तब बीजेपी आईटी सेल चुप रही। अब तक बीजेपी आईटी सेल को चुप करवाने वाला कोई नहीं था। लेकिन अब किसान बीजेपी की आईटी सेल को मुंह तोड़ जवाब दे रही है। इसलिए तिलमिला रही है।

By: adrish khan

Published: 08 Feb 2021, 09:54 PM IST


28 मिनट के भाषण में भाकियू प्रदेशाध्यक्ष चढ़ूनी केंद्र सरकार पर जमकर बरसे
हमारे हक में विदेशियों ने ट्वीट किया तो तिलमिला गई बीजेपी
- बीजेपी आईटी सेल को किसान आंदोलन मुंह तोड़ दे रहा जवाब
हनुमानगढ़. किसान आंदोलन के हक में विदेशियों ने ट्वीट किया तो बीजेपी तिलमिला गई और कहने लगी कि यह भारत का अंदरूनी मसला है, इस पर किसी अन्य देश के लोगों को नहीं हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। लेकिन पीएम मोदी ने अमेरिका जाकर पूर्व राष्ट्रपति ड्रोनाल्ड ट्रंप के लिए वोट मांगे और फिर गुजरात बुलाकर, तब बीजेपी आईटी सेल चुप रही। अब तक बीजेपी आईटी सेल को चुप करवाने वाला कोई नहीं था। लेकिन अब किसान बीजेपी की आईटी सेल को मुंह तोड़ जवाब दे रही है। इसलिए तिलमिला रही है। किसान नेता व हरियाणा भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी सोमवार को जंक्शन की धानमंडी में आयोजित किसान सभा में इस तरह केंद्र सरकार पर बरसे। किसान नेता चढ़ूनी ने दो टूक में कहा कि जबतक तीनों कृषि कानून निरस्त नहीं होंगे तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान सभा को संबोधित करते हुए है उन्होंने कहा कि हमारा संघर्ष अमीर बनने का नहीं है और ना ही अढ़ानी व अबानी बनने का है। हमारा संघर्ष है अपना रोजगार और जीवन बचाने का है।

अढ़ानी व अबानी का किया बहिष्कार
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि देश को आजाद कराने में आप लोगों ने कुबार्नियां दी। लेकिन किसी एक भी पूंजीपति का बेटा देश की आजादी के लिए शहीद नहीं हुआ। देश को आजाद करवाया था लोगों का राज लोगों द्वारा लोगों को लिए लेकिन हो गया है पूजीपतियों का राज पूंजीपतियों द्वारा पूंजीपतियों के लिए। देश में जहां उत्तम खेती थी मध्यम व्यापार था। आज खेती कोई करना नहीं चाहता। खेती करने वाले भूखे मर रहे हैं। किसान दो से तीन लाख रुपए के कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। बैंक वाले इन्हें परेशान कर रहे हैं। लेकिन अरबों रुपए का व्यापार करने वाले देश छोड़ गए ना तो उन्होंने आत्यहत्या की और ना ही बैंक वालों ने उन्हें परेशान किया। सभा के दौरान किसान नेता चढ़ूनी ने अढ़ानी, आबानी व बाबा रामदेव के सभी प्रोडेक्ट का बहिष्कार करने की अपील की।

कृषि कानून नहीं खेती व्यापार कानून है
तीनों कृषि कानून पर तंज कसते हुए कहा कि कृषि कानून नहीं ये खेती व्यापार कानून है। खेती करने वाले कुछ नहीं मिलेगा। हमारी सरकार डब्ल्यूटी में शामिल हो चुकी है। इसमें कहीं का व्यापार कहीं भी कर सकता है। जो व्यापारी खरीदेगा वो वल्र्ड मार्केट के आधार पर खरीदेगा ना कि हिन्दुस्तान की मार्केट के हिसाब से। वल्र्ड मार्किट में सरसों का दाम है 3200 के करीब है। धान व मक्के का दाम है 1100 रुपए। वल्र्ड मार्किट का मुकाबला हमारे किसान नहीं कर सकते। अमेरिका के किसान के पास हजारों किले भूमि है लेकिन हमारे किसानों के पास दस, बीस, तीस किले जमीन है। अमेरिका में किसानों को सब्सिडी दी जाती है। लेकिन हमें क्या मिलते है। वो लोग हिन्दुस्तान में अपनी फसलें भेजेंगे तो हमारे किसानों से कौन खरीदीगा। बाहर से दालें मंगवानी कम कर दें तो एमएसपी से भी अधिक दालें मंडी में बिकेगी।


केंद्र सरकार की बकरी से की तुलना
किसान नेता चढ़ूनी ने केंद्र सरकार की बकरी से तुलना करते हुए एक कहावत भी सुनाई। इन्होंने कहा कि जब तक मोदी सरकार के मार नहीं पड़ेगी और दो कदम पीछे नहीं हटेंगे। तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अभी तो पत्थर के कई बार चोट पहुंच चुकी है यह चोट तब तक जारी रहेगी जबतक पत्थर पूरी तरह टूट नहीं जाता।

जिद्द पकड़ ली है कॉरपोरेट को व्यापार देने की
किसान नेता चढ़ूनी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की 11 बार वार्ता हो चुकी है। गृह मंत्री ने हाल ही में सदन में कहा कि एमएसपी था, एमएसपी है और रहेगा। इस पर हमने पूछा कि क्या केंद्र सरकार जिन्होंने 23 फसलों का एमएसपी तय कर रखा है वह खरीदेगी। लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं दिया। केंद्र सरकार कॉरपोरेट को व्यापार देने की जिद्द पर अड़ी है। लेकिन हम यह नहीं होने देंगे।

शांतिपूर्ण करना है आंदोलन
किसाने नेता ने अपील की यह आंदोलन शांतिपूर्ण चलेगा। आपको कितना भी कोई उकसाया जाए लेकिन हमें शांति के साथ यह आंदोलन तब तक चलाना है जबतक केंद्र सरकार तीनों कानून निरस्त नहीं कर देती। उन्होंने कहा कि सरकारें बदल कर देख ली, सरकारें बदलना इलाज नहीं है। एक गई, दूसरी आई, दूसरी बदली तो तीसरी आई। सरकारें जरूर बदली, चेहरे जरूर बदले लेकिन नीतियां नहीं बदली। नीतियां बदलवाने के देश में एक बड़े आंदोलन, बड़ी क्रांति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र सहित देशभर के लोग ऐतिहासिक आंदोलन लड़ रहे हैं। यह देश की दिशा और दशा बदलने का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि हमारी लाखों की भीड़ भी आंदोलन के दौरान शांति बनाए हुए है। गुरनाम सिंह चढूनी ने 26 जनवरी के मामले को खुलकर किसानों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि वे सभी लोग सरकार के ही थे। ऐसा किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की नीयत से किया गया और यह सुनियोजित था। इसके प्रमाण उस रोज के दिल्ली के खुले द्वार हैं। किसानों ने ट्रैक्टर परेड पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से निकाली थी। ट्रैक्टर परेड में दो लाख ट्रैक्टर और कई लाखों लोग शामिल हुए। लेकिन एक पत्ता तक नहीं तोड़ा। खुद सरकार ने शरारत करवाई। केसरी झंडी को खालिस्तान का झंडा दिखा दिया। सरकार की क्रूरता के बावजूद रैली हुई। अब तक 30-35 मुकदमे हत्या प्रयास के आरोप में किसानों के खिलाफ दर्ज हो चुके हैं।


जो शामिल नहीं हुए, उन्हें वोट भी नहीं
किसान नेता चढ़ूनी ने कहा कि जो किसान आंदोलन में शामिल नहीं हो रहे। उन्हें अगली बार वोट भी नहीं देने, यह जरूर ध्यान रखना। सभा के बाद प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इसमें उन्होंने हनुमानगढ़ में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि अब एकजुट होने का समय है। सभी को अपने-अपने स्तर पर केंद्र सरकार को कृषि कानून को लेकर घेरना होगा। तभी सरकार बैकफुट पर आएगी।

इसलिए हो रही महापंचायत
किसान नेता चंढ़ूनी ने कहा कि 28 जनवरी के बाद आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। इस आंदोलन का दायरा और बढ़ाने के लिए अब जगह-जगह महापंचायत की जा रही है और लोगों से शाहाजहांपुर बार्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने की भी अपील की जा रही है ताकि केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून को निरस्त करने पर मजबूर किया जा सके।

किसान महापंचायत में यह हुए शामिल
किसान महापंचायत में नगर परिषद सभापति गणेश राज बंसल, उपसभापति अनिल खीचड़, पार्षद सुमित रणवा, पूर्व जिला प्रमुख राजेन्द्र मक्कासर, पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह बराड़, कृष्ण जाखड़, रामेश्वर वर्मा, रघुवीर वर्मा, गुरमीत सिंह चन्दड़ा, बृजलाल भादू, इन्द्रसिंह मक्कासर, प्रो. ओम जांगू, सौरभ राठौड़, जगदेव सिंह, सरपंच बलदेव सिंह, रोहित स्वामी, पार्षद गुरदीप सिंह चहल, पूर्व प्रधान जयदेव भीड़ासरा, जिला परिषद डायरेक्टर मंगेज चौधरी, मनीष गोदारा, रणजीत सिंह, अभिमन्यू पूनिया, प्रियंका चाहर, जगजीत सिंह जग्गी, विक्रम नैण, अमन संधू, सिद्धार्थ कस्वां आदि शामिल हुए। मंच का संचालन शैलेन्द्र मेघवाल ने किया।

adrish khan Reporting
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